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चीन बना रहा है तैरने वाला परमाणु प्लांट, दक्षिणी चीन सागर में करेगा तैनात
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 08 Nov 2016 07:16 AM IST
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- फोटो : Reuters
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दक्षिणी चीन सागर पर अपनी दावेदारी को सेकर सजग चीन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए तैरने वाला परमाणु प्लांट बनाने का काम शुरू कर दिया है। चीन की योजना इस तैरने वाले परमाणु प्लांट को 2020 के अंत तक तटीय इलाके में तैनात करने की है।
इस परमाणु प्लांट को चीन के सरकारी नियंत्रण वाली कंपनी चाइना जनरल न्यूक्लियर पावर ग्रुप तैयार कर रही है। इस परमाणु प्लांट का नाम ACPR50S रखा गया है।
200 मेगॉवाट क्षमता वाले इस परमाणु प्लांट की मदद से चीन अपने तटीय इलाकों में उर्जा की जरूरतों को पूरा कर सकेगा। चाइना जनरल न्यूक्लियर पावर ग्रुप कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि समुद्रीय इलाकों में उर्जा की आपूर्ति एक समस्या था लेकिन इस परमाणु प्लांट से चीन को इस समस्या से भी निजात मिल जाएगी और वो बड़ी समुद्री ताकत के तौर पर उभरेगा।
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इस परमाणु प्लांट को चीन के सरकारी नियंत्रण वाली कंपनी चाइना जनरल न्यूक्लियर पावर ग्रुप तैयार कर रही है। इस परमाणु प्लांट का नाम ACPR50S रखा गया है।
200 मेगॉवाट क्षमता वाले इस परमाणु प्लांट की मदद से चीन अपने तटीय इलाकों में उर्जा की जरूरतों को पूरा कर सकेगा। चाइना जनरल न्यूक्लियर पावर ग्रुप कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि समुद्रीय इलाकों में उर्जा की आपूर्ति एक समस्या था लेकिन इस परमाणु प्लांट से चीन को इस समस्या से भी निजात मिल जाएगी और वो बड़ी समुद्री ताकत के तौर पर उभरेगा।
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1970 में अमेरिका बनाना चाहता था तैरने वाला परमाणु प्लांट
इस परमाणु प्लांट को बनाने की मंजूरी चीन सरकार ने इस साल की शुरूआत में दी थी। जुलाई 2016 में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की ओर से दक्षिणी चीन सागर पर चीन के दावे को खारिज करने के तुरंत बाद ही चीनी मीडिया ने अपनी रिपोर्ट्स में कहा था कि चीन समुद्र में परमाणु पावर प्लांट्स बनाने की योजना पर काम करेगी।
गौरतलब है कि तैरने वाले परमाणु पावर प्लांट्स बनाने का प्रस्ताव सबसे पहले 1970 में अमेरिका में लाया गया था, लेकिन बाद में इस प्रस्ताव को किसी कारणवश रोक लिया गया था।
बता दें कि दक्षिणी चीन सागर विवादित क्षेत्र है जिसकी संप्रभुता पर चीन के अलावा, ताइवान, फिलीपिंस, वियतमान, मलेशिया और ब्रूनेई भी दावा करते हैं। ऐसे में चीन के इस कदम से दक्षिणी चीन सागर में तनाव और बढ़ने की उम्मीद हैं।
गौरतलब है कि तैरने वाले परमाणु पावर प्लांट्स बनाने का प्रस्ताव सबसे पहले 1970 में अमेरिका में लाया गया था, लेकिन बाद में इस प्रस्ताव को किसी कारणवश रोक लिया गया था।
बता दें कि दक्षिणी चीन सागर विवादित क्षेत्र है जिसकी संप्रभुता पर चीन के अलावा, ताइवान, फिलीपिंस, वियतमान, मलेशिया और ब्रूनेई भी दावा करते हैं। ऐसे में चीन के इस कदम से दक्षिणी चीन सागर में तनाव और बढ़ने की उम्मीद हैं।