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क्या बेलारूस के राष्ट्रपति का कुछ बिगाड़ पाएंगे पश्चिमी देश?
Mon, 24 May 2021 06:07 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मिन्स्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मिन्स्क
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 24 May 2021 06:07 PM IST
सार
एथेंस (ग्रीस) से उड़ा आयरलैंड की एयरलाइन- रेनायर एयरलाइन्स का विमान विलिनयस (लिथुआनिया) जा रहा था। बेलारूस के अधिकारियों ने उसे बीच में ही मिन्स्क हवाई अड्डे पर उतरने के लिए मजबूर किया। विमान के उतरते हुए 26 वर्षीय रोमान प्रोतासेविच को गिरफ्तार कर लिया गया...
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बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्सांद्र लुकाशेंको
- फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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विस्तार
जिस तरह बेलारूस में राष्ट्रपति अलेक्सांद्र लुकाशेंको के विरोधी ब्लॉगर को विमान से उतार कर गिरफ्तार किया गया, उस पर पश्चिमी दुनिया में भारी नाराजगी फैली है। अमेरिका से लेकर यूरोपियन यूनियन तक ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। इस घटना को ‘आतंकवाद की कार्रवाई’ बताया गया है। लेकिन अमेरिका या यूरोपीय देश इस मामले में कुछ और प्रतिबंध लगाने के अलावा लुकाशेंको सरकार के खिलाफ कोई ठोस कदम उठा पाएंगे, इसकी संभावना कम है।
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एथेंस (ग्रीस) से उड़ा आयरलैंड की एयरलाइन- रेनायर एयरलाइन्स का विमान विलिनयस (लिथुआनिया) जा रहा था। बेलारूस के अधिकारियों ने उसे बीच में ही मिन्स्क हवाई अड्डे पर उतरने के लिए मजबूर किया। विमान के उतरते हुए 26 वर्षीय रोमान प्रोतासेविच को गिरफ्तार कर लिया गया। प्रोतासेविच लिथुआनिया में रहते आए हैं। वे नेक्स्ता नाम की वेबसाइट का संपादक रह चुके हैं। पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव के बाद जब बेलारूस में बड़े पैमाने पर जन प्रदर्शन हो रहे थे, तब प्रोतासेविच ने लगातार लुकाशेंको के खिलाफ लेखन किया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि लुकाशेंको ने धांधली के जरिए राष्ट्रपति चुनाव जीता।
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बेलारूस पुलिस ने प्रोतासेविच का नाम आतंकवादियों की सूची में डाल रखा था। उन पर तीन आरोपों में पहले से मुकदमा चल रहा है। जानकारों के मुताबिक उनमें से एक मुकदमे में प्रोतासेविच को 15 साल कैद की सजा हो सकती है। अब ये सामने आया है कि प्रोतासेविच का पीछा बेलारूस की खुफिया एजेंसी केजीबी काफी समय से कर रही थी। रविवार को एथेंस से रवाना होने के समय प्रोतेसेविच को इस बात का आभास भी हो गया था कि कोई व्यक्ति उनका पीछा कर रहा है। प्रोतासेविच ने तब अपने एक सहकर्मी को बताया था कि उस व्यक्ति ने उनके दस्तावेजों की फोटो खींचने की कोशिश की और उनसे ‘मूर्खता भरे’ सवाल पूछे।
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विश्लेषकों के मुताबिक इस घटना से देशों के अधिकार क्षेत्र को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई देश सिर्फ इसलिए अपने वायु क्षेत्र से गुजर रहे किसी विमान को अपने यहां उतरने पर मजबूर कर सकता है कि उसमें उसके यहां का कोई ‘वॉन्टेड अपराधी’ बैठा हुआ है। मामला इसलिए भी ज्यादा पेचीदा लगता है, क्योंकि प्रोतासेविच लंबे समय से लिथुआनिया में रह रहे हैं। बताया जाता है कि उन्हें पकड़ने की सारी कार्रवाई का निर्देशन व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपित लुकाशेंको ने किया। उन्होंने अपने देश के अधिकारियों के निर्देश दिया कि विमान को उतरने पर मजबूर किया जाए।
बेलारूस पूर्व सोवियत यूनियन में शामिल रहे उन गिने-चुने गणराज्यों में है, जहां सोवियत ढांचा आज भी बरकरार है। बेलारूस की अर्थव्यवस्था में पब्लिक सेक्टर का आज भी सबसे बड़ा रोल है। लुकाशेंको सोवियत जमाने के नेता हैं। उनके जारी प्रभाव के कारण बेलारूस में अभी तक अमेरिका और यूरोपीय देशों की पैठ नहीं बन सकी है। लुकाशेंको ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से निकट रिश्ते बनाए रखे हैं। पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव के बाद जब जनप्रदर्शन भड़के, तब पुतिन का समर्थन लुकाशेंको सरकार के साथ बना रहा। इसलिए विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना से पश्चिमी देशों में भड़के तमाम गुस्से के बावजूद बेलारूस के खिलाफ ये देश कोई ठोस कार्रवाई कर पाएंगे, इसकी संभावना कम है।
जानकारों के मुताबिक बेलारूस पर कुछ और प्रतिबंध लगाए जाएं, इसकी संभावना है। साथ ही ये मुमकिन है कि बेलारूस को अंतरराष्ट्रीय विमानन के क्षेत्र में बहिष्कृत करने का फैसला हो। उस हाल में मुमकिन है कि पश्चिमी और ज्यादातर दूसरे देशों के विमानों का बेलारूस आना-जाना या बेलारूस के ऊपर से उड़ना बंद हो जाए। इसका नुकसान बेलारूस को होगा। लेकिन उससे लुकाशेंको की सत्ता तुरंत हिलेगी, ऐसे संकेत नहीं हैं।