जी-20: क्या हैं भारत और चीन के दांव-पेंच
चीन में शुरू हो रहे जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की है। इससे पहले मोदी वियतनाम गए जहां दोनों देशों के बीच 12 अहम समझौते हुए हैं। अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच भी मुलाकात हुई।
विश्व के 40 फीसदी कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार इन दोनों देशों ने पर्यावरण पर पेरिस समझौते में शामिल होने की औपचारिक घोषणा भी की। पर्यावरण में बदलाव के लिए कार्बन उत्सर्जन को ही जिम्मेदार माना जाता है।
बीजिंग में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार सैबल दास गुप्ता बता रहे हैं कि जी-20 सम्मेलन में भारत और चीन क्या-क्या दाव-पेंच खेल सकते हैं। चीन का इस समझौते में शामिल होना भारत के लिए आश्चर्यजनक बात है। क्योंकि भारत को लगता था कि अमरीका इसमें शामिल हो जाएगा। लेकिन उसे उम्मीद थी कि चीन उसके साथ अमरीका के विरोध में होगा।
अब चीन के अमरीका के साथ पेरिस समझौते में शामिल होने से भारत पर दबाव बनेगा। भारत पर भी अब इसी साल पेरिस समझौते में शामिल होने का दबाव बनेगा। भारत अब तक कहता रहा है कि वो इस समझौते में शामिल होने के लिए अभी तैयार नहीं है।
समझौते में अभी बहुत कानूनी पेंच हैं
अमरीका और चीन मिलकर विश्व के चालीस फीसदी कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगड़िया का कहना है कि इस समझौते में अभी बहुत कानूनी पेंच हैं जो भारत को सुलझाने बाकी हैं। भारत इतने कम समय में इसे करने को तैयार नहीं हैं।
उम्मीद है कि आज शुरू होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत और भारत जैसे कई अन्य देशों को इस समझौते में शामिल होने के लिए और समय देने की बात कही जाए। इस तरह भारत को थोड़ी छूट भले मिल जाए लेकिन अमरीका और चीन के हाथ मिलाने से उस पर इस मामले में दबाव जरूर बढ़ जाएगा।
वहीं भारत और वियतनाम के करीब आने से चीन पर भी कूटनीतिक दबाव बन रहा है। दक्षिण चीन सागर के विवादित क्षेत्र में चीन अपना दबदबा बढ़ाने की कोशिशें कर रहा है। विश्लेषक मानते हैं कि चीन को संदेश देने के लिए ही मोदी चीन पहुँचने से पहले वियतनाम गए।
भारत और जापान का करीब आना चीन के लिए चिंता की बात
ऐसे में चीन पहुँचने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वियतनाम पहुँचना इस बात का साफ संकेत है कि भारत आसानी से चीन के दबाव में आने वाला नहीं हैं। जब भारत एनएसजी का सदस्य बनना चाह रहा था तब चीन ने विरोध किया था।
जब भारत पर पाकिस्तान से आने वाले चरमपंथी हमला करते हैं तब चीन संयुक्त राष्ट्र में उनका बचाव करता है। ऐसे में मोदी वियतनाम चीन को ये बताने के लिए ही गए हैं कि भारत भी कूटनीतिक दाव खेल सकता है।
रविवार को शी जिनपिंग और नरेंद्र मोदी की मुलाकात होगी तब भारत और चीन के रिश्तों की कई अहम बातों पर चर्चा होगी। यही नहीं प्रधानमंत्री मोदी रविवार को ब्रिक्स की दक्षिण एशियाई बैठक में भी शामिल होंगे और ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और अर्जेंटीना के नेताओं से मुलाकात करेंगे। हालांकि नरेंद्र मोदी की अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात नहीं होगी। उनकी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात होने की भी संभावना है।