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सीरिया न दे हिज्बुल्ला को हथियार: अमेरिका

Fri, 01 Feb 2013 09:20 AM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Fri, 01 Feb 2013 09:20 AM IST
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us warns Syria over weapons to hezbollah

सीरियाई सीमा में कथित इसराइली हमले के बाद सीरिया ने संयुक्त राष्ट्र में आधिकारिक शिकायत दर्ज करवाई है। वहीं अमेरिका ने सीरिया को आगाह किया है कि वो हिज्बुल्ला को हथियार न दे।

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सीरियाई विदेश मंत्रालय ने गोलन में तैनात संयुक्त राष्ट्र के कमांडर को तलब किया और अपना आधिकारिक विरोध दर्ज करवाया है।

सीरिया ने कहा है कि इसराइल ने 1974 में दोनों देशों के बीच हुए संघर्ष ना करने के समझौते का उल्लंघन किया है। तकनीकी रुप से दोनों देशों के बीच लड़ाई जारी है।
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सीरियाई सेना का आरोप है कि इसराइली विमानों ने बुधवार को दमिश्क के उत्तर पश्चिम में स्थित सैनिक शोध केंद्र को निशाना बनाया।

सीरिया ने अमेरिका के उन दावों का भी खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि हमले में उन सैनिक वाहनों को निशान बनाया गया जो लेबनान की ओर हथियार लेकर जा रहे थे।
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सीरियाई सेना के बयान को सरकारी टेलिविजन पर पढकर सुनाया गया जिसमें कहा गया कि इसराइली लड़ाकू विमानों ने जामराया वैज्ञानिक रिसर्च सेंटर पर सीधे हमला किया जिसमें दो लोग मारे गए और पांच लोग घायल हुए।

बड़ी कूटनीतिक घटना
रुस ने इस हमले को अस्वीकार्य बताया है। सीरिया के सबसे मजबूत सहयोगी ईरान के विदेश मंत्री अली अकबर सलेही ने सीरिया पर हुए हमले की निंदा करते हुए कहा है कि ये हमला पश्चिमी नीति का हिस्सा है ताकि सीरिया को अस्थिर किया जा सके।

वहीं अमेरिकी अधिकारियों ने बीबीसी को बताया है कि हमले में उन वाहनों को निशाना बनाया गया है जो जमीन से हवा में मार करने वाली एस ए 17 मिसाइल लेकर जा रहे थे। वहीं कुछ विद्रोहियों ने कहा है कि उन्होंने भी जामराया केंद्र पर हमला किया है।

इसराइल ने इस हमले पर प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया है। दोनों देशों की सीमाओं के एक दूसरे से अलग रखने के मकसद से से संयुक्त राष्ट्र की निगरानी टुकड़ी 1974 से ही गोलन में तैनात है। इस क्षेत्र में दोनों की देशों के सैनिकों और हथियारों की सीमित तैनाती है।

जानकारों के मुताबिक इसराइल द्वारा सीरिया पर हमला किया जाना एक बड़ी कूटनीतिक घटना है क्योंकि ईरान ने कहा है कि सहयोगी सीरिया पर होने वाले किसी भी हमले को वो ईरान पर हुआ हमला समझेगा।


इस घटना से एक और विवाद खड़ा हो गया है। सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ 22 महीने से संघर्ष जारी होने के बावजूद वो सत्ता पर काबिज है जबकि इस संघर्ष में 60,000 लोगों की मौत हो चुकी है।

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