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खगोलीय घटना: मृत तारों की टक्कर में बना सोना, अरबों साल बाद पृथ्वी तक पहुंचा; क्या स्वर्ण सूर्य से भी पुराना?
Mon, 20 Jul 2026 10:55 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 20 Jul 2026 10:55 AM IST
सार
- खगोलीय घटनाओं के विद्वानों के मुताबिक सोने की उत्पति मृत तारों की टक्कर के बाद हुई।
- न्यूट्रॉन तारों की टक्कर से हुई थी भारी तत्वों की उत्पत्ति।
- इसके ठोस प्रमाण करीब 10 साल पहले सामने आए थे।
- शोध से जुड़े लोगों के मुताबिक 2017 में सबसे मजबूत प्रत्यक्ष प्रमाण मिला था।
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- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
सोने के परमाणु पृथ्वी पर नहीं बने थे। पृथ्वी पर मौजूद अधिकतर सोना सूर्य के जन्म से भी अरबों वर्ष पहले अंतरिक्ष में हुई अत्यंत शक्तिशाली खगोलीय घटनाओं के दौरान बना था। यह खोज ब्रह्मांड में भारी तत्वों की उत्पत्ति को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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बेहद दुर्लभ खगोलीय घटनाओं में गिनती
टेरा डेली में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार पृथ्वी पर मिलने वाला सोना, प्लैटिनम और यूरेनियम जैसे भारी तत्व सामान्य तारों के भीतर बनने वाली नाभिकीय संलयन प्रक्रिया से उत्पन्न नहीं हो सकते। सामान्य तारे अपने जीवनकाल में केवल लोहे तक के तत्वों का निर्माण कर पाते हैं। इससे भारी तत्वों के निर्माण के लिए अत्यधिक ऊर्जा और न्यूट्रॉन-समृद्ध वातावरण की आवश्यकता होती है, जो केवल बेहद दुर्लभ खगोलीय घटनाओं में ही बनता है।
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न्यूट्रॉन तारों की टक्कर से हुई थी भारी तत्वों की उत्पत्ति
वैज्ञानिकों के अनुसार जब बहुत बड़े तारे अपने जीवन के अंत में ध्वस्त होते हैं, तो उनके अवशेष न्यूट्रॉन तारे बन जाते हैं। कई बार ऐसे दो न्यूट्रॉन तारे करोड़ों वर्षों तक एक-दूसरे की परिक्रमा करने के बाद अंततः टकरा जाते हैं। इस भीषण टक्कर के दौरान अत्यधिक न्यूट्रॉन-समृद्ध वातावरण बनता है, जिसमें आर-प्रोसेस यानी रैपिड न्यूट्रॉन कैप्चर प्रक्रिया के माध्यम से सोना सहित कई भारी तत्वों का निर्माण होता है। यह पूरी प्रक्रिया एक सेकंड से भी कम समय में पूरी हो सकती है, लेकिन इसके परिणामस्वरूप भारी मात्रा में नए तत्व पैदा होते हैं।
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2017 में मिला सबसे मजबूत प्रत्यक्ष प्रमाण
इस सिद्धांत को वर्ष 2017 में बड़ी मजबूती मिली, जब वैज्ञानिकों ने पहली बार जीडब्ल्यू170817 नामक न्यूट्रॉन तारा विलय का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इस घटना से निकली गुरुत्वाकर्षण तरंगों को लाइगो और विर्गो वेधशालाओं ने दर्ज किया, जबकि दुनिया भर की दूरबीनों ने इसके प्रकाशीय प्रभावों का अध्ययन किया। न्यूट्रॉन तारों की टक्कर के बाद होने वाले अत्यंत शक्तिशाली विस्फोट और उससे निकलने वाली तेज चमक को वैज्ञानिक भाषा में किलोनोवा कहा जाता है। वैज्ञानिक मॉडलिंग और स्पेक्ट्रोस्कोपिक विश्लेषण के आधार पर शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इस एक घटना में लगभग 200 पृथ्वी के बराबर द्रव्यमान का सोना बना होगा। इसके साथ प्लैटिनम, यूरेनियम और अन्य भारी तत्वों का भी निर्माण हुआ।