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नोबेल शांति पुरस्कार के लिए सट्टेबाजों का भरोसा 16 साल की ग्रेटा पर, विशेषज्ञ सहमत नहीं

Thu, 10 Oct 2019 02:53 AM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 10 Oct 2019 02:53 AM IST
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Bookmakers seem confident that climate activist Greta Thunberg will win the Nobel Peace Prize
ग्रेटा थनबर्ग - फोटो : पीटीआई

संयुक्त राष्ट्र महासभा में जलवायु परिवर्तन पर आंदोलित कर देने वाले विचारों को सामने रख कर दुनियाभर में प्रसिद्ध हुईं ग्रेटा थनबर्ग इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित की गई हैं। सट्टेबाज यह मान रहे हैं कि यह पुरस्कार ग्रेटा को ही दिया जाएगा। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ इससे राय नहीं रखते हैं।

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स्वीडन की 16 साल की क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा पहले ही एम्नेस्टी इंटरनेशनल का सर्वोच्च सम्मान और राइट लिवलिहुड अवार्ड (वैकल्पिक नोबेल पुरस्कार) से सम्मानित हो चुकी हैं। ऑनलाइन बेटिंग (सट्टेबाजी) वेबसाइट्स पर दुनिया के सर्वोच्च सम्मान के लिए ग्रेटा को मजबूत दावेदार बताया जा रहा है। 
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ऑस्लो में पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (प्रिओ) के निदेशक हेनरिक उर्डल ग्रेटा को नोबेल मिलने की संभावना को बेहद कम बताते हैं। उनका तर्क है कि जब कुछ लोग कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन की वजग से संघर्ष बढ़ सकता है लेकिन फिर भी इस बात पर सहमति नहीं है कि क्या असल में यह सशस्त्र संघर्ष का कारण है।
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इसके साथ ही हेनरिक ने कहा कि ग्रेटा की कम उम्र इस पुरस्कार को एक सम्मान के स्थान पर बोझ की तरह बना देगी। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि ग्रेटा को यह पुरस्कार एक ही स्थिति में मिल सकता है। उन्हें मलाला की तरह पुरस्कार को साझा करना पड़ेगा।' भारतीय कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई को साल 2014 में में संयुक्त रूप से यह पुरस्कार दिया गया था।

स्कूल छोड़कर कर रही लोगों को जागरूक

ऐसे समय पर जब लोग जलवायु परिवर्तन को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं तब ग्रेटा ने वैश्विक नेताओं से चुभने वाले सवाल पूछकर उन्हें झकझोर कर रख दिया। वह अपना स्कूल छोड़कर लोगों को उनकी जिम्मेदारियों का अहसास दिलाने का काम कर रही हैं। स्वीडन की रहने वाली ग्रेटा जलवायु परिवर्तन को लेकर दुनियाभर में काम करती हैं। वह अमेरिका से लेकर लंदन और फ्रांस में लोगों को जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर जागरूक करने के काम में लगी हुई हैं।

हर शुक्रवार करती हैं संसद के बाहर प्रदर्शन

थनबर्ग के स्कूल का स्ट्राइक फॉर क्लाइमेट या फ्यूचर फॉर फ्राइडे कैंपेन पूरी दुनिया में मशहूर है। पिछले साल अगस्त महीने से इस अभियान की शुरुआत हुई थी। इस अभियान की शुरुआत करते हुए उन्होंने हर शुक्रवार को स्कूल जाना छोड़ दिया। वह हर शुक्रवार स्वीडन की संसद के बाहर तख्ती लेकर प्रदर्शन करतीं हुईं दिख जाती हैं। सांसदों के अलावा वह वहां से गुजरने वाले लोगों से दुनिया को बचाने का आग्रह करती हैं।

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर हैं आइकन

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर दुनियाभर के लोगों के लिए ग्रेटा एक आइकन बन गई हैं। वह जलवायु परिवर्तन पर बड़े-बड़े भाषण देती हैं। नवंबर 2018 में उनके अभियान में 24 देशों के लगभग 17 हजार छात्रों ने हिस्सा लिया था। मार्च 2019 तक उनके अभियान से 135 देशों के 20 लाख बच्चे जुड़ चुके थे। वहीं इस साल अगस्त में यह संख्या बढ़कर 36 लाख हो गई। 

11 साल की उम्र में समझने लगीं थी जलवायु परिवर्तन का संकट

ग्रेटा थनबर्ग का जन्म तीन जनवरी 2003 को हुआ है। उनकी मां मलेना इर्नमैन ओपेरा सिंगर और पिता स्वांते थनबर्ग अभिनेता हैं। ग्रेटा ने आठ साल की उम्र में पहली बार जलवायु परिवर्तन के बारे में सुना था। 11 साल की उम्र की तक उन्होंने जलवायु परिवर्तन के संकट को समझना शुरू कर दिया था। वह अपनी बात को बेबाक और तथ्य आधारित तरीके से रखने के लिए जानी जाती हैं।
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