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रोहिंग्या मुद्दे पर भिड़े म्यांमार-बांग्लादेश को समझाने में जुटा चीन

Tue, 21 Nov 2017 10:40 AM IST
टीम डिजिटल अमर उजाला
टीम डिजिटल अमर उजाला Updated Tue, 21 Nov 2017 10:40 AM IST
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china is performing as mediater between myanmar and bangladesh on rohingyas issue know why

वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) को मजबूत स्थिति में लाने की हर कोशिश में जुटे चीन ने रोहिंग्या मुद्दे पर कूटनीतिक चाल चलने की कोशिश की है। चीन मुद्दे पर म्यांमार और बांग्लादेश के बीच मीडिएटर की भूमिका निभा रहा है और दोनों देशों को समझाने में जुट गया है। ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए चीन एक प्रोपोजल ले कर आया है। 

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दरअसल, म्यांमार के रखाइन स्टेट के रोहिंग्याओं के पलायन पर यूएन ने रिपोर्ट जारी की थी, जिसके मुताबिक करीब 6 लाख रोहिंग्या मुसलमानों को विवादित क्षेत्र छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। अब रोहिंग्याओं के दूसरे देशों में घुसपैठ करने के उसके पड़ोसी मुल्कों से रिश्ते बिगड़ने लगे हैं। ऐसे में बांग्लादेश से संबंध सुधारने के लिए चीन अहम भूमिका निभाना रहा है।
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बता दें कि चीन के विदेश मंत्री वॉन्ग यी बांग्लादेश और म्यांमार के दौरे पर हैं, जिन्होंने अपने प्रोपोजल में म्यांमार की ओर से हो रहे सीजफायर पर रोक की मांग उठाई है। उन्होंने रोहिंग्याओं के म्यांमार से जबरन निकलने और बांग्लादेश में घुसने पर चिंता जताई। प्रोपोजल को तीन फेज में बांटा गया है, पहले ये कि ढाका में इसे स्वीकार करे। 
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चीन का दूसरा कदम यह है कि बांग्लादेश और म्यांमार अपने संबंधों को मजबूत स्थिति में लाएं। वहीं तीसरा यह कि इंटरनेशनल कॉम्युनिटी पिछड़े हुए रखाइन स्टेट को उभरने में मदद करे। हालांकि, चीन ने साफ इनकार कर दिया है कि वो मीडिएटर की भूमिका निभा रहा है, लेकिन चीन दोनों देशों के संबंधों में मजबूती चाहता है।


पढ़ें: शेख हसीना बोलीं- रोहिंग्या शरणार्थियों को जारी रहेगी मदद

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक चीन अपने ओबीओआर प्रोजेक्ट में बांग्लादेश और म्यांमार की भागीदारी लंबे समय से चाहता है और ऐसा उसने नेपाल और भारत के साथ भी किया है। लेकिन, नेपाल के पीछे कदम करने से उसकी मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। करीब 3 साल पहले म्यांमार ने भी एक डेम प्रोजेक्ट से खुद को पीछे कर लिया था। 

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