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डोकलाम के बाद चीन का नया पेंच, लटकाई भारत की महत्वाकांक्षी परियोजना

Sun, 15 Oct 2017 10:22 PM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली 
एजेंसी/ नई दिल्ली  Updated Sun, 15 Oct 2017 10:22 PM IST
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Chinese railways delays high speed train project after Doklam issue

दक्षिण भारत में महत्वाकांक्षी हाई स्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट की व्यवहारिकता के आकलन संबंधी जानकारी चीनी रेलवे द्वारा नहीं दिए जाने के कारण इस परियोजना में देर हो रही है। 

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रेलवे के मुताबिक, चाइनीज रेलवे ने फिजिबिलिटी स्टडी का काम एक साल पहले ही पूरा कर लिया था इसके बावजूद उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। रेल अधिकारियों का कहना है कि हो सकता है डोकलाम विवाद के कारण ही चीनी रेलवे ने कोई जवाब न दिया हो।
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हाई-स्पीड प्रोजेक्ट्स की स्थिति पर मोबिलिटी डायरेक्ट्रेट द्वारा दी गई जानकारी में कहा गया है कि 492 किलोमीटर लंबा चेन्नई-बंगलूरू-मैसूर कॉरिडोर का काम लटक गया है क्योंकि चीनी रेलवे ने अब तक अपना जवाब नहीं दिया है। 
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मोबिलिटी डायरेक्ट्रेट के नोट में कहा गया है कि चीनी कंपनी ने नवंबर 2016 में फाइनल रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद चीनी टीम ने आमने-सामने बातचीत का सुझाव दिया था लेकिन इस बारे में अब तक उनकी ओर से कोई तारीख तय नहीं की गई है। नोट में प्रोजेक्ट की लेट-लतीफी का कारण साफ तौर पर चीनी रेलवे की ओर से जवाब न दिए जाने को माना गया है। 

पढ़ें- इस दिवाली पर निकलेगा चीन का 'दिवाला', बिक्री में होगी भारी गिरावट


नोट में कहा गया है कि चाइना रेलवे एरियुअन इंजिनियरिंग ग्रुप कंपनी लिमिटेड (सीआरईईसी) ने नवंबर 2016 में रेलवे बोर्ड को स्टडी रिपोर्ट सौंपी थी। अब आमने-सामने बातचीत को लेकर अधिकारियों का कहना है कि बोर्ड का सीआरईईसी के अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

एक को छोड़ बाकी में तेजी से चल रहा काम
रेलवे के मुताबिक, इस एक परियोजना को छोड़कर बाकी सभी आठ हाई स्पीड कॉरिडोर का काम तेज गति से चल रहा है। चीन ने मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड नेटवर्क के काम को भी पाने का प्रयास किया था लेकिन संयोगवश जापान को यह काम मिला। फिलहाल चीन भारत के रेलवे इंजिनियरों को प्रशिक्षित कर रहा है। चीन के सहयोग से ही भारत पहला रेल विश्वविद्यालय शुरू करना चाहता है। 

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