तिलमिलाया चीन, अमेरिका को दी परमाणु युद्ध की धमकी
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अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति द्वारा अगले विदेश मंत्री के रूप में नामित रैक्स टिलरसन ने कल चीन को दक्षिण सागर के विवादित इलाके में सक्रियता रोकने की प्रतिक्रिया दी थी। इस बात से बुरी तरह तिलमिलाए चीन ने धमकी दी है कि दक्षिण चीन सागर के द्वीपों पर चीन को रोकने के लिए अमेरिका को युद्ध छेड़ना होगा। उसने कहा कि अमेरिका को चाहिए कि वह अपनी परमाणु रणनीतियों को कस ले।
चीन की तरफ से यह धमकी उसके सरकारी मीडिया ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने दी है। टिलरसन ने अपने नामांकन की पुष्टि संबंधी सुनवाई के लिए सीनेट की विदेश मामलों की समिति के समक्ष पेश होते वक्त उन्होंने चीन को यह संकेत दिए थे कि दक्षिण सागर में चीन द्वीपों पर किया जाने वाला निर्माण बंद कर दे।
उन्होंने कहा था कि चीन के पास ‘इसकी अनुमति नहीं’ है। इस पर ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने कहा है कि यहां के द्वीपों पर चीन की पहुंच रोकने के लिए अमेरिका को ‘एक बड़े स्तर का युद्ध’ लड़ना होगा। अखबार के मुताबिक - ‘टिलरसन यदि एक विशाल परमाणु शक्ति को उसी के अपने इलाके से हटाना चाहता है तो उसे अपनी परमाणु रणनीतियों को भी कस लेना चाहिए।’
टिलरसन एक्सॉन मोबिल कॉर्प के चेयरमैन और पूर्व सीईओ हैं और अमेरिका में उनकी नियुक्ति पर विवाद हो रहा है। इसी विवाद को आधार बनाकर अखबार ने लिखा है - ‘ऐसा लगता है कि टिलरसन चीन के प्रति सख्त रवैया अपनाकर अपनी नियुक्ति की पुष्टि की संभावना बढ़ाना चाहते थे।’
राष्ट्रवाद से भरे तीखे संपादकीय लिखने के लिए मशहूर ‘ग्लोबल टाइम्स’ सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र है। हालांकि इसमें लिखी गईं बातों को चीन की नीति भले ही नहीं माना जाता हो लेकिन चीन सरकार इस अखबार के माध्यम से अपनी बात कहती रही है। अखबार ने यहां तक कहा है कि टिलरसन को तो मंत्री पद मिलेगा ही नहीं और उनकी नियुक्ति को अमेरिकी संसद ‘कांग्रेस’ वीटो कर देगी।
दक्षिण-चीन सागर में तेल और गैस भंडार हैं विवाद का कारण
दक्षिणी चीन सागर का पूरा इलाका तेल, गैस व ऊर्जा स्रोतों से भरा पड़ा है। हर साल 5 खरब डॉलर का व्यापार इसी रास्ते से होता है। यहां से अमेरिकी नौसेना और वायुसेना के जहाज भी आते जाते रहे हैं, जिस पर चीन नाराजगी जताता रहा है।
दूसरी तरफ, पड़ोसी देश ब्रूनेई, मलेशिया, ताइवान और वियतनाम भी दक्षिण चीन सागर के द्वीपों पर दावा करते हैं। चीन चाहता है कि उसे इस इलाके से तेल व गैस के निकालने की आजादी मिलना चाहिए। आशंका है कि आगे चलकर चीन यहां से गुजरने वाले जहाजों पर वह टैक्स भी वसूल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय अदालत दे चुकी है चीन के खिलाफ फैसला
हाल ही में द हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत ने चीन के दावों को खारिज करते हुए दक्षिणी चीन सागर के मामले में फिलीपींस के पक्ष में फैसला दिया था। इसे मानने से चीन ने इंकार कर दिया, जबकि अमेरिका कहता रहा है कि चीन को अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले का सम्मान करना चाहिए।
चीन ने इस फैसले के बावजूद दक्षिण चीन सागर में न सिर्फ द्वीप पर हवाई पट्टी बना ली है बल्कि वह इस क्षेत्र में युद्धाभ्यास भी कर रहा है। इसके लिए चीन ने अपने एयरक्राफ्ट ले जाने वाले जहाज को भी तैनात कर रखा है, जिस पर पूरी दुनिया आपत्ति जता चुकी है।