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अमेरिका विरोधी गोलबंदी की मुहिम में चीन का नया मोर्चा, वांग यी ने की छह देशों की यात्रा

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 01 Apr 2021 02:08 PM IST

सार

वांग की इस यात्रा को उसी सिलसिले में देखा जा रहा है। जहां अमेरिका ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया के साथ अपनी लामबंदी मजबूत की है और यूरोपीय देशों को चीन के खिलाफ गोलबंद किया है, वहीं चीन ने रूस से अपना रिश्ता मजबूत किया है...
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चीन के विदेश मंत्री वांग यी
चीन के विदेश मंत्री वांग यी - फोटो : एएनआई
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विस्तार

चीन के विदेश मंत्री वांग यी की पश्चिम एशिया के छह देशों की यात्रा ने एक बात साफ कर दी है कि मानवाधिकार जैसी पश्चिमी देशों की चिंता उसके लिए कोई मुद्दा नहीं है। बल्कि मानवाधिकार हनन के सवाल पर किसी देश के अंदरूनी मामले में दूसरे किसी देश के दखल का चीन खुला विरोध करेगा। गौरतलब है कि अपनी पश्चिम एशिया यात्रा के दौरान वांग उन देशों में गए, जहां पश्चिमी समझ के मुताबिक निरंकुश शासन है।
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वांग ने सऊदी अरब, टर्की, ईरान, यूएई, बहरीन और ओमान की यात्रा की। इनमें टर्की औपचारिक रूप से लोकतांत्रिक देश है, लेकिन आम धारणा है कि राष्ट्रपति रजिब तैयिब अर्दोआन के सत्ता में आने के बाद वहां तानाशाही प्रवृत्तियां हावी हुई हैं। ईरान खुद को इस्लामी लोकतंत्र कहता है, लेकिन वहां सर्वोच्च सत्ता धर्मगुरु के हाथ में है। बाकी चारों देश राजशाही हैं।


विश्लेषकों के मुताबिक वांग की यात्रा का मकसद शिनजियांग मुद्दे पर समर्थन जुटाना था। अमेरिका और उसके साथी देशों के आरोप है कि चीन शिनजियांग में मुस्लिम अल्पसंख्यकों का दमन कर रहा है। वांग ने जिन देशों की यात्रा की, वे सभी मुस्लिम बहुल हैं। सभी छह राजधानियों में जारी संयुक्त बयानों का निष्कर्ष यही रहा कि वांग अपने मकसद में काफी हद तक सफल रहे। वांग ने अपनी यात्रा के दौरान एक क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद शुरू करने की पेशकश की। उन्होंने कहा की चीन उसकी मेजबानी के लिए तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने तमाम आपसी कारोबार अपनी मुद्राओं में करने का प्रस्ताव भी रखा। साफ तौर पर इसके पीछे मकसद इन सभी देशों की डॉलर पर निर्भरता घटाना है।

अमेरिका में बाइडन के राष्ट्रपति बनने से ईरान परमाणु डील के फिर से कारगर होने की उम्मीदों पर पानी फिरने के बीच वांग के सुरक्षा फोरम की मेजबानी के प्रस्ताव को अहम माना जा रहा है। वांग ने कहा कि इस फोरम से वैसे हालत बनाने में मदद मिलेगी, जिससे ईरान उन वादों पर फिर से अमल शुरू कर सके, जो उसने परमाणु डील में किए थे। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान और पश्चिम एशिया में बाइडन प्रशासन की नीति से हुई निराशा के बीच चीन ने इस मामले में अब अग्रणी भूमिका लेने की कोशिश की है। वांग ने तेहरान में इस बात का उल्लेख किया कि परमाणु डील का नया रास्ता तैयार करने के लिए चीन के अधिकारी पहले ही मॉस्को पहुंच चुके हैं। उन्होंने इस मामले में रूस, चीन और ईरान के बीच बातचीत शुरू करने का इरादा जताया।

सभी छह देशों में वांग ने ऊर्जा व्यापार और निवेश को बढ़ाने की पेशकश की। उन्होंने उन देशों को 5-जी टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संबंधी सेवाएं देने और कोरोना वायरस की रोकथाम की वैक्सीन मुहैया कराने के प्रस्ताव रखे। ये सारे प्रस्ताव इतने आकर्षक हैं कि आम तौर पर विकासशील देश उन्हें ठुकराने का साहस नहीं जुटा पाते। इसके अलावा मानवाधिकारों के सवाल पर इन सभी छह देशों का नजरिया काफी कुछ चीन से मेल खाता है। जानकारों का कहना है कि ऐसे में चीन ने उन देशों की नब्ज पकड़ने की कोशिश की है।

गौरतलब है कि वांग की ये यात्रा अलास्का में अमेरिका और चीन की सीधी वार्ता के नाकाम होने के ठीक बाद हुई है। अलास्का में दोनों देशों के बीच कड़वाहट खुल कर सामने आ गई। उसके बाद अमेरिका और यूरोपीय संघ ने शिनजियांग मामले पर चीन के खिलाफ आक्रामक रुख अपना लिया है। उन्होंने कई चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसके जवाब में चीन ने भी पाबंदियां लगाई हैं। इस कारण दोनों पक्षों में तनाव बहुत बढ़ गया है।

वांग की इस यात्रा को उसी सिलसिले में देखा जा रहा है। जहां अमेरिका ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया के साथ अपनी लामबंदी मजबूत की है और यूरोपीय देशों को चीन के खिलाफ गोलबंद किया है, वहीं चीन ने रूस से अपना रिश्ता मजबूत किया है। विश्लेषकों का कहना है कि उसके बाद अपने साथ और अधिक जोड़ने की कोशिश में वांग यी पश्चिम एशिया गए। उनके मकसद के लिहाज से उनकी यात्रा काफी हद तक कामयाब मानी जाएगी।
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