{"_id":"5be022cbbdec22694517de71","slug":"us-midterm-elections-polls-on-november-6-for-midterm-elections","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में इस बार भारतवंशी भारी, ‘समोसा कॉकस’ पर सबकी निगाहें, मंगलवार को होगा मतदान","category":{"title":"America","title_hn":"अमेरिका","slug":"america"}}
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में इस बार भारतवंशी भारी, ‘समोसा कॉकस’ पर सबकी निगाहें, मंगलवार को होगा मतदान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 05 Nov 2018 04:30 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमेरिका में अप्रवासियों को लेकर भले ही बुरी छवि बनाई जा रही है लेकिन छह नवंबर को मध्यावधि चुनावों में भारतीय मूल के करीब 100 अमेरिकी उम्मीदवार मैदान में मजबूत दावेदार के तौर पर उतर चुके हैं। वैसे तो चुनाव में सभी की निगाहें तथाकथित ‘समोसा कॉकस’ पर होंगी लेकिन युवा भारतवंशी उम्मीदवारों का इतनी संख्या में उभरना उनकी बढ़ती महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। मौजूदा अमेरिकी कांग्रेस में ‘समोसा कॉकस’ पांच भारतीय-अमेरिकियों के समूह को कहा जाता है।
विज्ञापन
अमेरिका की जनसंख्या में भारतीय मूल के अमेरिकियों की जनसंख्या एक प्रतिशत है। भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत रिचर्ड वर्मा ने कहा कि अमेरिका की राजनीति में भारतीय-अमेरिकियों की संख्या बढ़ते देखना अद्भुत है। मंगलवार को होने वाले मध्यावधि चुनावों में वर्तमान प्रतिनिधि सभा के सभी चार भारतवंशी सदस्यों के आसान जीत दर्ज करने की उम्मीद जताई जा रही है।
विज्ञापन
इन मध्यावधि चुनावों में तीन बार के अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य एमी बेरा और पहली बार प्रतिनिधि सभा के लिए चुनकर आए तीन सदस्य शामिल हैं जो दोबारा निर्वाचन के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। इन चार मौजूदा सदस्यों के साथ-साथ सात भारतीय-अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में चुनकर आने के लिए चुनाव मैदान में कूदे हैं।
विज्ञापन
सफल उद्यमी शिव अय्यादुरई एकमात्र भारतवंशी हैं जो सीनेट के लिए लड़ रहे हैं। निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ रहे अय्यादुरई का मुकाबला मजबूत दावेदार एलिजाबेथ वॉरेन से है। मध्यावधि चुनाव में केवल यही भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार मैदान में नहीं हैं बल्कि अनाधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक करीब 100 भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
84 साल में सिर्फ तीन बार जीती ट्रंप की पार्टी
आमतौर पर किसी भी राष्ट्रपति के कार्यकाल के शेष बचे दो साल का प्रदर्शन अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में सामने आता है। लेकिन पिछले 84 वर्षों का रिकॉर्ड देखें तो सिर्फ तीन बार (1934, 1998 और 2002) ही मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी ने मध्यावधि चुनाव जीता है।
मंगलवार को होने वाले मध्यावधि चुनाव में सीनेट यानी अमेरिकी संसद के उच्च सदन की 100 में से 35 सीटों और प्रतिनिधि सभा यानी निचले सदन की सभी 435 सीटों पर सांसद चुने जाएंगे। इन चुनाव में 35 राज्यों के गवर्नर चुने जाने हैं।
ट्रंप पर ऐसे असर डालेंगे चुनाव
यदि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी मध्यावधि चुनाव में हारती है तो उसके लिए यह एक बड़ा झटका साबित होगा। सीनेट की 35 और प्रतिनिधि सभा की 435 सीटों का बड़ा हिस्सा गंवा देने पर अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यकाल के आगामी दो वर्ष में ट्रंप को नए कानून बनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। यहां तकत कि यदि विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी को रिपब्लिकनों से ज्यादा सीटें मिलती हैं तो वे इसे जनता के बीच राष्ट्रपति का गिरता भरोसा बताकर निचले सदन में राष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव लाकर दबाव भी बना सकती है।
मंगलवार को होने वाले मध्यावधि चुनाव में सीनेट यानी अमेरिकी संसद के उच्च सदन की 100 में से 35 सीटों और प्रतिनिधि सभा यानी निचले सदन की सभी 435 सीटों पर सांसद चुने जाएंगे। इन चुनाव में 35 राज्यों के गवर्नर चुने जाने हैं।
ट्रंप पर ऐसे असर डालेंगे चुनाव
यदि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी मध्यावधि चुनाव में हारती है तो उसके लिए यह एक बड़ा झटका साबित होगा। सीनेट की 35 और प्रतिनिधि सभा की 435 सीटों का बड़ा हिस्सा गंवा देने पर अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यकाल के आगामी दो वर्ष में ट्रंप को नए कानून बनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। यहां तकत कि यदि विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी को रिपब्लिकनों से ज्यादा सीटें मिलती हैं तो वे इसे जनता के बीच राष्ट्रपति का गिरता भरोसा बताकर निचले सदन में राष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव लाकर दबाव भी बना सकती है।