चीन के इस लड़ाकू विमान ने उड़ाई रूस की नींद
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चीन लगातार अपनी सैन्य ताकत में इजाफा कर रहा है। अब ड्रैगन की एयर फोर्स में रूस में बने 4 सुखोई सु-35 लड़ाकू शामिल हो गए है। रूस ने 2 साल की देरी के बाद चीन को ये विमान डिलिवर किए हैं। लेकिन चीन ने इस डिलिवरी पर भी कूटनीतिक वार कर दिया है। पीपल्स लिबरेश आर्मी के एक न्यूज पोर्टल के मुताबिक चीन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि चीन में निर्मित जे-20 लड़ाकू विमान को देखते हुए रूस डर रहा है कि कहीं उसके सुखोई सु-35 की वैल्यू एविएशन मार्केट में कम न हो जाए।
सुखोई सु-35, रूस के ही बनाए सुखोई सु-30 का एडवांस्ड वर्जन है। ये विमान भारत के पास भी हैं।
कहा जा रहा है कि जबसे चीन ने जुहाई एयरशो में अपने जे-20 का प्रदर्शन किया, तब से सु-35 की डिलिवरी तेजी आगे बढ़ी। हालांकी रूस ने चीन को यह विमान 2 साल की देरी के बाद दिया है। कुछ जानकार इसे चीन और रूस के बेहतर होते संबंधों की बानगी भी करार दे रहे हैं।
क्या हैं जे-20 की खासियतें?
ये छोटी और बड़ी दूरी वाली हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस होगा। 1300 मील प्रति घंटे की रफ्तार से यह विमान उड़ान भर सकता है।
जे-20 को अमेरिका के एफ-22 रेप्टर और एफ-35 ज्वाइंट स्ट्राइक फाइटर से समकक्ष बताया जा रहा है।
बता दें कि अमेरिकी एफ-35 दुनिया के सबसे उन्नत पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में से एक है।
चीन का चेंगदू जे-20 अमेरिकी एफ-35 के मुकाबले सस्ता है, इसलिए चीन इस विमान के किफायती वाले पहलू पर इतराता रहा है। वैसी ही प्रतिक्रिया अब रूस के साथ देखने मिल रही है। चीन को लगता है कि उसका किफायती विमान दूसरे देश खूब खरीदेंगे।
'सुखोई सु-35 आखिरी डिलिवरी, रुस से अब विमान नहीं खरीदेगा चीन'
चीन लगातार अपनी वायु सेना में नए लड़ाकू विमानों को शामिल कर बेड़े का ताकत बढ़ा रहा है। इसमें जे-20 के साथ जे-15 भी शामिल है, जिन्हें चीन के विमानवाहक पोत लायनिंग से ऑपरेट किया जा सकता है। लायनिंग ने हाल में दक्षिण चीन सागर में सेना की फायर ड्रिल को अंजाम दिया था।
चीन का दूसरा सबसे घातक लड़ाकू विमान कहा जा रहा जे-20 हालांकि अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है। अभी यह निर्माण के दौर से गुजर रहा है। चीन के सैन्य अधिकारी ने यह भी कहा कि कोई भी देश तभी खुद पर निर्भर कर सकता है जब वह खुद पर विश्वास करे। इसलिए ये माना जा सकता है कि चीन ने रूस से सु-35 के रूप में आखिरी लड़ाकू विमान लिया है।
मीडिया खबरों के मुताबिक चीन मे भले ही नए लड़ाकू विमान बनाए हैं, लेकिन विमान के इंजन के लिए उसे रूस पर निर्भर करना पड़ सकता है।