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जलवायु परिवर्तन की चिंता को दरकिनार कर चीन ने फिर खोला बंद कोयला खदानों को

Thu, 12 Aug 2021 06:57 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 12 Aug 2021 06:57 PM IST
सार

पर्यवेक्षकों का कहना है कि दुनिया के तमाम देशों के साथ चीन के सामने भी बिजली का उत्पादन बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की चुनौतियां हैं। हाल के वर्षों में चीन जीवाश्म ऊर्जा पर अपनी निर्भरता घटाने की नीति पर चल रहा था। लेकिन ऐसा लगता है कि अब उसने ये नीति पलट दी है...

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China reopens its coal mines in mongolia, bypassing climate change concerns
कोयला खदान - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

जिस समय जलवायु परिवर्तन की नई चेतावनियों के साथ दुनियाभर में कच्चे तेल और कोयले का उपयोग घटाने की मांग उठ रही है, चीन ने अपने बंद 53 कोयला खदानों को फिर से खोल दिया है। चीन के राष्ट्रीय विकास सुधार आयोग के बयान के मुताबिक ऐसा देश में बिजली की बढ़ी मांग के कारण किया गया है।

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मंगोलिया में स्थित 38 कोयला खदानों को दोबारा खोलने का एलान चीन ने पिछले हफ्ते ही किया था। अब उसने 15 और खदानों को खोलने की घोषणा की है। ये खदान उसके शांक्शी और शिनजियांग प्रांतों में हैं। फिलहाल कहा गया है कि ये खदान एक साल तक चालू रहेंगी और उनसे चार करोड़ 40 लाख टन कोयले का उत्पादन होगा। चीन सरकार ने कहा है कि चीन में पड़ रही तेज गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ी है। बिजली का उत्पादन बढ़ाने के लिए कोयले की जरूरत है। सरकारी बयान में कहा गया कि कोयले की उपलब्धता बढ़ने से औद्योगिक गतिविधियों को भी ताकत मिलेगी।
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पर्यवेक्षकों का कहना है कि दुनिया के तमाम देशों के साथ चीन के सामने भी बिजली का उत्पादन बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की चुनौतियां हैं। हाल के वर्षों में चीन जीवाश्म ऊर्जा पर अपनी निर्भरता घटाने की नीति पर चल रहा था। लेकिन ऐसा लगता है कि अब उसने ये नीति पलट दी है।
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ये कदम उसने उस समय उठाया है कि जब संयुक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन समिति ने अपनी ताजा रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन घटाने के लिए दुनिया को तुरंत कदम उठाने होंगे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो धरती का तापमान पूर्व-औद्योगिक काल की तुलना में दो डिग्री सेल्शियस से ज्यादा न बढ़ने देने का लक्ष्य परास्त हो जाएगा।

दूसरी तरफ चीन से लगातार बिजली सप्लाई की स्थिति खराब होने की खबरें मिल रही हैं। कुछ महीने पहले जब वहां तेज ठंड पड़ रही थी, उसी समय कई प्रांतों में बिजली की सप्लाई में कटौती का फैसला लेना पड़ा था। उससे लोगों को भारी दिक्कत हुई थी। गुजरे वर्षों में कोयला खदान बंद करने के फैसले के बाद चीन में कोयले का भाव ऊंचा रहा है। इस साल मई में बिजली घरों में इस्तेमाल होने वाले कोयले की कीमत आसमान छूने लगी थी। चीन में बिजली उत्पादन के लिए कोयला हमेशा से सबसे सस्ता स्रोत रहा है।

हाल में अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने एक रिपोर्ट में बताया था कि चीन ने सौर ऊर्जा के पैनल बनाने में बाकी देशों पर बढ़त बना ली है। लेकिन जानकारों का कहना है कि ये बढ़त उतनी नहीं है, जिससे चीन की सारी मांग पूरी हो सके। इसीलिए उसने कोयला खदानों को फिर से खोलने का फैसला किया है।


लेकिन इससे जलवायु परिवर्तन संबंधी वार्ताओं में चीन का पक्ष कमजोर हो सकता है। गौरतलब है कि पिछले जून में जारी हुई एक अध्ययन रिपोर्ट में बताया गया था कि चीन, इंडोनेशिया, जापान, वियतनाम और भारत, उन पांच देश हैं, जहां एशिया में होने वाले कुल कोयला उत्पादन का 80 फीसदी उत्पादित होता है।

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