फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Bangladesh in deep dilemma, where to go amid US-China confrontation

Bangladesh: गहरी दुविधा में बांग्लादेश, अमेरिका-चीन में टकराव के बीच जाएं तो किधर?

Wed, 14 Jun 2023 03:05 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 14 Jun 2023 03:05 PM IST
सार

अमेरिका के साथ बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव के कई बिंदु हैं। मानवाधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की स्थिति को लेकर अमेरिका ने बांग्लादेश सरकार की आलोचना की है। इससे दोनों पक्षों में तनाव बढ़ा है। दूसरी तरफ चीन और रूस के साथ बांग्लादेश के आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। इससे भी पश्चिमी देश खुश नहीं हैं...

विज्ञापन
Bangladesh in deep dilemma, where to go amid US-China confrontation
शेख हसीना - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अमेरिका और चीन के बीच किसकी तरफ अधिक झुकाव बनाएं, इस सवाल को लेकर बांग्लादेश गहरे पसोपेश में है। यह बात इंडो-पैसिफिक के बारे में बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय की तरफ जारी पहले दस्तावेज पर चल रही बहस से जाहिर हुई है। मंत्रालय ने यह दस्तावेज अप्रैल में जारी किया था। तब से वह चर्चा में है और इसको लेकर जानकारों ने अलग-अलग नजरियों के साथ अपनी राय पेश की है।

विज्ञापन

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह इस बारे में हर कोण से बहस चाहता है कि बांग्लादेश की क्षेत्रीय नीति कैसी हो। मंत्रालय ने अपने दस्तावेज उन सिद्धांतों और उद्देश्यों का जिक्र किया है, जिसे उसने क्षेत्रीय और विदेश नीति का आधार बताया है। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा दस्तावेज जारी करना बांग्लादेश सरकार की एक बड़ी पहल है। इसके जरिए उसने यह बताने की कोशिश की है वह इस क्षेत्र की बड़ी ताकतों के साथ किस तरह के रिश्ते रखना चाहती है। लेकिन इस बारे में वह पर्याप्त स्पष्टता नहीं बना पाई है।

विज्ञापन

बांग्लादेश की बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान मैरिटाइम यूनिवर्सिटी में समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक अध्ययन विषय के व्याख्याता रुबियत सईमम ने लिखा है- ‘दस्तावेज इंडो-पैसिफिक में अमेरिका और चीन के बीच बढ़ रही होड़ के बीच अपना पक्ष चुनने को लेकर बांग्लादेश में मौजूद दुविधा को दिखाता है। इस जटिल और बदल रही भू-राजनीतिक परिस्थिति के बीच बांग्लादेश किस दिशा में चलेगा, इस बारे में दस्तावेज में कोई स्पष्टता नहीं है। यह बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 25 के अनुरूप जरूर है, जिसमें कहा गया है कि बांग्लादेश की विदेश नीति अ-हस्तक्षेप, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और सहयोग के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए।’

विज्ञापन
विज्ञापन

कुछ अन्य विशेषज्ञों ने भी कहा है कि इंडो-पैसिफिक में किस गुट के साथ बांग्लादेश को अधिक रक्षा या सैन्य सहयोग करना चाहिए, इस बारे में दस्तावेज में कोई साफ बात नहीं कही गई है। इसमें सिर्फ मोटी बातें कही गई हैं, जिनसे कोई ठोस संकेत पाना मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद इसमें अपनाई गई भाषा पर गौर करें, तो संकेत मिलता है कि बांग्लादेश ने चीन की भावना का खास ख्याल रखा है।

दस्तावेज में ‘नियम आधारित विश्व व्यवस्था’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है, जिस पर अमेरिका का खास जोर रहता है और जिसे क्वैड (भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के समूह) ने भी अपनाया है। इसके अलावा इसमें समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा के बारे में ‘वर्तमान तंत्र’ को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

कूटनीतिक विशेषज्ञों ने कहा है कि ऐसी शब्दावली के इस्तेमाल का मतलब है कि इंडो-पैसिफिक की होड़ के बीच बांग्लादेश की कोशिश खुद को तटस्थ दिखाने की है। रुबियत सईमम ने ध्यान दिलाया है कि बांग्लादेश सरकार ने यह दस्तावेज एक खास मौके पर जारी किया। अप्रैल में ही प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद ने जापान और अमेरिका की यात्रा की थी।

अमेरिका के साथ बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव के कई बिंदु हैं। मानवाधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की स्थिति को लेकर अमेरिका ने बांग्लादेश सरकार की आलोचना की है। इससे दोनों पक्षों में तनाव बढ़ा है। दूसरी तरफ चीन और रूस के साथ बांग्लादेश के आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। इससे भी पश्चिमी देश खुश नहीं हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed