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Hindi News ›   World ›   Aspects of Nehru, Mountbatten letters can stay redacted, UK tribunal finds 

लंदन: नेहरू-एडविना से जुड़े पत्रों को जारी नहीं करेगी ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी, ट्रिब्यूनल का फैसला 

Sat, 30 Apr 2022 09:39 PM IST
Amit Mandal वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Amit Mandal Updated Sat, 30 Apr 2022 09:39 PM IST
सार

यूके कैबिनेट कार्यालय ने कहा था कि अधिकांश जानकारी पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में है और भारत और पाकिस्तान के संदर्भ में कोई भी नया पहलू यूके से इनके संबंधों को प्रभावित करेगा।

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Aspects of Nehru, Mountbatten letters can stay redacted, UK tribunal finds 
नेहरू-एडविना की चिट्ठियां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन, उनकी पत्नी एडविना और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से संबंधित व्यक्तिगत डायरी और पत्रों को जारी करने के मुद्दे पर यूके ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाते हुए इन्हें रिलीज करने पर रोक लगा दी है। जज सोफी बकले ने यूके फर्स्ट-टियर ट्रिब्यूनल (सूचना अधिकार) अपील की अध्यक्षता की जिसमें 1930 के दशक की डायरी और पत्राचार के कुछ संशोधित वर्गों का निर्धारण किया गया था।  
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ट्रिब्यूनल ने जवाहर लाल नेहरू और माउंटबेटेन की पत्नी एडविना के बीच आदान-प्रदान हुए पत्रों को एक ब्रिटिश लेखक को देने से मना कर दिया है। ब्रिटिश लेखक एंड्रयू लाउनी ने ब्रिटिश कोर्ट से लार्ड माउंटबेटेन और लेडी माउंटबेटेन की निजी डायरी और एडविना माउंटबेटेन और जवाहर लाल नेहरू के बीच लिखे गए पत्रों को रिलीज करने की मांग की थी।
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इस मामले में नवंबर 2021 में हुई सुनवाई के बाद साउथैम्पटन यूनिवर्सिटी ने माउंटबेटन डायरीज और पत्रों को जारी करना शुरू कर दिया था और अब तक 35000 पेज सार्वजनिक किये जा चुके हैं लेकिन 150 पैसेज या अंशों को जारी नहीं किया गया है। 
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भारत-पाकिस्तान से संबंध बिगड़ने का डर 
कागजात ब्रिटिश-भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण अवधि को कवर करते हैं, जिसमें भारत के विभाजन की देखरेख माउंटबेटन द्वारा की जा रही थी और इसमें लॉर्ड लुइस और पत्नी लेडी एडविना माउंटबेटन दोनों की व्यक्तिगत डायरी और पत्र शामिल हैं। यूके कैबिनेट कार्यालय ने कहा था कि उन कागजात से अधिकांश जानकारी पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में है और भारत और पाकिस्तान के संदर्भ में कोई भी पहलू यूके के संबंधों को प्रभावित करेगा।

एंड्रयू लोनी ने चार साल तक लड़ा केस 
अपनी किताब, द माउंटबेटन्स: द लाइव्स एंड लव्स ऑफ डिकी एंड एडविना माउंटबेटन' को लेकर कागजात जारी करने के लिए चार साल की लंबी लड़ाई लड़ने वाले इतिहासकार एंड्रयू लोनी ने कहा कि माउंटबेटन संग्रह ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन और भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जैसे कि राज्य की शक्ति का दुरुपयोग और हमारे इतिहास को सेंसर करना। 

लोनी ने इस मामले में अपनी बचत का 250,000 पाउंड से अधिक खर्च किया है। वह कहते हैं कि अब जबकि 30,000 पृष्ठों की डायरी और पत्र जारी किए गए हैं, किसी भी बड़े खुलासे की संभावना नहीं है क्योंकि अन्य पुस्तकों और डायरियों में अधिक जानकारी उपलब्ध है। उनका मानना है कि उनकी लड़ाई सेंसरशिप और सूचना की स्वतंत्रता के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर थी।

 
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