{"_id":"60e9763528340f43de15effa","slug":"biden-said-capitalism-without-healthy-competition-does-not-remain-capitalism-it-becomes-exploitation","type":"story","status":"publish","title_hn":"अर्थव्यवस्था में एकाधिकार के खिलाफ बाइडन की जोरदार पहल, लेकिन उद्योगपति नाराज","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
अर्थव्यवस्था में एकाधिकार के खिलाफ बाइडन की जोरदार पहल, लेकिन उद्योगपति नाराज
Sat, 10 Jul 2021 03:58 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 10 Jul 2021 03:58 PM IST
सार
राष्ट्रपति बाइडन ने अब फेडरल ट्रेड कमीशन (एफटीसी) से कहा है कि वह कंपनियों के बीच ऐसी तमाम सौदेबाजियों को रोक दे या उनका दायरा सीमित करे, जिससे बाजार की प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती हो...
विज्ञापन
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण कार्यकारी आदेश पर दस्तखत किए। इसका मकसद अर्थव्यवस्था में एकाधिकार (मोनोपॉली) को खत्म करना और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति बनने के बाद ये बाइडन का ऐसा पहला कदम है, जिससे अमेरिका के मोनोपॉली पूंजीपतियों से उनका सीधा टकराव हो सकता है। गुजरे वर्षों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था के वित्तीय और हाई टेक सेक्टरों में मोनोपॉली कायम करने की प्रवृत्ति बढ़ती गई है। कई आर्थिक और अविष्कार संबंधी क्षेत्रों में अमेरिका की धार कमजोर होने की इसे बड़ी वजह समझा जाता है।
विज्ञापन
अब बाइडन ने ऐसी व्यवस्था करने की कोशिश की है, जिससे जब कोई बड़ी कंपनी किसी छोटी कंपनी को खरीदेगी, उस प्रक्रिया की अधिक सख्ती से निगरानी की जाएगी। बाइडन प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि राष्ट्रपति की इस पहल से उत्पादों की कीमत गिरेगी, क्योंकि जब अधिक कंपनियां बाजार में होंगी, तो ग्राहकों को लुभाने की होड़ में वे कीमतें घटाएंगी।
विज्ञापन
नए उपायों का एलान करते हुए बाइडन ने ये अहम टिप्पणी की- ‘पूंजीवाद बिना स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के पूंजीवाद नहीं रह जाता, वह शोषण बन जाता है।’ उन्होंने कहा- ‘अगर बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा ना रहे, तो बड़ी कंपनियां जो भी चाहें वह कीमत वसूल सकती हैं और लोगों से जैसा चाहें, वैसा व्यवहार कर सकती हैं। इसका मतलब यह भी है कि बहुत से अमेरिकियों को अपनी जरूरी चीजों को खरीदते समय नुकसान उठाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।’
विज्ञापन
राष्ट्रपति ने जिस आदेश पर दस्तखत किए, उनमें कुल 72 उपाय शामिल हैं। इन उपायों को लागू करने की जिम्मेदारी अमेरिका की दर्जनों एजेंसियों को होगी। उन एजेंसियों की निगरानी के लिए अब एक व्हाइट हाउस काउंसिल बनाने का फैसला किया गया है। राष्ट्रपति बाइडन ऐसा कुछ अहम कदम उठाएंगे, इसका संकेत पिछले महीने ही मिल गया था, जब उन्होंने मोनोपॉली विरोधी कार्यकर्ता लीना खान को अमेरिका के फेडरल ट्रेड कमीशन का प्रमुख नियुक्त किया। खान ने बीते एक जुलाई को अपना पद संभाल लिया।
राष्ट्रपति बाइडन ने अब फेडरल ट्रेड कमीशन (एफटीसी) से कहा है कि वह कंपनियों के बीच ऐसी तमाम सौदेबाजियों को रोक दे या उनका दायरा सीमित करे, जिससे बाजार की प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती हो। ऐसे उपायों की भी मनाही कर देने को कहा गया है, जिसके तहत कंपनियां अपने कर्मचारियों के नौकरी बदल कर किसी कंपनी की प्रतिस्पर्धी कंपनी में जाने पर रोक लगाती हैं। बाइडन ने ये अहम टिप्पणी की- ‘अगर किसी को लगता है कि उसे बेहतर नौकरी मिल रही है, तो उसे इस बात में सक्षम होना चाहिए कि वह उस नौकरी को ज्वाइन कर सके।’
नए उपायों के तहत एफटीसी और अमेरिका के न्याय विभाग से उन तौर-तरीकों पर भी रोक लगाने को कहा गया है, जिसके तहत कंपनियों के मालिक आपसी समझौता कर अपने क्षेत्र कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं को नहीं बढ़ने देते। बाइडन प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि नए उपायों के अमल में आने पर कर्मचारियों का वेतन बढ़ेगा और उनके लिए नौकरियां बदलना आसान हो जाएगा।
लेकिन नए उपायों से अमेरिका के पूंजीपतियों में गहरी नाराजगी देखी गई है। द यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने एक बयान में कहा कि ये आदेश गलत समझदारी पर आधारित है। ये गलत समझदारी यह है कि हमारी अर्थव्यवस्था अत्यंत संकेंद्रित हो कर गतिरुद्ध हो गई है। यह इस समझ पर भी आधारित है कि अर्थव्यवस्था में गतिरोध के कारण पर्याप्त मात्रा में निजी निवेश नहीं हो रहा है और आविष्कार में बाधा पड़ रही है। जबकि असलियत में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की जरूरत यह है कि यहां छोटे और बड़े दोनों तरह कारोबार फूले-फलें। लेकिन बाइडन प्रशासन अपने केंद्रीकृत आदेश से अर्थव्यवस्था को संचालित करने की कोशिश कर रहा है।