सितंबर तक खत्म होगा नोटबंदी का असर: वर्ल्ड बैंक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विश्व बैंक का कहना है कि किसी भी सुधारवादी कदम की अल्पकालीन कीमत चुकानी पड़ती है और भारत में नोटबंदी का प्रतिकूल प्रभाव भी मध्यावधि यानी सितंबर तक खत्म हो जाएगा।
विश्व बैंक में विकास संभावना समूह के निदेशक एहान कोसे ने पत्रकारों से कहा, ‘किसी सुधारात्मक उपाय की अल्पकालीन कीमत तो चुकानी ही पड़ती है लेकिन इसका दीर्घकालीन फायदा भी होता है। भारत के मामले में हम उम्मीद करते हैं कि नोटबंदी का चाहे जो भी प्रतिकूल असर रहा हो लेकिन यह असर मध्यावधि तक गायब हो जाएगा।’
कोसे ने यह भी कहा कि विश्व बैंक को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2018 और 2019 तक भारत की विकास दर की रफ्तार तेज होगी। इसमें निजी खपत, अधोसंरचना निवेश और निवेश में तेज वृद्धि का योगदान रहेगा। भारत ने व्यापक सुधार की पहल शुरू कर दी है।
आने वाले वर्षों में उत्पादकता बढ़ने की उम्मीद है
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में इन सुधारों की बदौलत घरेलू सप्लाई की बाधाएं कम होने और उत्पादकता बढ़ने की उम्मीद है। वास्तविक आय और खपत की मदद के लिए मामूली महंगाई और सरकारी कर्मचारियों की वेतनवृद्धि भी जारी रहेगी।
एक अन्य सवाल के जवाब में कोसे ने कहा, ‘हम समझते हैं कि भारत नकद प्रवाही अर्थव्यवस्था है। यहां लगभग 80 प्रतिशत लेनदेन नकद में ही होता है जो सभी प्रकार के लेनदेन का लगभग दो तिहाई है। अब सवाल यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने पुराने नोटों की जगह नए नोट पर्याप्त मात्रा में छापे हैं कि नहीं क्योंकि इस वजह से ग्रामीण क्षेत्र और खासकर शहरी गरीब बहुत ज्यादा प्रभावित हुए हैं।’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन इन सबके बावजूद हम उम्मीद करते हैं कि 2017 में भारत की विकास दर बढ़ेगी। नोटबंदी का सकारात्मक प्रभाव मध्यावधि के बाद दिखने लगेगा।’