अमेरिका मध्यावधि चुनाव 2018: हाउस में मिली हार के बाद डोनाल्ड ट्रंप की वो मुश्किलें जो बढ़ेंगी
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अमेरिका में मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा यानी कांग्रेस के लोवर चेंबर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर कब्जा कर लिया है। अमेरिकी कांग्रेस में प्रतिनिधि सभा की कुल 435 सीटों में से 218 के बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी ने 245 के करीब सीटें जीती हैं। हालांकि सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा बरकरार है। रिपब्लिकन पार्टी को सीनेट में कुल 100 सीटों में से 51 के बजाए अब 54 सीटें मिल गई हैं।
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अमेरिका में मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा यानी कांग्रेस के लोवर चेंबर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर कब्जा कर लिया है। अमेरिकी कांग्रेस में प्रतिनिधि सभा की कुल 435 सीटों में से 218 के बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी ने 245 के करीब सीटें जीती हैं। हालांकि सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा बरकरार है। रिपब्लिकन पार्टी को सीनेट में कुल 100 सीटों में से 51 के बजाए अब 54 सीटें मिल गई हैं।
आठ वर्षों के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा में फिर से बहुमत हासिल किया है। डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता नेनसी पलोसी, जो अब प्रतिनिधि सभा में स्पीकर का पद भी संभाल सकती हैं, ने कहा कि अब डेमोक्रेट्स ट्रंप प्रशासन पर लगाम लगाएंगे। नेनसी पलोसी का कहना था, 'अब डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में बहुमत के जरिए अमेरिकी संविधान के तहत ट्रंप प्रशासन पर सारी कानूनी रोक लगाएगी। अब आम लोगों के हित में काम करने के लिए पार्टी काम करेगी। नए कानून बनाए जाएंगे और पार्टी स्वास्थ्य, शिक्षा, और अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में बढ़ चढ़कर काम करेगी।'
लेकिन पलोसी ने यह भी कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी सबको साथ लेकर चलने की कोशिश जरूर करेगी। डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए राजनीतिक तौर पर धक्का माना जा रहा है। अभी तक राष्ट्रपति ट्रंप के दो साल में सीनेट और प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी को बहुमत हासिल था और प्रशासन आसानी से कई कानून और नीतियां मंजूर कराने में कामयाब रहा था। लेकिन अब ट्रंप प्रशासन के लिए ऐसा करना आसान नहीं होगा।
अब प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी ट्रंप प्रशासन की हर नीति की गहन छानबीन कर सकती है, इससे पहले की नीतियों पर फिर से गौर कर सकती है, खुद राष्ट्रपति ट्रंप के निजी व्यापार और वित्तीय मामलो की जांच कर सकती है। यहां तक कि रूस के साथ कथित तौर पर राष्ट्रपति ट्रंप के संबंधों के आरोपों के बारे में भी गहन छानबीन कर सकती है।
सबसे अहम बात यह है कि डेमोक्रेटिक पार्टी अब प्रतिनिधि सभा में राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई भी शुरू कर सकती है। डेमोक्रेट्स इन चुनावों से पहले तो यह कहते रहे थे कि वह ट्रंप और ट्रंप प्रशासन की हर नीति और मामले की बारीकी से छानबीन करेगी, लेकिन अब यह देखना है कि चुनाव जीतने के बाद डेमोक्रेट्स ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर और खुद ट्रंप के रवैये को बदलने में किस हद तक असरदार साबित होंगे।
प्रशासन के कुछ उच्च पदों पर नियुक्ति के लिए अधिकारियों की सीनेट में मंजूरी जरूरी होती है। इसके अलावा अदालतों के जजों की नियुक्ति भी सीनेट को मंजूर करना जरूरी होता है। इसलिए अब राष्ट्रपति ट्रंप अपने पसंद के रूढ़िवादी जजों की नियुक्ति आसानी से कर सकेंगे। रिपब्लिकन पार्टी के अहम सीनेटर लिंडजी ग्रेहेम ने सीनेट में पार्टी की जीत पर संतोष जताया। उनका कहना था, हमें सीनेट में तो बहुत अच्छी कामयाबी मिली है और हम अपना रूढ़िवादी एजेंडा आगे बढ़ा सकते हैं।
प्रतिनिधि सभा में अगर डेमोक्रेट्स हमारे साथ काम करते हैं तो ठीक नहीं तो अगर उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप पर अधिक दबाव बनाने की कोशिश की तो उसका नतीजा वह 2020 के आम चुनाव में भुगतेंगे। उधर डेमोक्रेट्स ने गवर्नरो के चुनाव में भी कई प्रांतों में कामयाबी हासिल की है। मंगलवार को हुए मध्यावधि चुनावों में अधिकतर डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों के खिलाफ अपनी नाराजगी जताने के लिए वोट देने भारी संख्या में निकले। इसका असर चुनाव के नतीजों पर दिखा भी।
दूसरी तरफ सीनेट की सीटों पर कामयाबी यह भी साफ करती है कि राष्ट्रपति ट्रंप के लिए रिपब्लिकन पार्टी में उनके समर्थक उनकी हिमायत में डटे हुए हैं। उधर भारतीय मूल के जो 12 उम्मीदवार प्रतिनिधि सभा के चुनावों में शामिल थे उनमें से मौजूदा सांसदों में वॉशिंगटन प्रांत से प्रमिला जयपाल, इलिनॉय ले राजा कृष्णमूर्ति और कैलिफोर्निया से रो खन्ना और अमी बेरा फिर से चुनाव जीत गए हैं।
लेकिन अरीजोना में दो महीला उम्मीदवार हीरल तिपिर्नेनी और अनीता मलिक चुनाव हार गई हैं। प्रांतीय स्तर पर अरीजोना, मिशिगन, कैंटकी जैसे प्रांतों में कई भारतीय मूल के उम्मीदवार असेंबली और प्रांतीय सीनेट के चुनाव में जीत गए हैं। वहीं दो मुस्लिम महिलाओं ने भी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए एतिहासिक जीत दर्ज की है। मिनेसोटा से सोमाली मूल की अमेरिकी इलान उमर और फलस्तीनी मूल की अमेरिकी रशीदा तालिब ने मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर अपने अपने चुनाव जीत लिए हैं।