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चीनी मीडिया: भारत के पास डोभाल का दौरा आखिरी मौका

Fri, 21 Jul 2017 02:50 PM IST
BBC
BBC Updated Fri, 21 Jul 2017 02:50 PM IST
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Chinese media: Doval's visit to China, India has the last chance for peace.
अजीत डोभाल - फोटो : The Indian Express

गुरुवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भारत और चीन में जारी तनाव के बीच लोकसभा में सरकार का रुख स्पष्ट किया था। सुषमा के बयान को लेकर चीनी मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया छपी है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के चीनी संस्करण ने लिखा है, ''यह महिला विदेश मंत्री भारतीय सांसदों से झूठ बोल रही है क्योंकि यह निर्विवाद रूप से सच है कि भारतीय सैनिकों ने चीनी इलाकों में अतिक्रमण किया है। भारत के इस जोखिम भरे कदम से अंतरराष्ट्रीय समुदाय हैरान है और भारत के इस कदम का कोई भी देश समर्थन नहीं करेगा।''

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अखबार ने आगे लिखा है, ''भारत सैन्य शक्ति के मामले में चीन से बहुत पीछे है। अगर भारत ने सैन्य समाधान का जोखिम उठाया तो उसे बेशक हार का सामना करना पड़ेगा। चीन कभी दोनों देशों के सैनिकों की वापसी जैसे समाधान को स्वीकार नहीं करेगा। जहां गतिरोध है वह चीन का इलाका है। भारत को एकतरफा और बिना शर्त के सैनिकों को वापस बुलाना चाहिए। चीन अपनी नीति से पीछे नहीं हटने वाला।''
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गुरुवार को सुषमा स्वराज ने लोकसभा में कहा था, ''चीन का कहना है कि भारत अपने सैनिकों को डोकलाम से वापस बुलाए। अगर कोई बातचीत करनी है तो दोनों देश अपनी-अपनी सेना को वापस बुलाएं। भारत की तरफ से कोई भी अतार्किक बात नहीं कही जा रही है। इस मामले में सारे देश हमारे साथ हैं। भूटान जैसे छोटे देश में चीन इतना आक्रामक हो रहा है।'' सुषमा ने आगे कहा था, ''एक जगह ऐसी है जिसे ट्राइ-जंक्शन स्पॉट कहते हैं और यहां पर लिखित में सहमति है कि भारत, चीन और तीसरा देश भूटान मिलकर चीजों को तय करेंगे। उनकी नीयत इस बार ये है कि वो इस बार नीचे आ जाएं जिससे वहां की यथास्थिति खत्म हो जाए।''

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Chinese media: Doval's visit to China, India has the last chance for peace.
अजीत डोभाल

दोनों देशों में तनाव पर बीजिंग लीगल इवनिंग न्यूज ने मुंबई में चीनी वाणिज्य दूतावास के पूर्व काउंसिल जनरल लिउ योउफा का इंटरव्यू छापा है। इस इंटरव्यू में लिउ ने कहा, ''जहां तक मैं अंतरराष्ट्रीय कानून समझता हूं उसके मुताबिक जब सैनिक किसी दूसरे देश की सरहद पार करते हैं तो वो दुश्मन बन जाते हैं और इसके सिर्फ तीन नतीजे होते हैं या तो वह देश खुद से अपने सैनिकों को वापस बुलाए या उन सैनिकों को बंदी बना लिया जाए। अगर स्थिति बिगड़ती है तो उन्हें नष्ट कर दिया जाना चाहिए।''

इस इंटरव्यू में उन्होंने आगे कहा, ''चीन इंतजार कर रहा है कि भारत पहला विवेकपूर्ण विकल्प चुने और सैनिकों को वापस बुला ले। यह दोनों पक्षों के लिए अच्छा होगा।'' भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ब्रिक्स देशों के एनएसए की बैठक में शामिल होने 26 जुलाई को बीजिंग पहुंच रहे हैं। चीन-भारत सीमा विवाद में डोभाल विशेष दूत हैं।

दोनों देशों के तनाव पर हॉन्ग कॉन्ग ओरिएंटल डेली न्यूज ने लिखा है, ''अगर भारतीय नेता चीन को उकसाने का मतलब अब भी नहीं समझ रहे हैं तो उनका कल्पनाओं से परे की त्रासदी के साथ अंत होगा। चीन का मानना है कि डोभाल का चीन दौरा इस मामले में भारत के पास शांति के लिए आखिरी मौका है।'' अखबार ने लिखा है, ''अगर एक बार मौका हाथ से निकल गया तो युद्ध ही रास्ता होगा। चीन एक अगस्त को आर्मी दिवस मनाने जा रहा है। उम्मीद है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी उस दिन अपनी ताकत दिखाएगी। इस युद्ध की आग जरूरी नहीं है कि डोकलाम तक ही सीमित रहे बल्कि संपूर्ण सरहद को चपेट में लेगी।''

Chinese media: Doval's visit to China, India has the last chance for peace.
chinese-army

हैदराबाद 18 से 28 जुलाई तक 19वां रिजनल कॉम्परहेंसिव इकनॉमिक पार्टनर्शिप (आरसीइपी) की मेजबानी कर रहा है। इस बैठक और तनाव को लेकर ग्लोबल टाइम्स इंग्लिश ने लिखा है, ''भारत और चीन को सीमा पर तनाव से बाज आना चाहिए ताकि दोनों देशों को व्यापार से जुड़े समझौतों में किसी बाधा का सामना नहीं करना पड़े। चीन को उम्मीद है कि भारत सीमा पर तनाव कम करने की कोशिश करेगा। अगर भारत ऐसा करता है तो आरसीइपी की बैठक में समस्या पैदा नहीं होगी।''

दोनों देशों के बीच इस तनाव का असर चीन में सोशल मीडिया यूजर्स पर भी साफ दिख रहा है। चीन में हुनान प्रांत के एक इंटरनेट यूजर ने लिखा है, ''नीति-निर्माताओं को सतर्क रहना चाहिए। ऐसा लग रहा है कि मोदी ने भारतीयों को अति-आत्मविश्वास से भर दिया है। इस माहौल में दंभी आशावाद को हवा मिल रही है और उत्तेजना 1962 के युद्ध की तरह है।''

इसी प्रांत से एक और इंटरनेट यूजर ने लिखा है, ''युद्ध, युद्ध और युद्ध। हमें जरूर युद्ध करना चाहिए। अगर वे सैनिक भी वापस बुला लेते हैं तब भी हमें युद्ध करना चाहिए। हमें दक्षिणी तिब्बत सिक्किम को भी वापस लेना चाहिए।'' यांताई शानडोंग प्रांत से एक यूजर ने लिखा, "सीमा विवादों के बारे में भ्रम मत पालो और ये उम्मीद मत करो कि दूसरा देश मित्रतापूर्ण व्यवहार करेगा। भारत निश्चित तौर पर इस बार तैयार है। फिलीपींस जैसा एक छोटा सा देश भी हमसे नहीं डर रहा तो भारत को क्यों डरना चाहिए?"

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