UK: खालिस्तान के खतरे के जिक्र वाली ब्रिटिश सरकार की रिपोर्ट पर सिख समुदाय ने जताई आपत्ति, कही बड़ी बात
ब्रिटिश सरकार ने कुछ खालिस्तान समर्थकों की करतूत के खिलाफ चेतावनी दी थी, साथ ही रिपोर्ट जारी कर बताया था कि यह सुनिश्चित करने को कहा ऐसे समूह ब्रिटेन की संसद तक न पहुंच सकें। लेकिन अब इस समीक्षा पर एक ब्रिटिश सिख समूह ने आपत्ति जताई है।
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भारत के बाहर ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में खालिस्तान समर्थकों की करतूत किसी से छुपी नहीं है। खालिस्तान समर्थक भारतीय उच्चायोगों पर हमलों से लेकर तिरंगे का अपमान कर रहे हैं। जिसको लेकर कुछ महीने पहले ब्रिटिश सरकार के एक प्रमुख स्वतंत्र समीक्षा आयोग ने कुछ खालिस्तान समर्थक कार्यकर्ताओं की विध्वंसक, आक्रामक और सांप्रदायिक कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी दी थी, साथ ही रिपोर्ट जारी कर बताया था कि यह सुनिश्चित करने को कहा ऐसे समूह ब्रिटेन की संसद तक न पहुंच सकें। लेकिन अब इस समीक्षा पर एक ब्रिटिश सिख समूह ने आपत्ति जताई है।
एक ब्रिटिश सिख समूह ने बुधवार को रिपोर्ट जारी कर बताया कि अप्रैल में जारी की गई ‘इंडिपेंडेंट फेथ एंगेजमेंट एडवाइजर’ कोलिन ब्लूम की ‘डज गवर्नमेंट ‘डू गॉड’?: एन इंडिपेंडेंट रिव्यू इन टू हाउ गवर्नमेंट एंगेजेज विद फेथ’ शीर्षक वाली समीक्षा रिपोर्ट जो सरकार के डिपार्टमेंट फॉर लेवलिंग अप, हाउसिंग एंड कम्युनिटीज को सौंपी गई वह स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं थी
प्रोफेसर सतविंदर सिंह जस की अध्यक्षता वाली काउंसिल ऑफ सिख्स इन लॉ कमेटी ने आरोप लगाया कि ब्लूम रिव्यू ने सिख समुदाय और ब्रिटिश सरकार के बीच अब तक के उत्कृष्ट संबंधों को नुकसान पहुंचाया है और अगर ब्रिटिश सरकार ने इसे खारिज नहीं किया तो संबंधों में खटास जारी रहेगी। वहीं नेटवर्क ऑफ सिख ऑर्गेनाइजेशन (एनएसओ) के निदेशक लॉर्ड इंद्रजीत सिंह ने बुधवार को कॉलिन ब्लूम के रवैये पर भी सवाल उठाए।
अप्रैल में जारी समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया कि ब्रिटिश सिखों का एक छोटा, बेहद मुखर और आक्रामक अल्पसंख्यक समूह है, जिसे खालिस्तान समर्थक चरमपंथी के रूप में वर्णित किया जा सकता है, जो एक जातीय-राष्ट्रवादी एजेंडे को बढ़ावा दे रहा है। सरकार को यह पहचान करनी चाहिए कि ब्रिटिश सिख समुदाय के भीतर चरमपंथी गतिविधि कहां मौजूद है और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी गतिविधियों को खत्म किया जाए।