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भारत से रिश्तों में सीमा विवाद सबसे बड़ी चुनौती: चीन
एजेंसी/ बीजिंग
Updated Mon, 27 Jun 2016 10:16 PM IST
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- फोटो : PTI
चीन मानता है कि भारत के साथ सीमा विवाद और उभर कर आए कुछ नए मुद्दों की वजह से द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाना बड़ी चुनौती बन गया है। चीन के विदेश मामलों के मंत्री लि हुईलाई ने कहा कि सीमा विवाद समेत इन मुद्दों को कैसे सुलझाना है, यह सबसे बड़ी चुनौती है।
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साथ ही चीन ने यह भी माना है कि दोनों पक्ष बैठकर बातचीत के जरिए इन मुद्दों का मुनासिब और स्वीकार्य हल निकालने के पक्ष में है। ताकि इन मुद्दों की वजह से दोनों देशों के रिश्तों पर असर न पड़े।
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चीन कह रहा है कि भार के साथ कुछ नए जटिल मुद्दे उभर कर आए हैं। मगर उसने यह साफ नहीं किया है कि आखिर ये मुद्दे आखिर हैं क्या ? उधर वित्त मंत्री जब पिछले हफ्ते पांच दिन की चीन यात्रा पर थे।
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तब उन्होंने कहा था कि सीमा विवाद की वजह से दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर कुछ असर पड़ा है मगर इसी के साथ ही दोनों देशों के बीच कारोबार भी बढ़ रहा है।
अभी इसी साल अप्रैल में हुई चीन के साथ सीमा विवाद पर बैठक हुई थी। चीन का कहना है कि सीमा विवाद महज 2,000 किलोमीटर क्षेत्र में है, जिसमें से ज्यादातर अरुणाचल प्रदेश में आता है। जबकि भारत का कहना है कि विवाद करीब 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा पर है।
विशेष रूप से अक्साई चीन वाले क्षेत्र में जिसपर 1962 के युद्ध में चीन ने कब्जा कर लिया था। जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंध लगाने के रास्ते बाधा बनने के सवाल पर चीन के पास कोई सटीक जवाब नहीं है।
चीन का कहना है कि वे हर तरह के आतंकवाद के लड़ाई के समर्थन में है और साथ ही अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ मुकाबले में यूएन की समन्वय की भूमिका की पैरवी करता है। वहीं एनएसजी में भी भारत की राह रोकने पर चीन का कहना है कि परमाणु अप्रसार संधि को लेकर सर्वसम्मति नहीं थी। चीन परमाणु अप्रसार संधि का समर्थन करता है और कई देशों ने भी चीन के रुख का समर्थन किया था।
Published By Rahul Sankrityayan