जंग खत्म पर हालात विकट: अफगानिस्तान से ब्रिटेन ने 20 साल बाद समेटा बोरिया-बिस्तर, सैनिक लौटे

पीटीआई, लंदन Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sun, 29 Aug 2021 04:52 PM IST

सार

अफगानिस्तान से ब्रिटिश सैनिकों की अंतिम खेप भी रविवार को स्वदेश लौट गई है। इसके साथ  ही 20 साल से वहां चल रहा ब्रिटेन का सैन्य अभियान खत्म हो गया है। 
 
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Royal Airforce - फोटो : social media
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विस्तार

अफगानिस्तान से ब्रिटिश सैनिकों का अंतिम जत्था भी रविवार को लंदन लौट आया। इसके साथ  ही 20 साल से अफगानिस्तान में चल रहा ब्रिटिश सैन्य अभियान खत्म हो गया है। हालांकि दो दशक बाद भी अफगानिस्तान में हालात जस के तस या और बुरे हो गए हैं, क्योंकि तालिबान फिर सत्ता में लौट आया है। 
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रॉयल एयर फोर्स के एक विमान ने शनिवार रात काबुल से लंदन की उड़ान भरी और वह ब्रिटेन के आक्सफोर्ड शायर में ब्राइज नॉर्टन एयरबेस पर उतरा। इसमें अफगानिस्तान में ब्रिटेन के राजदूत सर लॉरी ब्रिस्टो भी लौट आए हैं। उन्हीं के नेतृत्व में ब्रिटिश सैनिकों व राजनयिकों तथा अन्य लोगों की काबुल से सुरक्षित वापसी हुई है। 


ब्रिटेन ने पिछले दो हफ्ते में काबुल से लगभग 15,000 ब्रिटेन और अफगानी नागरिकों को निकालने के बाद अपना बचाव अभियान खत्म कर दिया है। लॉरी ब्रिस्टो ने बताया कि ब्रिटेन ने लगभग एक हजार सैनिकों के साथ ही राजनयिक और नागरिक कर्मियों ने इस अभियान पर काम किया।

ब्रिस्टो ने ट्वीट किया, 'ऑपरेशन पिटिंग शुरू होने के बाद से लगभग 15,000 ब्रिटिश नागरिकों, अफगानी कर्मचारियों और अन्य जोखिम वाले लोगों को काबुल से निकाला गया है, अफगानिस्तान के लोगों के लिए हमारी प्रतिबद्धता कायम रहेगी।'  वाइस एडमिरल सर बेन की  ने कहा,  ब्रिटेन ने काबुल में 'ऑपरेशन पिटिंग' चलाकर अपने लोगों को निकाला। बेन की इस मौके पर कहा, 'यह दुख की बात है कि हमने वह सब नहीं किया जो हम वहां करना चाहते थे।'

ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने बयान जारी कर कहा, 'देश से ब्रिटिश सैनिकों की आखिरी खेप का निकलना एक ऐसा क्षण है जो हमें यह दिखाता है कि बीते 20 सालों में हमने क्या बलिदान किया और क्या हासिल किया।'  सैन्य समुदाय को लिखे एक पत्र में पीएम जॉनसन ने स्वीकार किया कि तालिबान के समक्ष काबुल के पतन को देखना उनके लिए कठिन होगा। हमने 457 सैन्य व सेवा कर्मियों को खोया है, यह उनके दोस्तों और प्रियजनों के लिए एक विशेष रूप से कठिन समय है, जिन्होंने अपने जीवन का बलिदान दिया है।  

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