अमेरिका अपने घायल सैनिकों का करेगा लिंग प्रत्यारोपण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ईराक और अफगानिस्तान में युद्ध लड़ रहे सैनिकों के हाथ-पैर गंवाने की खबरें आती रहती हैं लेकिन एक ऐसी भी चोट है, जिसके बारे में कोई बात नहीं करना चाहता। सैनिक इसे झेलते हैं और शर्म से चुप रह जाते हैं। यह है जनन अंगों पर लगी चोट या जनन मूत्रीय जख्म (जेनिटोयूरेनिरी इंजरी)। हालांकि उम्मीद है कि अब ऐसा नहीं होगा।
एक साल के अंदर और अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो हो सकता है कि कुछ ही महीनों में अमेरिका का पहला लिंग प्रत्यारोपण किया जाए। यह ऑपरेशन एक युवा सैनिक का किया जाएगा, जो अफगानिस्तान में एक बम धमाके की चपेट में आ गया था।
2001 से 2013 के दौरान इन दोनों देशों में 1,367 सैन्य कर्मियों को जनन अंगों पर घातक चोट लगी थी। इनमें से ज्यादातर 35 साल से कम उम्र के थे और देसी बम यानी आईईडी से चोटिल हुए थे। आंशिक या पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त लैंगिक अंगों का कोई कारगर इलाज नहीं होने के कारण इस बारे में बहुत जानकारी सामने नहीं आ पा रही थी लेकिन अब जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के सर्जनों ने पहले लिंग प्रत्यारोपण की तैयारी कर ली है।
अब तक केवल दो सर्जरी
अस्पताल के प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी डिपार्टमेंट के चेयरमैन
डॉ. डब्ल्यूपी एंड्रयू ली के मुताबिक सर्जरी के लिए एक मृत डोनर से अंग
लिया जाएगा। उम्मीद है कि ऑपरेशन के कुछ महीनों के भीतर लिंग सही तरीके से
काम करने लगेगा।
विशेषज्ञों को आशा है कि वह सैनिक सर्जरी के बाद अपना
सामान्य सेक्स जीवन जी सकेगा। वैसे इस ऑपरेशन को प्रायोगिक तौर पर लिया जा
रहा है और अस्पताल ने 60 प्रत्यारोपण की मंजूरी दी है।
अमेरिकी डॉक्टरों के लिए लिंग प्रत्यारोपण इतना सरल नहीं होगा। मेडिकल जर्नल्स के अनुसार अभी तक ऐसी केवल दो सर्जरी हुई हैं। इनमें से 2006 में चीन में हुई पहली सर्जरी फेल हो गई थी। वहीं दूसरा ऑपरेशन पिछले साल दक्षिण अफ्रीका में हुआ था, जिसमें डॉक्टर सफल रहे थे।