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US: मुक्त विश्व व्यवस्था के निर्माण में चीन अमेरिका का एकमात्र प्रतिस्पर्धी, ब्लिंकन ने रूस को बताया खतरा

Fri, 23 Dec 2022 03:31 PM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 23 Dec 2022 03:31 PM IST
सार

गुरुवार को वाशिंगटन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि रूस-यूक्रेन जंग खत्म करने का एकमात्र तरीका कूटनीति है। ब्लिंकन ने कहा कि रूस स्वतंत्र और खुली अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरा करता है जबकि, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना हमारा एकमात्र प्रतिद्वंद्वी है।

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Blinken called China only competitor of US, know all about
अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

बीत रहे साल 2022 के अपने अंतिम संवाददता सम्मेलन में अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने नई व स्वतंत्र विश्व व्यवस्था को लेकर बड़ी बात कही है। ब्लिंकन ने कहा कि रूस मुक्त अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरा है। वहीं, विश्व व्यवस्था को फिर से आकार देने के मामले में चीन अमेरिका का एकमात्र प्रतिस्पर्धी है। 

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गुरुवार को वाशिंगटन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि रूस-यूक्रेन जंग खत्म करने का एकमात्र तरीका कूटनीति है। ब्लिंकन ने कहा कि रूस स्वतंत्र और खुली अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरा करता है जबकि, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) हमारा एकमात्र प्रतिद्वंद्वी है।
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ब्लिंकन ने कहा कि चीन न केवल नई विश्व व्यवस्था को आकार देने में अमेरिका का प्रतिस्पर्धी है, बल्कि वह आर्थिक, कूटनीतिक, सैन्य व तकनीकी ताकत की दृष्टि से भी यह लक्ष्य पाने में प्रमुख बाधा है।उन्होंने कहा कि अमेरिका ने एशिया के कई देशों के साथ एकजुटता दिखाई है। इनमें से कई देशों चीन की आक्रामकता का सामना कर रहे हैं। चीन भारत-प्रशांत क्षेत्र में भी अपनी ताकत बढ़ा रहा है।  
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पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि चीन लगभग समूचे विवादित दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है। हालांकि, ताइवान, फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम भी इसके कुछ हिस्सों पर दावा करते हैं। चीन ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप और सैन्य प्रतिष्ठान बना लिए हैं। उसका पूर्वी चीन सागर में जापान के साथ क्षेत्रीय विवाद भी है। दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर खनिज, तेल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से समृद्ध माना जाता है। चीन इन सभी पर कब्जा करना चाहता है। यह क्षेत्र विश्व व्यापार की दृष्टि से भी अहम है।

अमेरिका ने तैनात किए युद्धपोत व लड़ाकू विमान, चीन को दी चुनौती
ब्लिंकन ने यह भी कहा कि अमेरिका इस विवादित समुद्री क्षेत्र पर कोई दावा नहीं करता है, लेकिन उसने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में नेविगेशन की स्वतंत्रता और ओवरफ्लाइट गश्त पर जोर देने के लिए अपने युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों को तैनात करके दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते क्षेत्रीय दावों को चुनौती दी है।

ताइवान में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्धता
ताइवान को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए उनका देश प्रतिबद्धता है। इसके साथ ही अमेरिका झिंजियांग और तिब्बत में चीन द्वारा मानवाधिकारों के हनन, अभिव्यक्ति की आजादी और हांगकांग में प्रेस पर पाबंदी से चिंतित है। हम इस दिशाा में मिलकर साझा कार्रवाई जारी रखेंगे। चीन ताइवान को अपना स्वशासी द्वीप मानता है और उसे बागी मानते हुए बलपूर्वक उसे फिर से अपने देश से जोड़ना चाहता है। 


यूक्रेन को अमेरिकी समर्थन जारी रहेगा
ब्लिंकन ने कहा कि जब तक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपना रास्ता नहीं बदलते यूक्रेन में न्यायसंगत और टिकाऊ शांति की संभावना कम है। जंग खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका सार्थक कूटनीति है। यूक्रेन को हमारा मजबूत समर्थन जारी रहेगा। 

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