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हांगकांग का मुद्दा: अब यूरोपियन यूनियन को धमकाने पर उतर आया है चीन

Thu, 27 Jan 2022 03:43 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 27 Jan 2022 03:43 PM IST
सार

चीन सबसे ज्यादा यूरोपीय संसद के प्रस्ताव के उस हिस्से से खफा है, नेशनल सिक्युरिटी लॉ को रद्द करने की मांग की गई है। साथ ही इस प्रस्ताव में सभी राजनीतिक बंदियों की रिहाई की मांग भी की गई है। इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हांगकांग प्रशासन के प्रवक्ता ने इस प्रस्ताव को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करार दिया...

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China warned to EU that if EUropean union does not stop referring to Hong Kong's internal affairs could impact on eu-China relations
हांग कांग - फोटो : iStock

विस्तार

यूरोपियन यूनियन (ईयू) के प्रति चीन की आक्रामकता बढ़ रही है। इस बात का संकेत चीन के सरकार समर्थक मीडिया में छपी हाल की टिप्पणियों से मिला है। इनमें कहा गया है कि अगर ईयू ने हांगकांग के ‘आंतरिक मामलों’ का जिक्र करना बंद नहीं किया, तो ईयू-चीन संबंधों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। इनमें जिक्र किया गया है कि हांगकांग में यूरोप की 2,300 कंपनियां कारोबार कर रही हैं। उसके अलावा यूरोप के साढ़े तीन लाख लोगों के आर्थिक हित वहां से जुड़े हुए हैं।

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चीनी की ये प्रतिक्रिया बीते 20 जनवरी को यूरोपीय संसद से पारित एक प्रस्ताव के जवाब में आई है। उस प्रस्ताव में हांगकांग में ‘मानव अधिकारों की बिगड़ती हालत’ की निंदा की गई थी। प्रस्ताव में इल्जाम लगाया गया था कि हांगकांग में अभिव्यक्ति, सभा करने, और प्रेस की आजादी पर प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। प्रस्ताव यूरोपीय आयोग और तमाम यूरोपीय देशों से कहा गया कि वे विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की हांगकांग की सदस्यता को समर्थन देने के अपने रुख पर पुनर्विचार करें।

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प्रस्ताव को बताया ‘रद्दी का टुकड़ा’

चीन और हांगकांग के सरकारी अधिकारियों ने यूरोपियन संसद के प्रस्ताव को ‘रद्दी का टुकड़ा’ बताया था। उधर विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि हांगकांग में सियासी माहौल जून 2020 में चीन की तरफ से नेशनल सिक्युरिटी लॉ लागू करने के बाद से बिगड़ा है। लेकिन कारोबार पर नजर रखने वाले पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस कानून के कारण अब तक हांगकांग में व्यापार करने वाली यूरोपीय कंपनियों पर कोई असर नहीं पड़ा है।

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इन्वेस्ट हांगकांग नाम की एजेंसी में निवेश प्रोत्साहन विभाग के महानिदेशक स्टीफन फिलिप्स ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा कि कोरोना महामारी और उससे जुड़े आर्थिक मसलों के कारण हांगकांग में कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों की संख्या घटी है। लेकिन नेशनल सिक्युरिटी लॉ की इसमें कोई भूमिका रही हो, इस बात का कोई सबूत नहीं है। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि अब ऐसा हो सकता है।

‘गीदड़ भभकी’ से नहीं डरेगा चीन

बताया जाता है कि चीन सबसे ज्यादा यूरोपीय संसद के प्रस्ताव के उस हिस्से से खफा है, नेशनल सिक्युरिटी लॉ को रद्द करने की मांग की गई है। साथ ही इस प्रस्ताव में सभी राजनीतिक बंदियों की रिहाई की मांग भी की गई है। इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हांगकांग प्रशासन के प्रवक्ता ने इस प्रस्ताव को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करार दिया। साथ ही कहा- वह समय काफी पहले गुजर चुका है, जब चीन को धमकाया जा सकता था। अब सरकारी अखबार वेन वेई पो में छपी एक टिप्पणी में कहा गया है कि चीन यूरोपीय संसद की ‘गीदड़ भभकी’ से नहीं डरेगा।



इसी टिप्पणी में कहा गया- ‘चीन और ईयू के बीच आम रुझान सहयोग का रहा है। हांगकांग की समृद्धि और स्थिरता का संबंध 2,300 से ज्यादा यूरोपीय कंपनियों और हांगकांग में रहने वाले साढ़े तीन लाख से ज्यादा यूरोपीय नागरिकों से भी है।’ विश्लेषकों का कहना है कि ये टिप्पणी साफ तौर पर एक प्रकार की धमकी है। इसके जरिए चीन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि अगर ईयू हांगकांग में मानव अधिकार हनन के मुद्दों को उठाता रहा, तो उसकी कीमत उसकी कंपनियों और नागरिकों को चुकानी पड़ेगी।

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