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ब्रिटेन में चुनाव से पहले 58 हजार लोगों के हाथ से चली गई नौकरी

Wed, 13 Nov 2019 01:21 AM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 13 Nov 2019 01:21 AM IST
सार

  • चार साल में सबसे भारी कटौती हुई, बेरोजगारी दर 1975 के बाद 3.8 फीसदी पर पहुंची
  • जॉनसन को 2020 से पहले ईयू के साथ नए व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना होगा 
  • अमेरिका औऱ चीन के बीच ट्रेड वार के तनाव का असर भी माना जा रहा है एक कारण
  • प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने 12 दिसंबर को चुनाव की घोषणा की है, हो सकती है मुसीबत

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around 58 thousand people lost their job in Britain just before the Elections
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

ब्रिटेन में चुनाव करीब आने से ठीक पहले चार साल में नौकरियां में सबसे भारी कटौती हुई है। आंकड़ों के मुताबिक जुलाई-सितंबर की तिमाही में 58 हजार लोगों की नौकरियां चली गईं। हालांकि नौकरियों में कटौती अर्थ शास्त्रियों के अनुमान से कम हुई है।

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ब्रेग्जिट गतिरोध को खत्म करने के इरादे से प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने 12 दिसंबर को चुनाव कराने की घोषणा की है। इस बीच नौकरियों में कटौती मुसीबत खड़ी कर सकती हैं। हालांकि नियोक्ताओं का मानना है कि बोरिस जॉनसन के जीतने के बाद भी नौकरियों में कटौती जारी रह सकती है। 
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ऐसे में प्रधानमंत्री को 2020 की तय समय सीमा से पहले यूरोपीय संघ के साथ नए व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना होगा। एचएसबीसी अर्थशास्त्री क्रिस हैरे ने कहा, मान लेते हैं कि रोजगार के आंकड़े अस्थिर हो सकते हैं और नौकरियों में गिरावट अंशकालिक रोजगार के कारण हो सकती है। लेकिन यह गिरावट श्रमिक मांग में नरमी का शुरुआती संकेत हो सकती है। 
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वहीं, कंसलटेंसी फर्म पैंथियॉन मैक्रोइकोनॉमिक्स के अर्थ शास्त्री सैमुअल टॉम्बस मानते हैं कि यह नरमी बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दर घटाने के लिए काफी है। गौरतलब है कि नौकरियों में कटौती के बाद बैंक ऑफ इंग्लैंड ने हाल ही में ब्याज दरें घटाई हैं। अर्थशास्त्रियों ने इस दौरान करीब 94 हजार लोगों की नौकरी जाने का अनुमान लगाया था जबकि करीब 58 हजार लोगों को ही नौकरी से हाथ धोना पड़ा है।

वेतन वृद्धि में मामूली बढ़ोतरी, ट्रेड वार को माना जा रहा कारण

आंकड़ों के मुताबिक कुल एवं मूल आय में 3.6 फीसदी की मामूली वृद्धि हुई है जो अनुमान से काफी कम है। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में वृद्धि भी इस साल सितंबर तक सिर्फ एक फीसदी रही जो पूरे दशक में न्यूनतम है। विशेषज्ञ इसे अमेरिका और चीन के बीच तनाव का असर मान रहे हैं। इसके अलावा 31 अक्तूबर को ब्रेग्जिट की नई समय सीमा का एलान भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है। 

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