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आजादी अमेरिका की, पर झंडा चीन का

Fri, 05 Jul 2013 08:45 AM IST
Updated Fri, 05 Jul 2013 08:45 AM IST
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us independence china

अमेरिका अपनी आज़ादी मना रहा है। लिंकन मेमोरियल के सामने खड़े हो जाएं तो जहां तक नज़र जा सकती है बस लाल, सफ़ेद और नीले रंगों के संगम से बना अमेरिकी झंडा नज़र आता है।

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बिकिनी हो या बीयर का ग्लास, झंडे की छाप आज वहां भी मौजूद है। बच्चे, बूढ़े, जवान सब घरों से बाहर निकले हुए हैं अमरीकी सपने का चुंबन लेने के लिए, उसे गले लगाने के लिए।
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लेकिन इस सपने पर एक खामोश सी मुहर लगी हुई है।

मेड इन चाइना

"मेड इन चाइना" देश का शायद ही कोई कोना हो जहां आकाश में आतिशबाज़ी की चमक नहीं नज़र आ रही हो।

लेकिन उस पर भी चीन की छाप है। कपड़े, चप्पल, जूते, बेल्ट, अंडरवीयर- चीन हर जगह पहुंचा हुआ है। वैसे इस पर हैरत किसी को नहीं होनी चाहिए क्योंकि अमेरिका चीन से हर साल चार सौ अरब डॉलर की रोज़मर्रा की ज़रूरतों को आयात करता है।
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लेकिन देशभक्ति के सबसे बड़े प्रतीक राष्ट्रीय झंडे पर चीन की मुहर ने लोगों को थोड़ा सकते में डाल रखा है।

वाशिंगटन मेमोरियल के पास खड़े एक परिवार से जब मैंने इस बारे में पूछा तो उनका कहना था कि उन्हें इस बारे में पता नहीं था। लेकिन फ़ौरन ही उन्होंने ये भी कहा, "मुझे चीन से शिकायत नहीं है लेकिन अगर अमेरिकी सरकार ने इसकी अनुमति दे रखी है तो ये ईशनिंदा जैसा है।"

अमेरिकी सेंसस ब्यूरो की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार अमेरिका ने पिछले साल 38 लाख डॉलर मूल्य के झंडों का आयात किया जिनमें से 36 लाख डॉलर के झंडे चीन से मंगवाए गए।

नए क़ानून की बात


अमेरिकी कांग्रेस में इसे रोकने के लिए एक क़ानून लाने पर बात हो रही है।

आयोवा के डेमोक्रैट सांसद ने 2010 में इस पर एक बिल पेश किया था और उसके बाद से हर साल ये पेश किया गया है। सेनेट और कांग्रेस के निचले सदन में ये पहले पारित भी हुआ है लेकिन अलग-अलग सत्रों में।

मौजूदा कानून कहता है कि राष्ट्रीय झंडे में लगनेवाले 50 प्रतिशत सामान अमेरिकी हों लेकिन जो नया क़ानून लाने की बात हो रही है उसके तहत झंडे को शत-प्रतिशत अमेरिका में ही बनाना होगा।


राष्ट्रचिन्ह का अपमान


इस बिल पर काम कर रहे डेमोक्रैट सांसद ब्रूस ब्रैली ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है कि झंडे को किसी और देश से मंगवाना राष्ट्रचिन्ह का अपमान है। उनका कहना है कि देश में कई कंपनियां हैं जो राष्ट्रध्वज बनाती है लेकिन उन्हें छोड़कर चीनी कंपनियों से झंडे मंगवाना बिल्कुल ग़लत है।

ब्रैली इसे आर्थिक से ज़्यादा एक राष्ट्रीय मर्यादा की तौर पर देखते हैं।

उन्होंने हाल ही में एक टीवी चैनल पर कहा, "जिस झंडे में हमारे शहीदों की लाश को लपेटा जाता है मैं चाहता हूं कि उस पर लिखा रहे मेड इन अमेरिका।" 

ब्रजेश उपाध्याय/बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन

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