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'कहीं आपके फ़ोन पर किसी की नजर तो नहीं'

Fri, 07 Jun 2013 03:57 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Fri, 07 Jun 2013 03:57 PM IST
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us intelligence agencies keeping eye on your phone call

अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी लाखों अमेरिकियों के फोन कॉल्स पर नज़र रख रही है और फोन कंपनी वेरीज़ोन अपने ग्राहकों के फोन डिटेल्स की जानकारी नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी को मुहैय्या करा रही है।

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इस ख़बर से इतनी खलबली मची है कि फोन उपभोक्ता अब अपने फोन कॉल्स की डिटेल की पड़ताल कर रहे हैं। वो ये देखने की कोशिश कर कर रहे हैं कि किसने और कब उन्हें फोन किया था।
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उन्हें इस बात पर भी हैरानी हो रही है कि सरकार इस प्रक्रिया से उनके बारे में आखिर क्या जानना चाहती है?

कॉल पर नज़र
गार्डियन अख़बार का एक लेख एक खुफिया अदालती आदेश पर आधारित है जिसमें कहा गया है कि वेरीजॉन को इस बात की जानकारी देनी होगी कि कहां से कॉल की जा रही है, कॉल की अवधि क्या है और फोन पर बात करनेवाले दोनों पार्टियों के नंबर क्या हैं?
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ये अभी साफ़ नहीं है कि इस कवायद में टेक्स्ट मैसेज को शामिल किया गया है या नहीं।

हालांकि कहा गया है कि अधिकारी इन कॉल्स के कंटेंट और लोगों की आपसी बातचीत की जांच नहीं करेंगे।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, "लेख में छपे सरकारी आदेश में सरकार को ये अनुमति नहीं है कि वो किसी के फोनकॉल को सुने।"

फोन सुनने पर रोक
अमेरिकी संविधान के चौथे संशोधन के तहत फोन पर किसी की बातचीत को सुनने पर रोक है।

लेकिन अगर ये सूचना किसी तीसरी पार्टी के साथ साझा की जाती है जैसे कि फोन कंपनी, तो कोई समस्या नहीं है - ये कहना है टेक्सास विश्वविद्यालय में क़ानून के प्रोफ़ेसर रॉबर्ट चेस्नी का जो राष्ट्रीय सुरक्षा में विशेषज्ञता रखते हैं।

एनएसए के अधिकारी इन कॉल्स के आधार पर ही एक व्यक्ति के बारे में जानकारी जुटाते हैं।

इस तरह से जानकारी जुटाना वैध है और ये 2001 के पैट्रियट एक्ट के दायरे में आता है। इस क़ानून को किसी चरमपंथी हमले से बचाव में मदद के लिए बनाया गया था।

मदद मिलती है
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि अमेरिकियों के बारे में फोन कॉल जैसी निजी जानकारी जुटाना एक उपयोगी कार्रवाई है।

बाल्टीमोर में एफबीआई के प्रवक्ता रिचर्ड वोल्फ़ का कहना है, "फोन कंपनियों से जानकारी जुटाना मुझे लगता है कि एक नियमित कार्यकलाप है लेकिन ऐसा किसी मामले की जांच के दौरान ही किया जाता है।"

एनएसए की गतिविधियों के बारे में हाउस इंटेलिजेंस कमेटी के चेयरमैन माइक रॉजर्स कहते हैं कि। "इस कार्यक्रम का इस्तेमाल अमेरिका में एक चरमपंथी हमले को रोकने के लिए किया गया था।"

चरमपंथ पर नज़र
जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में क़ानून के प्रोफ़ेसर स्टीफन सॉल्जबर्ग कहते हैं कि अधिकारी फोन रिकॉर्ड्स से मिली सूचनाओं का इस्तेमाल लोगों के व्यवहार की पड़ताल के लिए कर सकते हैं। इस प्रक्रिया से ये जानकारी हासिल हो सकती है कि चरमपंथी कहां छुपे हो सकते हैं और उनकी योजना कहां हमला करने की है?

वो बताते हैं कि उदाहरण के तौर पर एनएसए के अधिकारी अमेरिका से यमन और पाकिस्तान में किए गए फोन कॉल की जांच कर सकते हैं जिन्हें हाल के वर्षों में चरमपंथ के नज़रिए से संवेदनशील माना जाता रहा है।


ओबामा शासन के दौरान अमेरिका नियंत्रित पायलट रहित ड्रोन हमलों में इन देशों में दर्जनों चरमपंथियों को मारा गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि फोन रिकॉर्ड्स के आधार पर जुटाई गई जानकारी का चरमपंथ को नियंत्रित करने में बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।

हालांकि कुछ लोग इन दावों से इत्तेफ़ाक नहीं रखते। सॉल्जबर्ग कहते हैं कि,"कई लोग इस बात से सशंकित हो जाते हैं कि सरकार उनके फोन नंबर पर नज़र रख रही है।"

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