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पायलटों के आगे आया लाइसेंस गंवाने का संकट, तो कंपनी ने उड़वाया खाली विमान
Thu, 23 Jul 2020 12:52 PM IST
अनवर अंसारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल
Published by: अनवर अंसारी
Updated Thu, 23 Jul 2020 12:52 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : PTI
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एयरलाइंस कोरोना वायरस महामारी का खुद पर प्रभाव पड़ने से रोकने के लिए नए-नए उपाय करने में जुटी हुई हैं। इसी कड़ी में, आसियाना एयरलाइंस ने 20 से अधिक बार बिना यात्रियों के उड़ान भरी, ताकि वह अपने पायलटों के लाइसेंस को बरकरार रख सके।
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दरअसल, अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन ने अपने सदस्य देशों के लिए दिशानिर्देश बनाए हैं कि कैसे पायलटों को अपने कौशल को बनाए रखने में मदद की जाए। आम तौर पर, पायलटों को अपना लाइसेंस बनाए रखने के लिए 90 दिनों के भीतर कम से कम तीन बार विमान को टेक ऑफ या लैंड कराना होता है।
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हालांकि, वर्तमान समय में विमान उड़ानों पर लगे प्रतिबंध के चलते ऐसा संभव नहीं है, इसलिए आसियाना एयरलाइंस अपने पायलटों से खाली विमान को टेक ऑफ और लैंड करवा रही है, ताकि उनके लाइसेंस बरकरार रहें।
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चालक दल को उड़ान के लिए तैयार करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। फिलहाल, दुनिया में एक तिहाई से अधिक विमानों का संचालन नहीं हो रहा है, इसलिए यह विमानन कंपनियों के सामने एक अभूतपूर्व संकट बनकर उभरा है।
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आसियाना एयरलाइंस के प्रवक्ता ने कहा कि खाली एयरबस एसई ए380 ने मई महीने में तीन दिन कुछ घंटों के लिए दक्षिण कोरिया के ऊपर उड़ान भरी, ताकि पायलटों को टेक ऑफ और लैंडिंग करने का अभ्यास करवाया जा सके।
सियोल में शिनौन्ग सिक्योरिटीज कंपनी में एक विश्लेषक उम क्यूंग-ए ने कहा कि एयरबस एसई ए380 को टेक ऑफ और लैंडिंग करवाने में बहुत पैसे लगते हैं और इस पैसे को चतुराई से प्रयोग किया जाना चाहिए, खासतौर पर वर्तमान समय में। उन्होंने कहा कि आसियाना वर्तमान में अपने पायलटों का लाइसेंस गंवाना सहन नहीं कर सकती है।
आसियाना के पास 135 पायलट हैं, जिनको कंपनी के छह ए380 विमानों को उड़ाने का पर्याप्त समय नहीं मिला, लेकिन कंपनी लगातार खाली विमानों का संचालन भी नहीं कर सकती है, इसलिए कंपनी के आगे संकट आ खड़ा हुआ है। लेकिन हाल ही में, देश के परिवहन मंत्रालय ने पायलटों के लिए नियमों में विशेष छूट दे दी है। जापान की ऑल निपन एयरवेज को भी जापान के विमानन प्राधिकरण से इसी प्रकार की छूट मिली है।