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याहू दिखाएगा आपके रुतबे के अनुसार विज्ञापन
Updated Fri, 14 Jun 2013 02:30 PM IST
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अमेरिकी कंपनी याहू ने एक नई तकनीक ईजाद की है जिसके तहत विज्ञापन की दरें दर्शकों की सामाजिक हैसियत पर आधारित होंगी। याहू ने इस तकनीक के पेटेंट के लिए अर्ज़ी भी दे दी है।
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नई तकनीक के अनुसार लोगों की सामाजिक हैसियत इस आधार पर तय की जाएगी कि सोशल नेटवर्किग साइट्स पर उनके कितने फ़ॉलोअर हैं और दूसरों के पोस्ट्स पर कितनी बार उनका ज़िक्र होता है।
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एक मार्केटिंग विशेषज्ञ के अनुसार याहू की ये नई तकनीक विज्ञापन के बाज़ार में काफ़ी लोकप्रिय हो सकती है। याहू ने 'सोशल रेप्यूटेशन ऐड्स' के नाम से दिसंबर 2011 में अमेरिकी पेटेंट ऑफ़िस में अर्ज़ी दी थी लेकिन इस नई तकनीक को हाल ही में सार्वजनिक किया गया है।
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याहू के अनुसार फ़िलहाल मार्केटिंग के लोग ये तय करते हैं कि किसी साइट पर किस जगह विज्ञापन देने पर कुछ विशेष लोगों का ध्यान आकर्षित होता है लेकिन इस नई तकनीक के अनुसार ये भी तय किया जा सकेगा कि उस साइट का इस्तेमाल करने वालों का समाज के दूसरों लोगों पर कितना प्रभाव है।
सामाजिक हैसियत
याहू का कहना है कि लोगों की सामाजिक हैसियत को निर्धारित करने के लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना होगा-
-वो कितने पोस्ट, कितने रीपोस्ट और रीट्वीट करते हैं।
-वो किस तरह के उत्पाद पसंद करते हैं।
-कितनी बार दूसरे लोग उनके बारे में लिखते हैं।
-उनके फ़ॉलोअर ख़ुद कितने प्रभावी हैं।
कलाउट, क्रेड और प्रौसकोर जैसी कंपनियां पहले से ही इसका मूल्यांकन करती हैं कि इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले कितने प्रभावी हैं।
विज्ञापन उद्योग के एक सलाहकार का कहना है कि याहू की इस नई तकनीक के इस्तेमाल से इसको और बड़े पैमाने पर किया जा सकता है।
इंटरनेशनल मार्केटिंग पार्टनर्स के निदेशक एलिसन स्टीवर्ट एलेन का कहना है, ''ये मार्केटिंग के लोगों के लिए एक नई और रचनात्मक तकनीक है जिसका इस्तेमाल करके वे अपने ब्रांड की बिक्री को बढ़ा सकते हैं।''
हालांकि लोगों की निजता का अभियान चलाने वाले एक संगठन की राय इससे कुछ अलग है। बिग ब्रदर वॉच के निदेशक निक पिकल्स के अनुसार ये नई तकनीक दरअसल विज्ञापन को बेचने के लिए ग्राहकों के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी जुटाने के लिए कुछ मुट्ठी भर मल्टीनेशनल कंपनियों के बीच की आपसी लड़ाई है।
निक पिकल्स का कहना था, ''इस तरह की नई तकनीक से हमारे बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की जाती है। इसी वजह से आज हमें उपभोक्ता गोपनीयता की रक्षा के लिए सख़्त क़ानून की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।
लोगों को इस बात की कोई समझ नहीं है कि उनके बारे में ऑनलाइन के ज़रिए कितनी जानकारी जमा की जा रही है और जब तक कड़े क़ानून नहीं बनाए जाते हैं कंपनियां इसी तरह से लोगों को अंधेरे में रखेंगी।''
याहू ने इस बारे में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक नहीं दी है।
लिओ केलियोन, टेक्नोलोजी रिपोर्टर