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सामने आया चीन के सस्ते कपड़ों के पीछे का गंदा सच

Tue, 18 Dec 2018 03:32 PM IST
अजय सिंह वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: अजय सिंह Updated Tue, 18 Dec 2018 03:32 PM IST
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cheap clothes in china due to uighur detention camp
चीन में मुससमानों के लिए चलनेवाले कैंप का नजारा - फोटो : CCTV13
बाजार में मिलने वाले सस्ते सामानों को खरीदते समय लोग-बाग कह देते हैं, "चाइना का माल है क्या।" हर सामान की तरह चीन में बना कपड़ा भी बहुत सस्ते में मिल जाता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के सामने आने के बाद चीन के इस खेल के पीछे का घिनौना सच सामने आ गया है। 
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मुफ्त के मजदूर

चीन पर सैकड़ों हजार मुसलमानों को झिंजियांग प्रांत के शिविरों में जबरन नजरंबद कर उन्हें अपने विचारों को बिना विरोध के मानने के लिए प्रशिक्षण देने का आरोप है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इन संख्या करीब 10 लाख है। नजरबंद किए गए इन लोगों में मुख्य रूप से उइघुर समुदाय के साथ साथ कज्जाख और अन्य जातीय अल्पसंख्यक शामिल हैं।
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चीन का कहना है कि ये व्यावसायिक प्रशिक्षण शिविर हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक नए सबूत बताते हैं कि बलपूर्वक प्रशिक्षण के अलावा इन शिविरों में बंद लोगों को शिविरों में स्थापित या आसपास के कारखानों में भेजा जा रहा है। 
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लोगों का हो रहा दमन

कजाकिस्तान में सेरिकजान बिलाश अटजर्ट कजाख मानवाधिकार संगठन के संस्थापक हैं। यह संगठन पड़ोसी झिंजियांग प्रांत से भाग कर आनेवाले जातीय कजाखों की मदद करता है। अटजर्ट ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि उन्होंने 10 कैदियों के रिश्तेदारों से मुलाकात की थी।

उन्होंने अपने परिवारों से कहा था कि शिविरों में क्लास खत्म होने के बाद उनसे कारखानों में जबरदस्ती काम कराया गया। उन्होंने बताया कि वे ज्यादातर कपड़े बनाते थे, जो मुख्य रूप से मध्य एशियाई बाजारों में निर्यात किए जाते हैं। 

उद्योग का समर्थन हासिल

इससे पहले चीन नेशनल टेक्सटाइल और परिधान परिषद के अध्यक्ष ने उद्योग के वरिष्ठ प्रतिनिधियों को शिविरों के बारे में बताया था। उन्होंने कहा कि झिंजियांग ने 2018 में कपड़ा और वस्त्र क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा कर्मचारियों को बढ़ाने के लिए तीन मुख्य स्रोतों से भर्ती करने की योजना बनाई है। ये हैं - गरीब परिवार, कैदियों और बंदियों के संघर्ष करनेवाले रिश्तेदार और शिविर के कैदी।


अप्रैल में झिंजियांग सरकार ने कपड़ा और परिधान कंपनियों को आकर्षित करने की योजना शुरू कर दी। इन योजनाओं में से एक थी- हर कैदी को प्रशिक्षित करने के लिए उन्हें दी जाने वाली 260 डॉलर की सब्सिडी। 
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