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हिमालय के रास्ते आर्थिक गलियारे का इच्छुक चीन चाहता है भारत की 'हां'

Wed, 18 Apr 2018 06:37 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 18 Apr 2018 06:37 PM IST
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China wants an economic corridor through the Himalayas, want India's 'Yes'

हिमालय के जरिए चीन ने बुधवार को भारत-नेपाल-चीन के बीच बहुआयामी संपर्क बनाने के लिए एक आर्थिक गलियारे का प्रस्ताव किया है। इस प्रस्ताव के पीछे चीन की मंशा है कि वह नेपाल के नए प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार पर अपना व्यापक प्रभाव छोड़े, क्योंकि ओली को बीजिंग का समर्थक माना जाता है।

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भारत-चीन-नेपाल आर्थिक गलियारे का इच्छुक है चीन

चीन का यह प्रस्ताव नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली की उनके चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात के बाद सामने आया है। एक संयुक्त प्रेस वार्ता में यी ने कहा कि चीन और नेपाल ने हिमालय पार एक बहुआयामी संपर्क नेटवर्क स्थापित करने के दीर्घकालीन दृष्टिकोण पर सहमति जताई है। हाल ही में नेपाली चुनाव में ओली सरकार के सत्ता में आने के बाद ग्यावली अपनी पहली चीन यात्रा पर गए थे। 
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हिमालय के रास्ते तीनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए चीनी विदेश मंत्री का प्रस्ताव

यी ने कहा कि चीन-नेपाल पहले ही अरबों डॉलर वाली बेल्ट एंड रोड पहल (बीआरआई) पर दस्तखत कर चुके हैं, जिसमें बंदरगाह, रेलवे, राजममार्ग, उड्डयन और संचार को लेकर रिश्तों का दीर्घकालिक दृष्टिकोण शामिल है। भविष्य में यह दृष्टिकोण चीन-नेपाल-भारत आर्थिक गलियारे के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगा। इसके बाद चीनी विदेश मंत्री ने कहा, हम मानते हैं कि बेहतर ढंग से विकसित इस प्रकार का नेटवर्क चीन, नेपाल और भारत को भी जोड़ने वाले आर्थिक गलियारे के लिए अनुकूल स्थिति पैदा कर सकता है। 
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उन्होंने कहा, हम आशा करते हैं कि इस सहयोग से तीनों देशों के लिए विकास और समृद्धि में योगदान मिलेगा। यह पूछने पर कि क्या ग्यावली की चीन यात्रा का मकसद पीएम ओली की भारत यात्रा से निपटने का लक्ष्य हासिल करना था, वह बोले कि भारत, चीन व नेपाल के बीच यह मामला त्रिपक्षीय सहयोग से सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बीजिंग और नई दिल्ली को इसे सुविधाजनक बनाना चाहिए, क्योंकि भारत, नेपाल और चीन प्राकृतिक दोस्त और पार्टनर हैं। हम नदियों और पहाड़ों से जुड़े आपसी पड़ोसी हैं।

हिंद महासागर में चीनी युद्धपोत का भारतीय नौसेना ने व्यंग्यात्मक ढंग से किया स्वागत

China wants an economic corridor through the Himalayas, want India's 'Yes'

हिंद महासागर में मंगलवार को जब चीन के तीन युद्धपोत दिखाई दिए तो भारतीय नौसेना ने इस गतिविधि का विरोध बेहद ही व्यंग्यात्मक अंदाज में किया। भारतीय नौसेना ने चीनी युद्धपोतों को देखकर ट्वीट किया कि पीएलए-नेवी की 29वीं एंटी-पाइरेसी एस्कॉर्ट फोर्स का हिंद महासागर के इलाके में स्वागत है, हैपी हंटिंग। यद्यपि यह एक साधारण ट्वीट ही था, लेकिन इससे बीजिंग को एक बड़ा संदेश दिया गया है, क्योंकि पिछले कुछ समय से चीन लगातार हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। 

चीन का कहना है कि उसने अपने युद्धपोतों को पाइरेसी को देखते हुए तैनात किया है और उसका लक्ष्य हिंद महासागर क्षेत्र में अध्ययन के लिए बेस तैयार करना है। भारतीय नौसेना ने इस स्वागत ट्वीट के बाद युद्धपोतों की तैनाती का नक्शा जारी करते हुए एक और ट्वीट किया। इसमें लिखा, फारस की खाड़ी से मलक्का स्ट्रेट तक, उत्तर में बंगाल की खाड़ी से दक्षिणी हिंद महासागर तक और अफ्रीका के पूर्वी छोर तक हम 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं और अपने इलाके को हर समय, हर तरह से सुरक्षित रखने के लिए सक्षम हैं।

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