काले को धोकर गोरा बना डाला,अब हो रहा है विवाद
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चीन में डिटर्जेंट के एक नस्लवादी विज्ञापन से विवाद पैदा हो गया है। विज्ञापन में एक चीनी औरत एक काले आदमी को डिटर्जेंट खिलाकर वॉशिंग मशीन में डाल देती है, जिसमें धुलने के बाद वो गोरा होकर निकलता है। कियाओबी ब्रांड के लिए
तैयार इस विज्ञापन की शुरुआत में एक काला आदमी एक चीनी युवती को देखकर सीटी बजाता है और आंखों से इशारे करता है।
युवती उसे बुलाकर उसके मुंह में डिटर्जेंट रख देती है। इसके बाद उसे वॉशिंग मशीन में डाल देती है। इसके कुछ ही पलों बाद उसमें से एक गोरा चीनी युवक निकलता। महिला ये देख खुश हो जाती है और मुस्कुरा कर स्वागत करती है।
विज्ञापन को लेकर अमरीका की कई न्यूज वेबसाइटों पर आलोचना शुरू हो गई है, जिसमें कहा गया है कि ये चीन में काले लोगों के प्रति यह नस्लीय रवैये का उदाहरण है। वीओएक्स डॉट कॉम के मुताबि, 'यह विज्ञापन बिल्कुल ही नस्लवादी है।'
यह हमें बताता है कि चीन में नस्ल और त्वचा के रंग के प्रति क्या नजरिया है।' हालांकि इस विज्ञापन चीन में कुछ लोगों का ध्यान खींचने में सफल रहा और सोशल मीडिया में इसे करीब 2,000 लोगों ने देखा, कुछ लोगों ने टिप्पणी भी की है।
मालिक ने कहा मुझे ये नस्लवादी नहीं लगा
विवाद पर डिटर्जेंट कियाओबी के मालिक शिआ ने बीबीसी से कहा, 'जबतक लोगों ने इस ओर ध्यान नहीं दिलाया, मुझे ये नस्लवादी नहीं लगा था। सच कहें तो मैंने इस पर बहुत ध्यान नहीं दिया था।' यह ऐड एक महीना पुराना है लेकिन सोशल मीडिया पर अभी आया है और लोग इसकी खूब लानत मलामत कर रहे हैं।
ऐतिहासिक रूप से चीन में अफ्रीकी मूल के लोगों का आगमन लगभग शून्य रहा है, हालांकि हाल के सालों में इनकी संख्या बढ़ी है क्योंकि चीन और अफ्रीकी महाद्वीप के देशों का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार बनकर उभरा है। चीन में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। चीन में 1990 के दशक में डार्ली ब्रांड के टूथपेस्ट का अनुवाद 'काले लोगों का टूथपेस्ट' के रूप में किया गया था। इसका पहले का वर्जन डार्की था।