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दुनिया के शीर्ष नेताओं को चीन की चेतावनी- दलाई लामा से मिलना माना जाएगा 'बड़ा अपराध'

Sat, 21 Oct 2017 03:12 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
टीम डिजिटल/अमर उजाला Updated Sat, 21 Oct 2017 03:12 PM IST
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China Zhang Yijiong warns world leaders Meeting Dalai Lama major offence
DALAI LAMA - फोटो : File Photo

चीन ने चेतावनी दी है कि अगर कोई देश या विदेशी नेता दलाईलामा को अपने यहां आमंत्रित करता है या उनसे मिलने की कोशिश करता है तो उसे ‘बड़ा अपराध’ माना जाएगा क्योंकि वह तिब्बती धर्मगुरु को ‘अलगाववादी’ मानता है जो तिब्बत को उससे अलग करना चाहते हैं।

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चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के एक वरिष्ठ नेता झांग यीजोंग ने कहा कि अगर कोई भी देश या संगठन दलाईलामा से मिलने की सहमति व्यक्त करता है, उसे चीन के लोगों की भावनाओं के खिलाफ बड़ा गुनाह माना जाएगा। चूंकि सभी देशों ने यह स्वीकार किया है कि तिब्बत पर चीन का अधिकार है, इसलिए दलाईलामा से मिलने की कोई भी कोशिश उनकी इस प्रतिबद्धता के खिलाफ है। झांग ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 19वीं कांग्रेस से इतर संवाददाताओं से बातचीत में ये बातें कहीं।
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झांग ने कहा कि चीन विदेशी सरकारों से इस तर्क को सहमत नहीं है कि वे 82 वर्षीय दलाईलामा से बतौर धार्मिक नेता मुलाकात करते हैं। बकौल झांग, ‘मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि 14वें दलाईलामा धर्म की आड़ में एक राजनीतिक शख्सियत हैं।’ भारत का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि दलाईलामा 1959 में अपनी मातृभूमि से विश्वासघात कर ‘दूसरे देश’ भाग गए और वहां अपनी निर्वासित सरकार का गठन किया। वह तथाकथित सरकार अलगाववादी एजेंडे पर काम कर रही है।

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पहले से करता रहा है विरोध
चीन हमेशा से ही दलाईलामा के विदेशी नेताओं से मिलने का विरोध करता रहा है। अगर कोई भी देश उसके साथ राजनयिक संबंध बनाना चाहता है तो उसे तिब्बत को चीन का अंग मानना पड़ता है। यहां तक कि भारत ने जब दलाईलामा को अरुणाचल प्रदेश सहित उत्तर-पूर्व के राज्यों के दौरे की अनुमति दी थी, तो चीन ने इस पर आपत्ति जताई थी।  

दलाईलामा 58 साल पहले तिब्बत से भागे थे
चीनी शासन के खिलाफ तिब्बत में एक नाकाम जन विद्रोह का नेतृत्व करने वाले दलाईलामा वहां से 1959 में भागकर भारत पहुंचे थे। तब से वे हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में रह रहे हैं। धर्मशाला के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी तिब्बती शरणार्थियों के कैंप हैं।    

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