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ईशनिंदा: पाकिस्तान की आसिया बीबी कनाडा के लिए रवाना, अन्य कैदियों को रिहाई की आशा

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 19 May 2019 08:51 AM IST
आसिया बीबी (फाइल फोटो)
आसिया बीबी (फाइल फोटो)
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पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा पाने वाली ईसाई महिला आसिया बीबी अब अपने देश को छोड़ कर कनाडा पहुंच गई हैं। आसिया बीबी ने पाकिस्तान की जेल में आठ साल बिताए थे। उन्हें साल 2010 में ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। बीते साल 31 अक्तूबर को पाकिस्तान की उच्चतम न्यायालय ने उन्हें बरी कर दिया था। इस महीने उन्हें पाकिस्तान छोड़ने की इजाजत मिली।
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आसिया के अलावा पाकिस्तान की जेल में ईशनिंदा के आरोप में तीन अन्य लोग कैद हैं। इनमें एक कैदी अनपढ़ ईसाई है जो सड़क साफ करने का काम करता था। उसका शराब पीते समय अपने मुस्लिम दोस्त से झगड़ा हो गया। दूसरा अमेरिका से पढ़ा हुआ विश्वविद्यालय प्रोफेसर है जिसके उदार फेसबुक पोस्ट ने मुस्लिम छात्र कार्यकर्ताओं को नाराज कर दिया। तीसरी एक अधेड़ महिला है जिसे आसिया बीबी के सेल में रखा गया है।

यह तीनों पाकिस्तानी उन 40 लोगों में शामिल हैं जो ईशनिंदा के आरोप में जेल में बंद हैं या दोषी पाए गए हैं। आधे लोगों को आजीवन कारावास जबकि आधों को मौत की सजा दी गई है। पाकिस्तान ने ईशनिंदा के लिए कभी किसी को नहीं मारा है लेकिन कई दोषी अपील के इंतजार में एकांत कारावास में रहने को मजबूर हैं।

आसिया को अदालत द्वारा बरी और विदेश में स्वागत किए जाने ने दूसरे लोगों को उम्मीद की एक किरण दी है। हालांकि लंबे समय से जेल में बंद कैदियों के वकीलों और परिवार का कहना है कि यह उम्मीद कम है। ईशनिंदा करने वाले आरोपियों को जनता धिक्कारती है। बहुत कम वकील ऐसे आरोपियों का केस लड़ते हैं। निचली अदालतों पर आरोपी को दोषी करार देने का दबाव होता है। 

अपील अदालतें आमतौर पर मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल देती हैं, लेकिन यह भी सालों के तनाव, अलगाव और गिरते स्वास्थ्य के बाद किया जाता है। एक दोषी शख्स वाजीहुल हसन को 2002 से मौत की सजा मिली हुई है। आसिया की रिहाई होने के बाद लाहौर के दो भाईयों को ईसाई बेवसाइट में पैगंबर मोहम्मद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है।

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