Myanmar: अधिक खूंखार होते म्यांमार के गृहयुद्ध में बढ़ता जा रहा है सेना का दमन
बीते कुछ महीनों के दौरान म्यांमार की वायु सेना अपने हेलीकॉप्टरों से ग्रामीण इलाकों में गोलीबारी भी करती रही है। इस दौरान अस्पताल, चर्च और विस्थापित लोगों के शिविरों को भी निशाना बनाया गया है। हेलीकॉप्टरों से राइफलों के जरिए गोलियां दागी गई हैं और हथगोले फेंके गए हैं...
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म्यांमार में जारी गृह युद्ध के दौरान सेना की तरफ से खूनी हमलों के नए ब्योरे सामने आए हैं। एक ऐसी घटना की जानकारी सामने आई है, जिसमें सेना की हवाई बमबारी से लगभग 170 नागरिकों की मौत हो गई। उनमें कई बच्चे भी थे। यह घटना उत्तर-पश्चिमी सगायंग क्षेत्र के एक गांव में हुई। बीते 11 अप्रैल को हुई वायु सेना के विमानों ने उस गांव पर उस समय बमबारी शुरू कर दी, जब लोग वहां विपक्षी समूहों की तरफ से बनाई गई वैकल्पिक सरकार- नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट (एनयूजी) के दफ्तर के उद्घाटन के मौके पर इकट्ठे हुए थे।
वेबसाइट एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा है कि फरवरी 2021 में सैनिक तख्ता पलट के बाद देश में शुरू हुए गृह युद्ध के दौरान किसी एक घटना में उससे ज्यादा मौतें नहीं हुई हैं, जितनी 11 अप्रैल को हुईं। सेना की कमेटी- स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन काउंसिल (एसएसी) देश का शासन चला रही है। विश्लेषकों ने कहा है कि विद्रोही गुटों की बढ़ती ताकत के बीच ऐसा लगता है कि एसएसी के दमनकारी तेवर और तीखे हो गए हैं।
बीते कुछ महीनों के दौरान म्यांमार की वायु सेना अपने हेलीकॉप्टरों से ग्रामीण इलाकों में गोलीबारी भी करती रही है। इस दौरान अस्पताल, चर्च और विस्थापित लोगों के शिविरों को भी निशाना बनाया गया है। हेलीकॉप्टरों से राइफलों के जरिए गोलियां दागी गई हैं और हथगोले फेंके गए हैं। एशिया टाइम्स के मुताबिक मध्य म्यांमार में कई स्थानों से वायु सेना की ऐसी कार्रवाइयों की खबरें मिली हैं।
इस बीच खबर है कि विद्रोही गुट पीपुल्स डिफेंस फोर्स (पीडीएफ) ने भी बड़े पैमाने ऑटोमैटिक राइफल जैसे हथियार हासिल किए हैं। नस्लीय अल्पसंख्यक नियंत्रित सीमाई क्षेत्रों में पीडीएफ पहले से मजबूत था। लेकिन ताजा खबर यह है कि पीडीएफ का असर बहुसंख्यक बामर समुदाय की रिहाइस वाले सगायंग, माग्वे और बागो जैसे इलाकों में भी बढ़ा है। इस वजह से इन क्षेत्रों में म्यांमार की सेना के जवाबी हमले भी तेज हो गए हैं।
विद्रोहियों को जो हथियार हाल में मिलने की खबर है, उनमें चीन में बनी टाइप-56 असॉल्ट राइफलें और कुछ ऐसे हथियार शामिल हैं, जिनका पहले चीन की सेना इस्तेमाल करती थी। बागियों के पास छोटे आकार के 5.56 एमएस तोपें भी हैं। बताया जाता है कि उन्होंने अमेरिका में बनी एम-4 कारबाइनें, जर्मनी में तैयार एचके-33 राइफलें आदि भी हासिल कर ली हैं। इन कारणों से विद्रोही गुटों के हमलों की भी मारक क्षमता बढ़ गई है।
विद्रोही गुटों की ताकत बढ़ने से सरकार से असंतुष्ट जन समुदायों में उनकी साख बढ़ी है। थाईलैंड से लगे सीमाई इलाकों में असर रखने वाले उग्रवादी संगठन करेन नेशनल लिबरेशन आर्मी, उत्तरी राज्य कवाह में सक्रिय करेनी आर्मी और भारत से लगी सीमा पर सक्रिय चिन नेशनल आर्मी ने पीडीएफ से तालमेल बना लिया है। मध्य इलाकों में सेना की जवाबी कार्रवाई से भागे पीडीएफ के लड़ाकों को इन तमाम इलाकों में पनाह मिल रही है। इन सबसे विद्रोही समूहों की ताकत बढ़ी है। इससे बौखलाए सैनिक शासन ने दमन तेज कर दिया है, जिसका निशाना निहत्थे नागरिक भी बन रहे हैं।