ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से बलोच कार्यकर्ताओं की अपील, पाक में बंद नेताओं की रिहाई में करें हस्तक्षेप
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलोच के राजनीतिक कार्यकर्ता शुक्रवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के 10 डाउनिंग स्टट्रीट स्थित आवास पर इकट्ठा हो गए। सभी ने उनसे पाकिस्तान के हिरासत केंद्रों में बंद हजारों बलोच कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की। इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन यूनाइटेड किंगडम के बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने किया था।
London: Balochistan activists gathered outside British Prime Minister's House at 10 Downing Street yesterday to seek his immediate intervention for release of thousands of Baloch political activists languishing in detention centres in Pakistan. pic.twitter.com/SUzfWgj5Ua
— ANI (@ANI) August 31, 2019विज्ञापन
प्रदर्शनकारियों ने बलोच राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अपहरण, यातना और हत्या के लिए पाकिस्तानी सेना के खिलाफ नारे लगाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सेना के खिलाफ आतंकवादी सेना के नारे सुनाई दिए। बलोच कार्यकर्ता पाकिस्तानी सेना की क्रूरता को सहन कर रहे हैं। उनका अपहरण करके उन्हें प्रताड़ित किया जाता है और फिर मार दिया जाता है।
बीएनएम के नेता हकीम बलोच ने कहा, 'आज हम यहा इकट्ठा इसलिए हुए हैं ताकि दुनिया को पता चल सके कि बलोच लोगों के साथ क्या हो रहा है।' बीएनएम ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें यूके सरकार से पाकिस्तान को किसी भी तरह की वित्तीय सहायता न दी जाए और उसपर दबाव बनाकर बलोट लोगों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित की जा सके। बलोच लोगों को पाकिस्तानी सेना ने जबरन पकड़कर रखा है।
ज्ञापन में कहा गया है कि 20,000 मानवाधिकार कार्यकर्ता पकिस्तान से गायब हुए हैं। जिसमें शिक्षाविद, पत्रकार, छात्र, वकील और राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल हैं। वहीं अन्य 6000 को पाकिस्तानी सेना ने हिरासत में लेकर प्रताड़ित और जान से मार दिया है।
ज्ञापन में लिखा है कि संयुक्त राष्ट्र में काम कर रहे समूहों, विभिन्न स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और यहां तक कि पाकिस्तानी न्यायपालिका तक का मानना है कि पाकिस्तानी सेना और उनकी गुप्त सेवाएं इन लोगों के गायब होने में सीधे शामिल हैं।
ज्ञापन में आगे लिखा है कि हालांकि आज की तारीफ तक एक अपराधी तक को न पकड़ा गया है और न ही उसे न्यायिक न्यायालय के सामने पेश किया गया है। इस तरह के अपराध को रोकने के लिए किसी तरह का अतंरराष्ट्रीय दबाव भी नहीं बनाया गया है।