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वैश्विक निवेशकों को चिंता: चीन छेड़ेगा गैर बराबरी के खिलाफ मुहिम, नई आशंकाओं ने लिया जन्म

Thu, 19 Aug 2021 09:46 PM IST
गौरव पाण्डेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, हांगकांग
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, हांगकांग Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 19 Aug 2021 09:46 PM IST
सार

पश्चिमी बाजारों के लिए चीन ने एक और चिंता पैदा कर दी है। आर्थिक गैर-बराबरी घटाने के लिए चीन में लिए गए एक फैसले ने पश्चिमी देशों के कारोबारी हलकों में चीनी बाजार के प्रति नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। चीन में टेक और कुछ दूसरे क्षेत्रों की कंपनियों पर पिछले महीनों में की गई कार्रवाई से पहले ही चीनी और विदेशी निवेशकों को अरबों डॉलर का नुकसान हो चुका है। गौरतलब है कि चीनी कंपनियों और चीनी बाजार में पश्चिमी पूंजी का बड़ा निवेश है।

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China announce to begin mission against non equality causing tension for global investors
चीन का ध्वज - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

लंदन स्थित इकॉनमिक इंटेलीजेंस यूनिट के मुख्य अर्थशास्त्री यू सु ने उम्मीद जताई है कि चीनी अधिकारी व्यावहारिक नजरिया अपनाएंगे। उन्होंने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनबीसी से कहा, ‘इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि धनी लोगों और पूंजीगत लाभों पर टैक्स बढ़ाने से निवेश घट सकता है। साथ ही संभव है कि पूंजी का पलायन शुरू हो जाए। चीन सरकार समाज में धन के पुनर्वितरण की नीति लागू करते समय उसके प्रभाव को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर सकती।’

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उन्होंने आशंका जताई कि अब चीन में शिक्षा, स्वास्थ्य आदि जैसी सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण की गति धीमी पड़ सकती है।

अमेरिकी इन्वेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टेनले के विश्लेषकों ने चीन सरकार के फैसले की व्याख्या करते हुए कहा है कि चीन में अर्थव्यवस्था में ऐसा संतुलन बहाल करने की कोशिश की जा रही है, जिससे श्रमिकों को लाभ हो। इसके लिए समाज कल्याण के कार्यों पर अधिक खर्च, शिक्षा को समावेशी बनाने, और टैक्स बढ़ाने का रास्ता चुना गया है। मकसद यह है कि अर्थव्यवस्था में मध्य आय वर्ग का हिस्सा बढ़े।
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फिलहाल चीन दुनिया के उन देशों में है, जहां सबसे ज्यादा आर्थिक गैर-बराबरी है। फ्रेंच अर्थशास्त्री थॉमस पिकेटी ने 2015 में तैयार एक दस्तावेज में बताया था कि उस वर्ष चीन की राष्ट्रीय आय का 41 फीसदी हिस्सा सबसे धनी 10 फीसदी के पास चला गया। 1978 में इस तबके के पास राष्ट्रीय आय का 27 फीसदी हिस्सा ही गया था। दूसरी तरफ गरीब 50 फीसदी आबादी के पास 2015 में राष्ट्रीय आय का सिर्फ 15 फीसदी हिस्सा ही गया, जबकि 1978 में उसके पास भी 27 फीसदी हिस्सा गया था। इसी तरह देश में क्षेत्रीय गैर-बराबरी भी बढ़ी है।
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चीन सरकार ने पिछले साल एलान किया था कि उसने अपने यहां चरम गरीबी खत्म कर दी है। कुछ महीने चीन ने अपनी अगली पंचवर्षीय योजना का मसौदा जारी किया। उसमें कहा गया था कि चीन अब जीडीपी वृद्धि दर केंद्रित विकास की नीति छोड़ रहा है। अब उसकी प्राथमिकता समाज की दीर्घकालिक समस्याओं का समाधान करना है।


इस हफ्ते चीन के सर्वोच्च नेताओं की एक बैठक में जोर दिया गया कि चीन में सबके लिए सामान्य धन की व्यवस्था होनी चाहिए। इसे चीनी मीडिया ने ‘साझा समृद्धि’ लाने की नीति कहा है। ये बैठक बेइदाहे में हुई, जहां अक्सर चीनी नेता विचार मंथन करते हैं। बैठक में अत्यधिक आय का तार्किक समायोजन करने का आह्वान किया गया। निर्णय हुआ कि धनी लोगों और कारोबारियों से कहा जाएगा कि वे जितना कमाते हैं, उसका ज्यादा हिस्सा समाज को लौटाएं। इसका अर्थ यह निकाला गया है कि धनी लोगों और कंपनियों पर अब टैक्स बढ़ाया जाएगा।

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