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भारत को चीन की धमकी: हमसे अमेरिका भी नहीं टकरा सकता
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 22 Dec 2016 08:19 PM IST
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दलाई लामा
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चीन से निर्वासित नेता दलाई लामा की राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से मुलाकात पर चीन भड़क गया है। बीजिंग ने भारत को चीन के आंतरिक मामलों में दखल न देने की भी नसीहत दी है और कहा है कि जब अमेरिका भी उसके मामले में दखल देने की हिम्मत नहीं है तो फिर भारत की क्या बिसात है।
चीन के सरकारी मीडिया 'ग्लोबल टाइम्स' ने भारत को बिगड़ैल बच्चा बताते हुए कहा है कि भारत के पास महान देश बनने की क्षमता तो है लेकिन उसका विजन दूरदर्शी नहीं है। चीन ने भारत को एक तरह से धमकी देते हुए मंगोलिया के मामले का उदाहरण दिया जिसे दलाई लामा को आमंत्रित कर चीन से 'दुश्मनी' मोल ली। बाद को मंगोलिया ने कहना पड़ा कि वह दलाई लामा को दोबारा देश का दौरा करने की इजाजत नहीं देगा। गौरतलब है कि दलाई लामा इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति मुखर्जी एक सामाजिक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति भवन में थे।
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चीन के सरकारी मीडिया 'ग्लोबल टाइम्स' ने भारत को बिगड़ैल बच्चा बताते हुए कहा है कि भारत के पास महान देश बनने की क्षमता तो है लेकिन उसका विजन दूरदर्शी नहीं है। चीन ने भारत को एक तरह से धमकी देते हुए मंगोलिया के मामले का उदाहरण दिया जिसे दलाई लामा को आमंत्रित कर चीन से 'दुश्मनी' मोल ली। बाद को मंगोलिया ने कहना पड़ा कि वह दलाई लामा को दोबारा देश का दौरा करने की इजाजत नहीं देगा। गौरतलब है कि दलाई लामा इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति मुखर्जी एक सामाजिक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति भवन में थे।
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क्या लिखा है ग्लोबल टाइम्स में
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ग्लोबल टाइम्स ने संपादकीय में लिखा है, 'भारत का रुख उसकी आकांक्षा और उसकी ताकत के बीच का अंतर है। भारत चीन के आंतरिक मुद्दों में दखल दे, ये उसके बूते से बाहर की बात है। चीन के खिलाफ भारत वक्त-बेवक्त दलाई लामा कार्ड का इस्तेमाल करता रहा है।'
'हाल में ही ताइवान के मुद्दे पर चीन और अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बीच जो वाकया हुआ उससे भारत को सीख लेनी चाहिए। अपने आंतरिक हितों की रक्षा के चीन के संकल्प को टेस्ट करने के लिए ट्रंप ने जो कदम उठाया और इसके बदले उन्हें जो जवाब मिला, उससे उन्हें समझ आ गया होगा कि चीन की संप्रभुता और राष्ट्रीय एकता को खंडित नहीं किया जा सकता है।'
'हाल में ही ताइवान के मुद्दे पर चीन और अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बीच जो वाकया हुआ उससे भारत को सीख लेनी चाहिए। अपने आंतरिक हितों की रक्षा के चीन के संकल्प को टेस्ट करने के लिए ट्रंप ने जो कदम उठाया और इसके बदले उन्हें जो जवाब मिला, उससे उन्हें समझ आ गया होगा कि चीन की संप्रभुता और राष्ट्रीय एकता को खंडित नहीं किया जा सकता है।'