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याहू की घर से काम करने पर पाबंदी कितनी सही?

Thu, 28 Feb 2013 08:30 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Thu, 28 Feb 2013 08:30 PM IST
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yahoo ban on working from home

याहू ने एक बड़ा फ़ैसला लेते हुए दफ़्तर से बाहर रहकर ही काम करने पर रोक लगा दी है। याहू का फ़ैसला इसलिए अचरज भरा है क्योंकि पिछले कुछ सालों के दौरान दुनिया भर में घर से काम करने का चलन बढ़ा है।

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याहू के मानव संसाधन विकास विभाग ने अपने कर्मचारियों को ईमेल के जरिए इस पाबंदी की जानकारी दी है। इसके बाद याहू के कर्मचारियों में काफी गुस्सा देखा जा रहा है।
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इस सूचना में कहा गया है, “ऐसा देखा गया है कि ज़्यादातर अच्छे फ़ैसले कैफिटेरिया की बैठकों में होते हैं, नए लोगों से मिलने के दौरान होते हैं और टीम के साथियों के बीच चर्चा से होते हैं।”
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इस सूचना में ये भी कहा गया है कि घर से काम करने से काम की तेजी और गुणवत्ता प्रभावित होती है।

दफ़्तर लौटने का आदेश
घरों से काम करने वाले सभी कर्मचारियों को इस साल जून से दफ़्तर आकर काम करने को कहा गया है।

बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से ये फ़ैसला मुख्य कार्यकारी अधिकारी मारिस्सा मेयर ने लिया है, मेयर ख़ुद मां बनने के कई सप्ताह बाद काम पर लौटी हैं। हालांकि मेयर के फ़ैसले पर कर्मचारियों में नाराजगी देखी जा रही है।

कारोबारी रिचर्ड ब्रैंसन अपना कामकाज कैरिबियाई द्वीप नेकर के अपने घर से ही करते हैं, उन्होंने इस फ़ैसले पर कहा, “ये एक पीछे लौटने वाला कदम है, जब दुनिया भर में दफ़्तर से बाहर काम करना सहज और प्रभावी हो गया है तब इस पर रोक लगाया गया है।”

हाल के दिनों में दफ़्तर से बाहर रह कर काम करने का चलन बढ़ा है। उम्दा तकनीक, तेज ब्रॉडबैंड और वेबकैम के इस्तेमाल के जरिए लोग दफ्तर का काम घरों से आसानी से कर रहे हैं, और किसी बैठक में घर में बैठे हिस्सा भी ले पाते हैं।

घर से काम करने में सबसे बड़ी सुविधा ये मिलती है कि आम लोगों को रोज सफ़र नहीं करना पड़ता।

टेलीवर्किंग पर एक राय नहीं
इसके चलते ही दुनिया भर में दफ्तर के बजाए घर से काम करने का चलन बढ़ा था। ब्रिटेन में घर बैठकर काम करने वालों की संख्या लगातार बढ़ी है। 2011 में हुए एक सर्वे के मुताबिक करीब 59 फीसदी कर्मचारियों ने टेलीवर्किंग को तरजीह दी थी, जबकि 2006 में ऐसे लोगों की संख्या महज 13 फीसदी ही थी।

अमेरिकी के ब्यूरो ऑफ़ लेबर के आंकड़ों के मुताबिक करीब 24 फ़ीसदी कर्मचारी घर से ही काम करना चाहते हैं।
हालांकि दूसरी ओर टेलीवर्क रिसर्च नेटवर्क के मुताबिक अमरीका के महज 2।5 फ़ीसदी कर्मचारी ही ये मानते हैं कि उनका घर भी दफ्तर हो सकता है। ऐसे में इस बात को लेकर दुनिया भर में घर से ही काम करने पर कोई एकसमान राय नहीं बन पा रही है।

याहू कोई अकेली कंपनी नहीं है जिसने घर से ही काम करने वाले कर्मचारियों पर पाबंदी लगाई है।

पिछले ही सप्ताह गूगल के मुख्य वित्तीय अधिकारी पैट्रिक पिकेटे से जब ये पूछा गया कि कितने लोग टेलीवर्किंग कर सकते हैं उनका जवाब था, “जितना कम संभव हो।”

घर से काम करने का नुकसान
पिकेटे के मुताबिक, “दफ़्तर में एक साथ लंच लेने का जादुई असर होता है। कर्मचारियों का एकसाथ समय बिताना भी प्रभावी होता है।”

ऐसे में अब इस बात पर बहस बढ़ रही है कि क्या घर से काम करना प्रभावी होता है। कुछ लोग इसे परंपरागत कामकाजी संस्कृति से जोड़कर देख रहे हैं।

लंदन बिजनेस स्कूल और यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया के एक शोध के मुताबिक जब कर्मचारी दफ़्तर में नजर नहीं आते हैं तो उनकी पदोन्नति के मौके कम हो जाते हैं। ये शोध बताता है कि घर से काम करने वाले कर्मचारियों को दफ़्तर में जाकर काम करने वाले अपने समकक्ष कर्मचारियों की तुलना में कम वेतनवृद्धि मिलती है।

इससे घर बैठे काम करने वालों पर एक अतिरिक्त दबाव भी हावी हो जाता है।

अमेरिकी मानवसंसाधन पर जारी एक रिपोर्ट की लेखक और टेक्सास यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जेनिफर ग्लास कहती हैं, “कामकाजी लोगों की उम्र 30 से 40 साल के बीच होती है, और टेलीवर्किंग तो उनके कामकाजी जीवन का हिस्सा है। वे दफ़्तरों में अमूमन 40 घंटे बिताने के बाद भी घर से काम करते हैं।”

याहू के फ़ैसले से ग्लास हैरत में हैं। वे कहती हैं, “यह फ़ैसला दर्शाता है कि याहू कारपोरेट अमरीकी कंपनियों की राह पर है, वे उच्च तकनीक उद्योग जगत का हिस्सा नहीं है।” ग्लास के मुताबिक इससे नई पहल की उम्मीदों को झटका लगा है।

मानसिकता का अंतर
ग्लास कहती है कि कैंटीन में साथ खाने और आपस में चर्चा करने के तर्क इसलिए भी गले नहीं उतरते क्योंकि आज की कामकाजी दुनिया में लोग दफ्तरों में भी एक दूसरे से ज़्यादा बात नहीं करते।

ग्लास अपने अनुभव के बारे में कहती हैं, “मैं तो सामान्य तौर पर ईमेल के जरिए ही बात करती हूं, ये नहीं देखती कि वो दफ्तर में है या नहीं।”

दरअसल ग्लास इस पूरी समस्या को मैनेजरों की समस्या मानती हैं। वे कहती हैं, “मैनेजर अपने आस पास लोगों को देखना चाहते हैं, यह चीजों को नियंत्रित करने का तरीका है।”

हालांकि कुछ लोग इसे पुरानी सोच मानते हैं। ब्रिटेन के मजदूर यूनियन समूह टीयूसी के नीतिगत सलाहकार पॉल सेलर्स कहते हैं, “अगर कोई कर्मचारी घर से काम कर रहा है तो उसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती।”

डेम स्टेफिने शेर्ली ने 1960 के दशक में घर से काम करने की शुरुआत की थी। वे कहती हैं, “अकादमिक स्तर पर लोग इस तरीके को स्वीकार करते हैं जबकि आजकल के योजनाकार इस विचार को ज्यादा तरजीह नहीं देते।”

75 साल की स्टीफन शर्ली ने उद्यग जगत को 1993 में ही छोड़ दिया था। लेकिन उनकी कल्पना पर आज भी विचार विमर्श जारी है।

सामाजिक तौर पर स्वीकार नहीं
घर बैठकर काम करने को आज भी सामाजिक तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सका है।

अलग अलग लोग समय समय पर घर बैठकर काम करने की आलोचना कर चुके हैं। लंदन के मेयर बोरिस जॉनसन ने एक बार मजाक में कहा था, “यह अचरज भरा ही है कि हम फ्रिज से निकालकर कुछ खाते हुए अपने ईमेल चेक करें।”

वहीं टेलीवर्किंग हैंडबुक के लेखक और टेलीवर्क एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक एलन डेनबेग घर से काम करने के काफी फायदे गिनाते हैं। उनके मुताबिक, “अगर आप का परिवार छोटा है तो आप सहजता से अपने प्रोजेक्ट को पूरा कर सकते हैं।”


हालांकि एलन डेनबेग घर से काम करने को ज्यादा तरजीह नहीं देते। लेकिन साथ ही ये भी कहते हैं कि रोजाना दफ्तर जाना भी हास्यास्पद ही है। बहरहाल ज्यादातर कंपनियां घर से बैठकर काम करने को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं।

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