चीन किया इस्लामी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का बचाव
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चीन ने कहा है कि वो किसी भी विदेशी संस्था अथवा व्यक्ति को इस बात की इजाजत नहीं देगा कि कोई यहां के झिंगिआंग प्रांत में मौजूद इस्लामिक आतंकियों के धार्मिक मामले में दखल दे सके। चीन की ओर से 'फ्रीडम ऑफ रिलीजिस बिलीफ' नाम से एक श्वेत पत्र जारी किया गया है जिसमें यह कहा गया है कि धार्मिक अतिवादी धर्म के नाम पर और कट्टरता फैलाना एवं अतिवादी विचार एक तरह का धर्मतंत्र स्थारपित करना चाहते हैं। श्वेत पत्र में कहा गया है कि झिंगिआंग अद्वितीय रूप से धार्मिक स्वतंत्रता का पालन कर रहा है और किसी अन्य काल से उसकी तुलना नहीं की जा सकती।
पत्र में यह भी कहा गया है कि प्रांत में आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिरता को बढ़ावा देने में धार्मिक हलकों की सकारात्मक भूमिका अच्छी तरह से प्रदर्शित किया जाता है। साथ ही साथ सरकार धार्मिक मामलों की क्षमता को लगातार मजबूत बनाया है । पत्र में यह कहा गया है कि धार्मिक उग्रवाद को प्रभावी ढ़ंग से कम किया जा रहा है।
श्वेत पत्र में कहा गया है कि धार्मिक अतिवाद स्वभाव से 'मानव विरोधी, समाज विरोधी, सभ्यता विरोधी और धर्म विरोधी होता है।' पत्र में चीन द्वारा धार्मिक अतिवाद से लड़ने के प्रयासों का बचाव भी किया गया है। पत्र में कहा गया है कि चीन की सरकार धार्मिक मामलों का राजनीतिकरण के साथ साथ धर्म के नाम पर देश के आंतरिक मामलों में किसी भी तरह के दखल का सख्ती से विरोध करती है। पत्र में लिखा गया है कि चीन किसी भी विदेशी संगठन अथवा व्यक्ति को इस बात की इजाजत नहीं देगा कि वो देश के धार्मिक मामलों में दखल दे।
बता दें कि चीन के झिंगिआंग प्रांत में तुर्की मूल 10 लाख उग्युर मुस्लिम रहते हैं और बीते कई सालों से यहां उथल पुथल चल रही है।