मैन्यूफैक्चरिंग में भारतीय चुनौती से सकपकाया चीन
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भारत से मिल रही प्रतियोगिता में लगातार हो रही वृद्घि के बीच चीन को अपने मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को अपग्रेड करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। क्योंकि भारत में श्रम सस्ता होने के कारण एप्पल जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की दिलचस्पी इस देश में बढ़ती जा रही है। यह बात बुधवार को चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स में कही गई है। समाचार पत्र के एक आलेख में कहा गया है कि अमेरिका के भावी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मैन्यूफैक्चरिंग रोजगार अमेरिका में वापस ले जाने का वादा किया है और चीन के प्रतियोगी का कद और बड़ा हो रहा है, क्योंकि एप्पल का एक मैन्यूफैक्चरिंग साझेदार भारत में एसेंबली संयंत्र लगाने पर काम कर रहा है।
आलेख में कहा गया है कि एप्पल द्वारा आपूर्ति श्रृंखला को भारत स्थानांतरित करने से चीन पर दबाव और बढ़ गया है, क्योंकि खुद चीन की घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां भी सस्ते देशों में अपना उत्पादन स्थानांतरित करना चाहती हैं।
सरकारी समाचार पत्र में आगे कहा गया है कि यह हालांकि एक अलग सवाल है कि भारत आपूर्ति श्रृंखला को अपने देश में जगह दे पाने के लिए तैयार है या नहीं और यह कि वह मैन्यूफैक्चरिंग पावरहाउस के रूप में चीन जैसी सफलता हासिल कर सकेगा या नहीं। लेकिन जो परिस्थिति पैदा हो रही है, उससे यह समझ में आता है कि चीन को मैन्यूफैक्चरिंग रोजगार को बरकरार रखने और प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए अपने मैन्यूफैक्चरिंग उद्योग को अपग्रेड करने की जरूरत है।
एप्पल संग अन्य कंपनियां भी आ सकती है भारत
चीनी स्मार्टफोन 40 फीसदी भारतीय बाजार पर काबिज
बीजिंग। चीन के स्मार्टफोनों का गत वर्ष करीब 40 फीसदी भारतीय बाजार पर कब्जा हो गया। यह बात सरकारी समाचार पत्र चाइना डेली ने कही। समाचार पत्र ने वैश्विक रिसर्च कंपनी इंटरनेशनल डाटा कारपोरेशन (आईडीसी) के एक सर्वेक्षण के हवाले से कहा कि गत वर्ष की तीसरी तिमाही में लेनोवो की बिक्री सैमसंग के बाद दूसरे स्थान पर रही। वहीं, श्याओमी 10.7 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर रही।
भारत के 30 प्रमुख शहरों के किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक चीन की फोन निर्माता कंपनियों की कुल बाजार हिस्सेदारी 40 फीसदी रही। इसी दौरान भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी में गिरावट देखी गई। सर्वेक्षण के मुताबिक माइक्रोमैक्स की बिक्री अक्तूबर में माह-दर-माह आधार पर 16.7 फीसदी घट गई।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत में कीमत को लेकर प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है और मोबाइल फोन की औसत कीमत 100 डॉलर रह गई है। भारतीय ग्राहक कीमत के मामले में चीन के लोगों से भी अधिक संजीदा हैं। उल्लेखनीय है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है।