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बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप बढ़ा: 15 मार्च से 797 मासूमों की गई जान, टीकाकरण से कैसे वंचित हुए 40 लाख बच्चे?
Wed, 22 Jul 2026 03:32 PM IST
निर्मल कांत
आईएएनएस, ढाका।
आईएएनएस, ढाका।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 22 Jul 2026 03:32 PM IST
सार
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, जिससे हर दिन बच्चों की मौत हो रही और बड़ी संख्या में अस्पताल में मासूमों को भर्ती कराया जा रहा है। जानिए क्यों 40 लाख बच्चे टीकाकरण से दूर रह गए और वैक्सीनेशन गैप ने कैसे बढ़ाया खसरे का खतरा।
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मासूमों की जान ले रहा खसरा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/आईएएनएस
विस्तार
बांग्लादेश में खसरे ने कई मासूमों की जान ले ली है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, देश में हर दिन औसतन करीब चार बच्चों की मौत हो रही है और 800 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है। इस बीच, सरकार और आम लोगों का ध्यान इस स्वास्थ्य संकट से कुछ हद तक कम होता दिखाई दे रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में खसरे के लगातार बढ़ते प्रकोप का अहम कारण टीकाकरण कराने में देरी (वैक्सीनेशन गैप) को बताया जा रहा है।
टीकाकरण के बाद भी क्यों बढ़ रहे मामले?
सरकार के इस दावे के बावजूद कि उसने आपातकालीन खसरा टीकाकरण अभियान का लक्ष्य पार कर लिया है, अस्पतालों में अब भी बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें टीका नहीं लगाया गया है। इससे टीकाकरण कवरेज में मौजूद खामियों का पता चलता है।
जुलाई के पहले तीन हफ्तों में खसरे का प्रकोप गंभीर बना रहा। बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान हर दिन औसतन 1,005 संदिग्ध और लैब टेस्ट से कन्फर्म किए गए खसरे के मामले सामने आए, 821 अस्पताल में भर्ती किए गए और रोजाना करीब 4 बच्चों की मौत दर्ज की गई।
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बांग्लादेश के प्रमुख अखबार 'डेली स्टार' ने खसरा और रूबेला उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय सत्यापन समिति के अध्यक्ष महमूदुर रहमान के हवाले से कहा, स्थिति में सुधार हुआ है। लेकिन टीकाकरण अभियान के दो महीने बाद भी यह अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। ऐसा लगता है कि अधिकारी इस स्थिति को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं।
ये भी पढ़ें: डोवर एयरबेस पर लाए जाएंगे अमेरिकी सैनिकों के शव, ट्रंप देंगे अंतिम विदाई; व्हाइट हाउस ने क्या कहा?
खसरे के बढ़ते प्रकोप की वजह क्या है?
अस्पतालों में कितने बिना टीके वाले बच्चे पहुंच रहे हैं?
डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, खसरे से पीड़ित सात बच्चों के परिजनों से मिली जानकारी में सामने आया कि इनमें से छह बच्चों को खसरे का टीका नहीं लगाया गया था। इनमें तीन बच्चे डीएनसीसी डेडिकेटेड कोविड-19 अस्पताल और चार बच्चे संक्रामक रोग अस्पताल (आईडीएच) में भर्ती थे।
डीएनसीसी अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी आसिफ हैदर ने बताया कि वर्तमान में भर्ती खसरे के 80 से 90 प्रतिशत मरीजों का टीकाकरण नहीं हुआ है। यह अस्पताल मार्च के मध्य से खसरे के मरीजों के लिए विशेष उपचार उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने बताया कि रविवार तक 24 घंटे में अस्पताल में भर्ती किए गए 74 खसरा मरीजों में से केवल पांच को ही टीका लगाया गया था।
बड़ी संख्या में बच्चे अब भी टीकाकरण से वंचित
वहीं, महमूदुर रहमान ने कहा कि खसरा-रूबेला और विटामिन-ए अभियानों के बीच 40 लाख बच्चों का अंतर यह दर्शाता है कि बड़ी संख्या में संवेदनशील बच्चे अब भी टीकाकरण से वंचित हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डीजीएचएस के पूर्व रोग नियंत्रण निदेशक बे-नजीर अहमद ने 40 लाख बच्चों के अंतर को चौंकाने वाला बताते हुए कहा कि यह बेहद कम टीकाकरण लक्ष्य की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा, अगर लक्ष्य ही सही नहीं था, तो ऐसा परिणाम आना स्वाभाविक था। अहमद ने कहा कि अपर्याप्त योजना और सीमित जन-जागरूकता अभियान ने खसरा टीकाकरण कार्यक्रम को प्रभावित किया। कई परिवार संशोधित टीकाकरण कार्यक्रम से अनजान रह गए।
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टीकाकरण के बाद भी क्यों बढ़ रहे मामले?
सरकार के इस दावे के बावजूद कि उसने आपातकालीन खसरा टीकाकरण अभियान का लक्ष्य पार कर लिया है, अस्पतालों में अब भी बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें टीका नहीं लगाया गया है। इससे टीकाकरण कवरेज में मौजूद खामियों का पता चलता है।
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जुलाई के पहले तीन हफ्तों में खसरे का प्रकोप गंभीर बना रहा। बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान हर दिन औसतन 1,005 संदिग्ध और लैब टेस्ट से कन्फर्म किए गए खसरे के मामले सामने आए, 821 अस्पताल में भर्ती किए गए और रोजाना करीब 4 बच्चों की मौत दर्ज की गई।
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बांग्लादेश के प्रमुख अखबार 'डेली स्टार' ने खसरा और रूबेला उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय सत्यापन समिति के अध्यक्ष महमूदुर रहमान के हवाले से कहा, स्थिति में सुधार हुआ है। लेकिन टीकाकरण अभियान के दो महीने बाद भी यह अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। ऐसा लगता है कि अधिकारी इस स्थिति को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं।
ये भी पढ़ें: डोवर एयरबेस पर लाए जाएंगे अमेरिकी सैनिकों के शव, ट्रंप देंगे अंतिम विदाई; व्हाइट हाउस ने क्या कहा?
खसरे के बढ़ते प्रकोप की वजह क्या है?
- स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार खसरे का प्रकोप लगातार जारी रहने के पीछे करीब 40 लाख बच्चों का टीकाकरण से वंचित रह जाना, अभियान के निर्धारित आयु वर्ग से बाहर के बच्चों में संक्रमण फैलना और संक्रमण रोकथाम एवं नियंत्रण उपायों की कमजोरी प्रमुख कारण हैं।
- बांग्लादेश में मंगलवार को खसरे के प्रकोप से कम से कम चार बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही, 15 मार्च से अब तक इस बीमारी से जुड़ी कन्फर्म और खसरे जैसे लक्षणों की वजह से (संदिग्ध श्रेणी में रखी गई) 797 मासूमों की मौत हो चुकी है।
- स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, ये आकंड़ा मंगलवार (पिछले 24 घंटों) सुबह 8 बजे तक का है। हाल ही में हुई मासूमों की मौत को बीमारी से जुड़ी संदिग्ध मौत के रूप में चिन्हित किया गया है।
अस्पतालों में कितने बिना टीके वाले बच्चे पहुंच रहे हैं?
डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, खसरे से पीड़ित सात बच्चों के परिजनों से मिली जानकारी में सामने आया कि इनमें से छह बच्चों को खसरे का टीका नहीं लगाया गया था। इनमें तीन बच्चे डीएनसीसी डेडिकेटेड कोविड-19 अस्पताल और चार बच्चे संक्रामक रोग अस्पताल (आईडीएच) में भर्ती थे।
डीएनसीसी अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी आसिफ हैदर ने बताया कि वर्तमान में भर्ती खसरे के 80 से 90 प्रतिशत मरीजों का टीकाकरण नहीं हुआ है। यह अस्पताल मार्च के मध्य से खसरे के मरीजों के लिए विशेष उपचार उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने बताया कि रविवार तक 24 घंटे में अस्पताल में भर्ती किए गए 74 खसरा मरीजों में से केवल पांच को ही टीका लगाया गया था।
बड़ी संख्या में बच्चे अब भी टीकाकरण से वंचित
वहीं, महमूदुर रहमान ने कहा कि खसरा-रूबेला और विटामिन-ए अभियानों के बीच 40 लाख बच्चों का अंतर यह दर्शाता है कि बड़ी संख्या में संवेदनशील बच्चे अब भी टीकाकरण से वंचित हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डीजीएचएस के पूर्व रोग नियंत्रण निदेशक बे-नजीर अहमद ने 40 लाख बच्चों के अंतर को चौंकाने वाला बताते हुए कहा कि यह बेहद कम टीकाकरण लक्ष्य की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा, अगर लक्ष्य ही सही नहीं था, तो ऐसा परिणाम आना स्वाभाविक था। अहमद ने कहा कि अपर्याप्त योजना और सीमित जन-जागरूकता अभियान ने खसरा टीकाकरण कार्यक्रम को प्रभावित किया। कई परिवार संशोधित टीकाकरण कार्यक्रम से अनजान रह गए।