जलवायु परिवर्तन पर अमेरिका पीछे हटा तो चीन आया आगे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक जलवायु परिवर्तन पर अमेरिका के बदलते रुख के बावजूद चीन इससे जुड़ी प्रतिबद्धताओं पर कायम रहेगा। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लियू कांग ने कहा कि - ‘जलवायु परिवर्तन एक सामूहिक चुनौती है, पेरिस समझौता इस दिशा में किया गया एक बड़ा फैसला था जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी काम किया गया है, जिसमें अमेरिका और चीन भी शामिल हैं।’
चीन का यह बयान ट्रंप द्वारा ओबामा प्रशासन की नीतियों को बदलने वाले अध्यादेश पर दस्तखत के ठीक दूसरे दिन आया है। इसे चीन की दुनिया का नेतृत्व करने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। ऊर्जा संयंत्रों से निकलने वाली ग्रीन हाउस गैसों को कम करने व जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए होने वाले पेरिस समझौते पर विश्व के 200 देशों ने सहमति जताई थी। चीन चाहता है कि अमेरिका के अलग होने के बाद इन देशों का उसे समर्थन मिले।
अमेरिका समेत पूरी दुनिया में ट्रंप की आलोचना
पेरिस समझौते का मकसद पूरी धरती का तापमान 2 डिग्री सेंटीग्रेड तक कम करने के लिए कोशिशें करना था। इस पर ट्रंप के पीछे हटने की अमेरिका समेत कई देशों ने आलोचना की है। जर्मनी की पर्यावरण मंत्री बारबरा हेंडरिक्स ने कहा कि ट्रंप जलवायु संरक्षण की दिशा में हुई प्रगति को नहीं रोक सकते हैं।
फ्रांस के पूर्व विदेश मंत्री लॉरा फैबियस ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग पर अमेरिकी प्रशासन का पीछे हटना बेहद ही गंभीर है। नीदरलैंड ने भी ट्रंप के इस फैसले की निंदा की है। उधर, अमेरिका में कैलिफोर्निया प्रांत के गवर्नर जेरी ब्राउन ने ट्वीट किया कि - ‘जलवायु परिवर्तन जैसे विषय को खत्म कर देना डोनाल्ड ट्रंप के दिमाग में ही आ सकता है।’