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K- Visa: चीन के नए के-वीजा की आज से हो रही शुरुआत, क्या ये अमेरिका के एच-1बी की जगह ले पाएगा?

Wed, 01 Oct 2025 07:05 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Wed, 01 Oct 2025 07:05 AM IST
सार

चीन का नया के-वीजा आज से लागू रहा है। के- वीजा क्या है? यह चीन के अन्य वीजा से कैसे अलग है? क्या चीनी के -वीजा अमेरिका के एच-1बी वीजा की जगह ले सकता है? आइये जानते हैं…

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China opens its borders to foreign professionals, will it replace America's H-1B visa?
के- वीजा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चीन की नई के-वीजा नीति आज से लागू हो रही है। चीन की इस वीजा नीति को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जवाब माना जा रहा है। ट्रंप ने बीते 19 सितंबर को फैसला लिया कि अब अमेरिका में कंपनियों को दूसरे देशों के उच्च कौशल क्षमता वाले लोगों को नौकरी देने के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी। यानी, इस तरह के लोगों को एच-1बी वीजा के लिए एक लाख डॉलर देना होगा। 

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ऐसे में यह जाना अहम हैं कि के-वीजा क्या है?, चीन के अन्य वीजा से कैसे अलग है के-वीजा, क्या के-वीजा की मदद से चीन अन्य देशों की प्रतिभाओं को अपनी तरफ आकर्षित करेगा? आइये जानते हैं

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क्या है के-वीजा

चीन की नई के-वीजा नीति के तहत विदेशियों के प्रवेश और निकास से जुडे नियमों में संशोधन किया है। के-वीजा के जरिए चीन विदेशी युवाओं खासतौर पर विज्ञान और तकनीक से जुड़ी प्रतिभाओं को काम करने में ढील देगा। हालांकि अभी इस वीजा की श्रेणी के बारे में बताया नहीं गया है,  लेकिन प्रतिभाशाली युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम में अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष है। इसके साथ ही उत्कृष्ट युवा वैज्ञानिक (विदेशी) निधि परियोजना में अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष निर्धारित की गई है।




 
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के- वीजा चीन के अन्य वीजा से कैसे अलग है 

चीन ब्रीफिंग की एक रिपोर्ट के अनुसार, “इस संशोधन से पहले, चीन ने 2013 में सामान्य वीजा की 12 श्रेणियों को मान्यता दी गई थी। 2013 में जिनमें काम के जेड वीजा, पढ़ाई के लिए एक्स वीजा, बिजनेस और परिवार से मिलने जाने के लिए एम वीजा और क्यू वीजा शामिल किया था। अधिकारियों के अनुसार मौजूदा 12 वीजा की तुलना में, के-वीजा धारकों के पास चीन में  आने-जाने की अवधि में अधिक छूट रहेगी। उन्होंने बताया कि के-वीजा धारक शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र के साथ ही चीन के  उद्यमिता (स्टार्टअप/व्यवसाय शुरू करना) और कारोबारी गतिविधियों में भी शामिल हो सकते हैं।

  • अब के- वीजा को अनुच्छेद 6 में शामिल किया गया है। इस वीजा के तहत विज्ञान और तकनीकी में प्रतिभा रखने वाले विदेशी युवा चीन में आ सकते हैं।  

  • वहीं अनुच्छेद 7 के अनुसार "के- वीजा के लिए आवेदकों को चीनी नियम के अनुसार दस्तावेज जमा करना होगा।"

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वीजा आवेदन के लिए क्या जरूरी 

  • वीजा आवेदक के पास विश्व के किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या अनुसंधान संस्थान से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित ( STEM)  क्षेत्र में कम से कम स्नातक की डिग्री हो।  

  •  इसके अलावा युवा पेशेवर ऐसे संस्थानों में  STEM से जुड़ी शिक्षा या अनुसंधान कार्य में काम किए हों।

क्या है के-वीजा लाने की पीछे की वजह 

चीन ब्रीफिंग की एक रिपोर्ट के मुताबिक,” के-वीजा योजना की शुरुआत चीन के 20वीं राष्ट्रीय कांग्रेस रिपोर्ट से हुई। चीन का मानना है कि के-वीजा के जरिए योग्य व्यक्तियों के लिए चीन में  प्रवेश करने के  बाधाओं को कम किया जाएगा। इसके साथ ही विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना है। वहीं,  चीन के नवाचार को बढ़ावा देना है। 
चाइना एजुकेशन इंटरनेशनल के संस्थापक और प्रबंध निदेशक चार्ल्स सन ने द पीआईई न्यूज को बताया , "हम इसे एक शक्तिशाली संकेत के रूप में देखते हैं कि चीन  सिर्फ व्यापार के लिए नहीं खुला है, बल्कि सक्रिय रूप से और प्रतिस्पर्धात्मक ढंग से दुनिया के बेहतरीन और प्रतिभाशाली लोगों को आकर्षित करना चाहता है।”

आगे इस रिपोर्ट में लिखा है “स्टडीपोर्टल्स के आंकड़ों के अनुसार,  चीन ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ( एआई) की डिग्री प्राप्त करने में लोगों की रुचि कम हो रही है। वहीं, चीन में इसी विषय में अध्ययन करने में रुचि बढ़ रही है। रिपोर्ट में बताया गया है, " जनवरी से जुलाई 2024 की तुलना जनवरी से जुलाई 2025 से की गई है। इस दौरान अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डिग्री (ऑन-कैंपस बैचलर और मास्टर और पीएचडी) की साल-दर-साल 25% की गिरावट आई है। वहीं, चीन में एआई डिग्री में रुचि 88% बढ़ी है।"


 

क्या  के-वीजा की मदद से अन्य देशों के प्रतिभाओं को अपनी तरफ आकर्षित करेगा चीन? 

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, "सिंगापुर के नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी में सार्वजनिक नीति और वैश्विक मामलों के प्रोफेसर लियू हांग ने बताया है कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आव्रजन पर कड़े रुख के कारण विदेशियों को चीन की तरफ आकर्षित होने की संभावना है। हालांकि, उन्होंने कहा कि चीन के के- वीजा को अमेरिकी एच-1बी वीजा के प्रतिस्पर्धी या विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, यह एक कार्य वीजा है, जिसके लिए नियोक्ता के प्रायोजन की आवश्यकता होती है। अमेरिकी एच-1बी वीजा के लिए “शैक्षणिक योग्यता, कार्य अनुभव और न्यूनतम वेतन” जैसी उच्च आवश्यकताएं थीं। वहीं इसके आवेदकों की संख्या भी लंबी थी।" लियू ने कहा कि के- वीजा इसके विपरीत है अधिकांश के-वीजा के आवेदक विदेश में बसे  दूसरी पीढ़ी के चीनी होंगे, जो तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।  

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, “वाशिंगटन स्थित द एशिया ग्रुप नामक एक कंसल्टेंसी फर्म के पार्टनर जॉर्ज चेन ने कहा, "सिलिकॉन वैली 'अमेरिका फर्स्ट' संस्कृति में तेजी से ढलती जा रही है।" उन्होंने कहा कि दूसरे देशों के तकनीकी कर्मचारी, जो इस बात से चिंतित हैं कि अब अमेरिका में  उनके लिए कोई जगह नहीं है। वहीं, इसी बीच जब वह के-वीजा के बारे में खबरें देखते हैं, तो वह सोच सकते हैं कि कम से कम मेरे पास एक और विकल्प तो होगा।"

शेन्जेन में स्थित टेक कम्पनियों के हेडहंटर एंगस चेन ने कहा कि नया के-वीजा उन स्टार्ट-अप्स के लिए सबसे अधिक मददगार हो सकता है, जिनके पास पारंपरिक रोजगार वीजा के लिए आवेदन करने के लिए संसाधन नहीं हैं। इसके साथ यह उन विदेशी छात्रों के लिए भी फायदामंद हो सकता है, जो चीन में काम की तलाश कर रहे है। उन्होंने कहा, "इसके बाद चीन में रहकर नौकरी की तलाश करना बहुत आसान हो जाएगा।"

क्या चीनी के-वीजा अमेरिका के एच- 1बी वीजा का जगह लेगा?

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रौद्योगिकी विश्लेषक और रिसर्च फेलो डैन वांग ने बताया, "चीन लंबे समय से विदेशी विशेषज्ञता की तलाश में रहा है, हालांकि उसकी यह तलाशी सिर्फ चुनिंदा तौर पर और अपनी शर्तों पर ही रही है। आमतौर पर चीन केवल आर्थिक रूप से उत्पादक विदेशियों को ही चाहता है। सरकार यह स्पष्ट करती है कि 60 वर्ष से अधिक आयु के विदेशी नागरिकों के लिए चीन में रहना  मुश्किल होगा।" इसके साथ ही  के-वीजा के एच -1बी की जगह लेने की संभावना नहीं है। संयुक्त राज्य अमेरिका में एच -1बी वीजा धारकों में से अधिकांश भारतीय हैं।"

 

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