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अमेरिकी मानवाधिकार विशेषज्ञ ने कहा- भाजपा करती है हिंदूवादी समूहों का समर्थन

Sat, 18 Jun 2016 01:17 AM IST
एजेंसी/ वाशिंगटन
एजेंसी/ वाशिंगटन Updated Sat, 18 Jun 2016 01:17 AM IST
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US lawmakers told: Religious tolerance in India deteriorating
गुजरात दंगों से सबंधित एनजीओ पर सरकार की कार्रवाई का भी किया जिक्र

मोदी सरकार बनने के बाद देश में बढ़ती असहिष्णुता की बहस अमेरिका में भी छिड़ी हुई है। मानवाधिकार क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञों ने अमेरिकी सांसदों को कहा है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के बढ़ते मामलों के चलते धार्मिक सहिष्णुता लगातार गिरती जा रही है।

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अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग के पूर्व अध्यक्ष और प्रिंसटन युनिवर्सिटी के प्रोफेसर रॉबर्ट पी जॉर्ज ने यूएस कांग्रेस में सुनवाई के दौरान कहा है कि भारत में अल्पसंख्यक वर्ग में खासकर मुस्लिमों और सिख समुदाय के बीच पिछले सालों में धमकी, उत्पीड़न और हिंसा के मामलों में इजाफा हुआ है।
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उन्होंने इसके लिए हिंदू राष्ट्रवादी समूहों को जिम्मेदार ठहराया। यही नहीं पॉल ने खुलकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का नाम लेते हुए कहा है कि सत्तारूढ़ पार्टी इन समूहों को बाकायदा समर्थन देती है। उन्होंने कहा कि तनाव को बढ़ावा देने के लिए भड़काऊ भाषा भी बोली जाती है।
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मानवाधिकार विशेषज्ञ ने अपने दस्तावेजों में कहा है कि पुलिस के प्रभावी तरीके से काम नहीं करने और साथ ही न्यायपालिका से भी इंसाफ नहीं मिलने की वजह से अल्पसंख्यक वर्ग भारत में खुद को असुरक्षित समझता है। इसके अलावा देश में कई गैर सरकारी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की भारत सरकार की कार्रवाई को भी मानवाधिकार कार्यकर्त्ता ने अपनी रिपोर्ट में हिस्सा बनाया है।

उन्हाेंने अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों को जानकारी दी है कि गुजरात दंगों के मामलों से संबंधित सबरंग ट्रस्ट और सिटीजन फोर जस्टिस एंड पीस को सरकार की कार्रवाई का सामना करना पड़ा हे। उनके फंड रोक दिए गए है। अमेरिका के फोर्ड फाउंडेशन जो इन दोनों एनजीओ को फंड देता था को भी गृह मंत्रालय ने अपनी निगरानी की सूची में डाल दिया है।

पाक के परमाणु कार्यक्रमों से बढ़ा भारत के साथ टकराव का जोखिम

US lawmakers told: Religious tolerance in India deteriorating
यूएस कांग्रेस की रिपोर्ट में जताई चिंता - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम की वजह से भारत के साथ टकराव का जोखिम बढ़ गया है। कांग्रेस रिसर्च सर्विस ने अपनी ताजा रिपोर्ट में इस्लामाबाद के परमाणु हथियारों के भंडार का दायरा बढ़ाने पर चिंता जताई है। रिपोर्ट में संभावना व्यक्त की गई है कि पािकस्तान के पास 110-130 परमाणु हथियारों से भी ज्यादा का भंडार हो सकता है। रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियरों का भंडार अपने खिलाफ भारत को सैन्य कार्रवाई करने से रोकने के लिए तैयार किया गया है।

सीआरएस यूएस कांग्रेस का एक स्वतंत्र शोध विभाग है। जो समय समय पर अमेरिकी सांसदों की जानकारी के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी रिपोर्ट तैयार करती है। रिपोर्ट यूएस कांग्रेस के अधिकारिक रूख को नहीं दर्शाती है। सीआरएस ‘कांग्रेस’ के दोनों सदनों को नीतिगत एवं कानूनी विश्लेषण मुहैया कराती है। रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि इस्लामाबाद की ओर से अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार करने, नए प्रकार के परमाणु हथियारों का विकास करने, और ‘फुल स्पेक्ट्रम डेटरेंस’ नाम के एक सिद्धांत को अपनाने पर कुछ पर्यवेक्षकों ने पाकिस्तान और अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार कर रहे भारत के बीच परमाणु संघर्ष का जोखिम बढ़ने को लेकर चिंता जताई है।

परमाणु अप्रसार विश्लेषक पॉल के केर्र और अप्रसार मामलों की विशेषज्ञ मेरी बेथ निकिटिन ने यह रिपोर्ट लिखी है। सीआरएस ने 30 पन्नों की यह रिपोर्ट ऐसे समय में दी है जब पाकिस्तान अमेरिकी कैपिटल हिल और अमेरिका सरकार के सामने एनएसजी सदस्यता के लिए लॉबींग कर रहा है।

Published By Rahul Sankrityayan

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