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विमानों से होने वाला कार्बन उत्सर्जन 1990 के बाद हुआ 50 फीसदी कम

Sat, 14 Dec 2019 01:50 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 14 Dec 2019 01:50 AM IST
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Carbon emissions from aircraft decreased by 50 percent after 1990
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

विमानों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में 1990 के बाद से प्रति यात्री 50 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) के मुताबिक, इस सुधार का सबसे अहम कारण विमानन उद्योग ने 2009 के बाद से वार्षिक ईंधन दक्षता में 2.3 फीसदी सुधार किया है, जो तय लक्ष्य से 0.8 फीसदी ज्यादा है।

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आईएटीए के महानिदेशक व सीईओ एलेक्जेंडर डि जुनियक ने कहा, प्रति यात्री उत्सर्जन में आधे की कमी करना विमानन उद्योग में तकनीकी विशेषज्ञता व नवाचार की बड़ी उपलब्धि है। लेकिन हमारा लक्ष्य इससे कहीं ज्यादा बड़ा है।
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2020 से हम तय उत्सर्जन रखेंगे और 2050 तक हम इसे 2005 के स्तर का आधा कर देंगे। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें नई तकनीक, बेहतर ईंधन और परिचालन सुधार में लगातार निवेश करना होगा। आईएटीए के मुताबिक, एयरलाइन्स ने 2009 से नए विमानों में करीब 10 खरब डॉलर का निवेश किया है।
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इसके अलावा स्थायी विमानन ईंधन खरीद को लेकर छह अरब डॉलर के समझौते किए हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय विमानन (कोरसिया) के लिए कार्बन ऑफसेटिंग एंड रिडक्शन स्कीम की शुरुआत 2020 से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर कार्बन तटस्थ विकास को सुनिश्चित करेगी। साथ ही जलवायु परिवर्तन के उपायों को लेकर 40 अरब डॉलर जुटाएगी।

टैक्स लगाने से कम नहीं होगा कार्बन उत्सर्जन

आईएटीए के विश्लेषण की मानें तो दंडात्मक यात्री करों के जरिए जानबूझकर हवाई यात्रा में कटौती से कार्बन उत्सर्जन को कम करने के प्रयास नाकाफी हैं।वैश्विक दायरे में कोरसिया की स्कीम की प्रभावशीलता निहित है।

एक अनुमान के मुताबिक, इससे कार्बन उत्सर्जन में 2.5 अरब टन की कमी होगी। लेकिन स्कीम को लागू करने को लेकर सरकारों द्वारा कार्बन करों से समझौता किया जा रहा है।

हाल ही में जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड और स्विट्जरलैंड सहित कई देशों ने हवाई कर लेने का फैसला किया है। इससे लोगों को हवाई यात्रा करना काफी महंगा हो जाएगा, लेकिन कार्बन उत्सर्जन में मामूली अंतर आएगा।
 

स्वच्छ प्रौद्योगिकी होगी मददगार

आईएटीए के मुताबिक, कार्बन उत्सर्जन को कम करने में स्वच्छ प्रौद्योगिकी काफी मददगार साबित होगी। इसके लिए वित्तीय तौर पर मजबूत एयरलाइन क्षेत्र की जरूरत होगी, जो उड़ान को स्थायी बनाने के आवश्यक निवेश करने में सक्षम हो।

सरकारों को टिकाऊ विमानन ईंधन के व्यावसायीकरण को प्रोत्साहित करने, हवाई यातायात प्रबंधन में दक्षता बढ़ाने और कार्बन ऊर्जा स्रोतों में अनुसंधान का समर्थन करने की आवश्यकता है।

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