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मंदी की आंच रोक पाएंगे ओबामा?

Thu, 27 Dec 2012 04:57 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Thu, 27 Dec 2012 04:57 PM IST
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will obama stop recession

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा आनन-फानन में अपनी छुट्टियां कम कर वाशिंगटन वापस आ रहे हैं ताकि अमरीकी अर्थव्यवस्था को मंदी से बचाने के लिए 'फिस्कल क्लिफ' के मसले पर कोई फैसला किया जा सके।

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अगर इस मसले पर कोई समझौता नहीं होता है तो एक जनवरी से कर में इजाफ़ा और खर्च में भारी कटौती जैसे उपाय अमल में आ जाएँगे और अमेरिका में फिर से मंदी के आसार का खतरा मंडरा सकता है। अमेरिका में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन पार्टियों में इस मसले पर अब भी कोई सहमति नहीं बन पाई है।
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कांग्रेस को लिखे पत्र में वित्त मंत्री टिमोथी गिथनर ने कहा कि उन्हें कुछ ऐसे उपाय करने होंगे जिससे उधारी सीमा 16।4 खरब डॉलर के स्तर तक न जाए और करीब 200 अरब डॉलर की बचत की जा सके। उन्होंने कहा कि इससे सरकार अगले दो महीने तक इस उधारी सीमा के स्तर तक पहुंचने से बची रहेगी। सरकार को अपने कामकाज के लिए पूंजी मुहैया कराने के लिए 16।4 खरब डॉलर तक उधार लेने की इजाज़त है।
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होगा फैसला?
उम्मीद है कि ओबामा रिपब्लिकन नेताओं से मुलाकात कर कोई हल निकालने की कोशिश करेंगे हालांकि अब तक किसी नई तारीख़ की घोषणा नहीं की गई है।

अगर जल्द कोई फैसला नहीं होता है तो अमेरिका और दुनिया भर के बाजारों को बड़ा नुकसान हो सकता है और अमरीकी अर्थव्यवस्था के एक बार फिर मंदी की ओर बढ़ने का खतरा बढे़गा।

'फिस्कल क्लिफ' उपाय के तहत कर में 600 अरब डॉलर का इजाफ़ा कर राजकोषीय घाटे की भरपाई करने और खर्च कटौती के मुद्दे पर दोनों पक्षों में मतभेद बरकरार है। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि कुछ वक्त के लिए ऐसी सहमति बनी है जिससे अगले कुछ महीने तक खर्च कटौती टल सकती है।

अर्थशास्त्रियों का भी मानना है कि इस कदम से अमेरिका मंदी की गर्त की ओर फिर से बढे़गा और दुनिया भर के बाजारों पर इसका असर दिख सकता है। अमरीकी वित्त मंत्रालय से जुड़े एक विभाग का अनुमान है कि वर्ष 2013 में अर्थव्यवस्था के दायरे में 0।5 फीसदी की कमी आएगी जबकि बेरोज़गारी दर बढ़कर 9।1 फीसदी के स्तर पर पहुंच जाएगी।


अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस कदम से अमेरिका मंदी की गर्त की ओर फिर से बढे़गा और दुनिया भर के बाजार पर इसका असर दिख सकता है। अमरीकी वित्त मंत्रालय से जुड़े एक विभाग का अनुमान है कि वर्ष 2013 में अर्थव्यवस्था के दायरे में 0।5 फीसदी की कमी आएगी जबकि बेरोज़गारी दर बढ़कर 9।1 फीसदी के स्तर पर पहुंच जाएगी।

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