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China-Pakistan Relation: चीन भी आखिर कितना बचाएगा पाकिस्तान को इस कंगाली से! जानें पूरा मामला

Fri, 11 Feb 2022 05:41 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, इस्लामाबाद
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 11 Feb 2022 05:41 PM IST
सार

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान पर चीन का कर्ज बढ़ते-बढ़ते 18.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। यानी देश पर जो कुल विदेशी कर्ज है, उसमें 20 फीसदी हिस्सा चीन का है।

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China-Pakistan Relation Imran Khan Xi Jinping Bankcrupt Latest News Update
इमरान खान और शी जिनपिंग - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अब सामने आ रही खबर के मुताबिक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी हाल की बीजिंग यात्रा के दौरान चीन से नौ बिलियन डॉलर का बेलआउट पैकेज देने की गुजारिश की। इसमें वित्तीय सहायता के अलावा लिए जा चुके कर्ज के भुगतान के लिए अधिक समय देने का अनुरोध शामिल है। उन्होंने चीनी नेताओं को बताया कि अगर चीन ने ये उदारता नहीं दिखाई, तो मुमकिन है कि पाकिस्तान समय पर कर्ज ना चुका पाए। यानी वह डिफॉल्टर हो जाएगा। खान ने चीनी नेताओं को बताया कि अगले जून तक पाकिस्तान को 8.6 बिलियन डॉलर का कर्ज चुकाना है।

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चीन-पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) से संबंधित पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विशेष सहायक खालिद मंसूर ने इस बारे में विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इमरान खान की गुजारिश का चीनी नेताओं ने नोट लिया है। लेकिन अभी तक उन्होंने इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया है। उन्होंने बताया कि चीन चार बिलियन डॉलर के कर्ज के भुगतान की अवधि में फेरबदल पर विचार करने को तैयार हुआ है। इसके अलावा वह करेंसी स्वैप (मुद्रा की अदला-बदली) के रूप में 5.5 बिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता देने पर भी विचार कर रहा है। खालिद मंसूर इमरान खान के साथ फरवरी के पहले हफ्ते में चीन गए थे।
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इस्लामाबाद स्थित अर्थशास्त्री फारुख सलीन ने वेबसाइट एशिया टाइम्स से बातचीत में कहा- यह बहुत असामान्य स्थिति है। लेकिन पाकिस्तान इसका आदती हो चुका है। हम कर्ज के गहरे दुश्चक्र में फंस चुके हैं। कर्ज के बोझ से उबरने के लिए जरूरी यह है कि हमें लगातार डॉलर मिलते रहें, इसकी व्यवस्था हो। सलीन ने ध्यान दिलाया कि चीन पहले ही पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा विनिमय प्रशासन को चार बिलियन डॉलर का कर्ज दे चुका है। अब सरकार संभवतः अतिरिक्त तीन बिलियन डॉलर मांग कर रही है। इसकी वजह यह है कि चीन और दूसरे देशों से मिले डॉलर के बावजूद विदेशी मुद्रा भंडार खाली होता जा रहा है।
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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान पर चीन का कर्ज बढ़ते-बढ़ते 18.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। यानी देश पर जो कुल विदेशी कर्ज है, उसमें 20 फीसदी हिस्सा चीन का है। पाकिस्तान पर कुल 92.3 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज है। आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर चार फीसदी रहेगी। जबकि अगले वित्त वर्ष तक देश पर विदेशी कर्ज बढ़ कर 103 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा।


इमरान खान सरकार को सत्ता में तीन वर्ष से कुछ अधिक समय हुआ है। इस दौरान उसने 30 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज लिया है। इसके बावजूद देश का विदेशी मुद्रा भंडार घटता गया है। पिछले महीने इसमें  सिर्फ 15.7 बिलियन डॉलर बचे थे। विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि पाकिस्तान के पास जो विदेशी मुद्रा है, उसका ज्यादातर हिस्सा कर्ज से आया है। यह स्वस्थ स्थिति नहीं है। विश्लेषकों का कहना है कि इस संकट के बीच पाकिस्तान अधिक से अधिक चीन पर निर्भर होता जा रहा है। इसका असर अब उसकी विदेश नीति पर भी दिखने लगा है।

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