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ब्रिटेन+एग्जिट: 'ब्रेग्जिट' से दुनिया भर में अर्थव्यवस्था को नुकसान तय, भारत पर होगा ये असर

Fri, 31 Jan 2020 08:50 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Fri, 31 Jan 2020 08:50 AM IST
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ब्रेग्जिट का विरोध और समर्थन - फोटो : Social Media

यूरोपीय संघ (ईयू) से ब्रिटेन की विदाई को यूरोपीय सांसदों की मंजूरी मिल चुकी है। जिसके बाद आज यानी 31 जनवरी को ब्रिटेन औपचारिक रूप से ईयू से बाहर हो जाएगा। भावुक पलों के बीच हुए इस मतदान में यूरोपीय संघ से जुड़े कुछ सांसदों की आंखें नम देखी गईं। मतदान के बाद चैंबर में स्कॉटलैंड का पारंपरिक लोकगीत बजाया गया जिसके बाद ब्रिटेन के 73 ईयू सांसदों ने फेयरवेल पार्टी में हिस्सा लिया।

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ईयू आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने विदाई के वक्त अपने भाषण में ब्रिटिश लेखक जॉर्ज इलियट की लाइनें दोहराते हुए कहा- अलग होने के दुख में ही हम अपने प्रेम की गहराई देख पाते हैं। हम हमेशा आपसे प्यार करेंगे और आपसे बहुत दूर नहीं होंगे... यूरोप जिंदाबाद।
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मतदान में ब्रेग्जिट के पक्ष में 621 और इसके खिलाफ 49 सांसदों ने वोट किया। इस वोटिंग में 13 सांसदों ने हिस्सा नहीं लिया। औपचारिक विदाई के बाद ट्रांजिशन अवधि के रूप में शुरू होगी एकदम अंतिम प्रक्रिया। अब ब्रिटेन और ईयू में नए रिश्ते के हिसाब से व्यापार और सुरक्षा को लेकर समझौते होंगे। ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को अब अपने पुराने 27 साथियों के साथ महत्वाकांक्षी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर डील करने की कोशिश करनी होगी।

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भारत पर पड़ेगा सीधा असर, फायदा भी होगा

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ब्रेक्जिट - फोटो : शटरस्टॉक

भारत के विकास के लिए यूरोप और ब्रिटेन दोनों ही अहम हैं क्योंकि दोनों देशों को निर्यात से भारत को काफी विदेशी मुद्रा मिलती है। निश्चित ही दोनों देशों के अलग होने से भारत पर इसका सीधा असर पड़ेगा। ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) होने से देश व्यापार बढ़ेगा, क्योंकि ब्रिटेन से पुर्तगाल व ग्रीस सामान लेते हैं।

चूंकि यूरोप के साथ एफटीए नहीं हो सका है जबकि ब्रिटेन के साथ इसकी संभावनाएं हैं इसलिए दोनों देशों में अलगाव भारत को लाभ दिलाएगा। बैंक ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक भारत निवेश के साथ तकनीकी, साइबर सुरक्षा, रक्षा और फायनेंस में बड़ा भागीदार बन सकता है।

ब्रिटेन के इस फैसले का असर न केवल ब्रिटेन पर बल्कि भारत सहित दुनिया के बाकी देशों पर भी पड़ेगा। अगर ब्रिटेन यूरोपियन संघ से अलग हो जाता है तो पौंड गिर जाएगा जिससे डॉलर की मांग बढ़ेगी। इससे पेट्रोल जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमत बढ़ जाएगी। 

भारत सबसे अधिक इसलिए प्रभावित होगा क्योंकि यूरोपियन संघ भारत के लिए सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। भारत के आईटी सेक्टर की 16-18 फीसदी कमाई ब्रिटेन से ही होती है। 

इसके अलावा एक दूसरा असर पड़ेगा लोगों की यात्राओं पर। यूरोपियन यूनियन में शामिल देश के नागरिक बिना वीजा के यूरोप के किसी भी देश में बेरोकटोक घूम सकते हैं। लेकिन इससे अलग होने के बाद ब्रिटेन के लोगों को यूरोप के देशों में यात्रा करने के लिए वीजा की आवश्यकता पड़ेगी। इसका सीधा असर ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान झेलना पड़ा सकता है।

क्या है ब्रेग्जिट? ब्रिटेन को वार्षिक 67 अरब यूरो का नुकसान

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BREXIT

28 देशों की सदस्यता वाले यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर हो जाने को ब्रेग्जिट कहा जा रहा है। इसे दुनिया में ब्रेग्जिट का नाम दिया गया है। जो ब्रिटेन और एग्जिट दो शब्दों से मिलकर बना है। इस मुद्दे पर ब्रिटेन में पहला जनमत संग्रह 23 जून, 2016 को हुआ था। इसमें अधिकतर लोगों ने संघ से अलग होने के पक्ष में मतदान किया था। 

ब्रेग्जिट से ब्रिटेन को वार्षित 67 अरब यूरो का नुकसान
जर्मनी के बैर्टेल्समन फाउंडेशन द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि ब्रेग्जिट के कारण ब्रिटेन को वार्षिक 67 अरब यूरो का नुकसान होगा। इसके उलट अमेरिका जैसे देशों को इसका फायदा मिलेगा। 

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना समझौते के ईयू से बाहर होने पर ब्रिटेन में वस्तु और सेवाओं पर टैक्स लगेगा जो इस समय एकल बाजार व्यवस्था होने के कारण नहीं लग रहा है।

इससे वस्तु और सेवाएं महंगी होगी और लोगों के खर्च भी बढ़ेंगे जबकि आय में कमी होने का अनुमान है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इससे ब्रिटेन के लोगों की आय को लगभग 57 अरब यूरो का नुकसान होगा। जिसका भार ब्रिटेनवासियों पर प्रति व्यक्ति 873 यानि लगभग 67 हजार रुपए पड़ेगा।

अब यूरोपीय संघ में बचे इतने देश
ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने के बाद ईयू में सदस्य देशों की संख्या 27 होगी। यूरोप महाद्वीप में कुल 50 देश हैं जिनमें से कई देश अभी भी यूरोपीय संघ के सदस्य नहीं हैं।

वर्तमान में ये देश हैं सदस्य

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भारत-ईयू संबंध - फोटो : Social Media
  1. ऑस्ट्रिया
  2. बेल्जियम
  3. क्रोएशिया
  4. बुल्गारिया
  5. साइप्रस
  6. चेक रिपब्लिक
  7. डेनमार्क
  8. इस्तोनिया
  9. फिनलैंड
  10. फ्रांस
  11. जर्मनी
  12. ग्रीस
  13. हंगरी
  14. ऑयरलैंड
  15. इटली
  16. लाटविया
  17. लिथुआनिया
  18. लक्जेमबर्ग
  19. माल्टा
  20. नीदरलैंड
  21. पोलैंड
  22. पुर्तगाल
  23. रोमानिया
  24. स्लोवाकिया
  25. स्लोवेनिया
  26. स्पेन
  27. स्वीडन
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